00:00Pakistan cricket team ko akhir sange to sange kese
00:04kuyankhi yevwo team h Fragen
00:05jose kabhi aise mokablage ko apne hatoose nnikal djeti je
00:08jise jitna use ke liye behod asan hota ha
00:11aur kabhi aise mokablage mee baazi pelit dayti je
00:14jahat dunia ki nazar me
00:15useki jit ki umid lagbaak khatna ho cuki hotei je
00:18yuhi to Pakistan cricket ki w oh pichan hai
00:21جo isse baqee teamo se alag binati je
00:23اس team ke baare mei ap jitna bhi anndazah laga lijetsi
00:29।
00:30।
00:38।
00:39और जब सब को यकीन होता है कि पाकिस्तान आसानी से मुकाबला अपने नाम कर लेगा तब यही टीम अपने
00:45फैंस की धड़कने बढ़ा देती हैं।
00:46लेकिन आज इंगलाइन के खिलाफ जो कुछ देखने को मिला उसने एक बार फिर साबित कर दिया कि पाकिस्तान को
00:52कभी भी कमजोर समझने की गलती नहीं करनी चाहिए।
01:16को सबसे ज़ादा जरूरत थी और कैसे पाकिस्तान ने एक बार फिर दुनिया को दिखा दिया कि इसे अनप्रेडिक्टिबली अनप्रेडिक्टिबल
01:25क्यों कहा जाता है।
01:55तो चलिए।
01:57पाकिस्तान की टीम ने इस मकाबले में भी पाकिस्तान को ऐसी सिती में पहुचा दिया था जहां उसके समर्थकों की
02:03उम्मीदे तूटती दिखाई देने लगी थी।
02:05पाकिस्तान की पारी लड़कडा चुकी थी विकेट लगातार गिर रहे थे और मुकाबले पर इंगलाइंड की पकड़ मजबूत होती जा
02:12रही थी।
02:13ऐसा लग रहा था कि इंगलाइंड इस मैच को आसानी से अपने नाम कर लेगा बगर अंग्रेजों को शायद इस
02:18बात का अंदाज़ा नहीं था कि पाकिस्तान क्रिकेट की कहानी इतनी जल्दी खत्मा नहीं होती ये वही पाकिस्तान है जो
02:25कभी अपने फैंस को निराश कर द
02:38लगे थे उसी टीम ने आखरी पलों में मकाबले का रुख बदल दिया लेकिन सवाल ये कि इंगलाइंड ने अपनी
02:44पकड़ इतनी मजबूत करने के बावजूद मैच हाथ से कैसे जाने दिया क्या अंग्रेजी टीम ने पाकिस्तान को कमजोर समझने
02:50की गल्ती की या फिर प
03:06लात करते हैं इंगलाइंड की बल्ले बाजी की इंगलाइंड ने पहले बल्ले बाजी करते हुए 46.4 ओवर में अपने
03:11सभी विकेट खोकर 281 रन बनाएं ये ऐसा स्कोर था जिसके सहारे इंगलाइंड के गेंद बास पाकिस्तान पर दबाव बनाने
03:18की उमीद कर सकते थे ले
03:35पाकिस्तान के विकेट गिरते रहे और एक वक्त ऐसा आया जब स्कोर 114 रन पर 9 विकेट हो चुका था
03:42अब ज़रा उस स्थिती की कलपना कीजिए एक तरफ इंगलाइंड की टीम जिसे लग रहा होगा कि जीत अब बस
03:48कुछ ही कदम दूर है दूसरी तरफ पाकिस्तान जिसक
04:02तक आखरी विकेट नहीं गिरता तब तक मैच खत्म नहीं होता इंगलाइंड के सामने भी यही चुनौती थी कि वो
04:08आखरी विकेट हासिल करें और अपनी जीत पर मुहर लगा दे मगर क्या इंगलाइंड ने उस वक्त पाकिस्तान की आखरी
04:15जोड़ी को उतनी गंभीरता से
04:16लिया जितनी जरूरत थी क्या उसे लगा कि अब पाकिस्तान के लिए लक्षे तक पहुंचना लगभग नामुम्किन है हम अंग्रेजी
04:24टीम के खिलाडियों के मन की बात नहीं जान सकते लेकिन मैदान पर जो हुआ उसने एक बात जरूर साबित
04:29कर दी आखरी विकेट लेने
04:46जब पाकिस्तान का स्कोर 154 रन पर 9 विकेट था तब टीम को जीत तक पहुँचाने के लिए असाधारन प्रदरिशन
04:54की जरूरत थी शादाप खान और हारिस्रोफ के सामने सिर्फ रन बनाने की चुनौती नहीं थी बलकि विकेट बचाने इंग्लाइन
05:01की गेनबाजों का सा
05:13आजेदारी में जिस तरह मुकाबले को आगे बढ़ाया उसने इंग्लाइन के गेनबाजों पर दबाव वापस जाल दिया शादाप ने एक
05:20छोड से जिम्मेदारी निभाई जबकि हारिस्रोफ ने उनका साथ दिया ये सिर्फ बल्लेबाजी नहीं थी बलकि उस वक्त हिम्म
05:27बनाए रखने की परीक्षा थी जब पूरी टीम की उम्मीदे इन दो खिलाडियों पर टिकी हुई थी इंग्लाइन के गेनबाजों
05:34के लिए भी हालात बदलने लगे होंगे क्योंकि जो मुकाबला कुछ दिर पहले लगबग उनके नियंद्रण में दिखाई दे रहा
05:39था उ
05:56जिनसे शुरुवात में सबसे कम उम्मीद की जाती है शादाप खान और हारिस रूफ ने इस मुकाबले में पाकिस्तान की
06:02उम्मीदों को तूटने नहीं दिया और अपनी साजहदारी से इंग्लाइन के हाथों से जीत छीन कर पाकिस्तान को यादगार जीत
06:09दिलाई ये जीत
06:11सिर्फ दो खिलाडियों के बले से निगले रनो की कहाणी नहीं थी बल्कि उस विश्वास की कहानी थी कि जब
06:17तक मुकाबला खत्म नहीं होता तब तक वापसी का रास्ता खुला रहता है और यहीवा मोड था जहां इंगलाइन की
06:24जीत की उम्मीदें पाकिस्तान की एतिहास
06:35ुपलब्दियों और क्रिकेट की पर गर्व करता आया है
06:39जब एशियाई टीमें इंग लैंड के दोरे पर जाती है तो उनके प्रदर्शन, तक्नीक, परिस्थितियों में खेलने की ख्षमता और
06:48दबाव में फैसलों पर तीखी बहस होती है
06:51कभी-कभी मीडिया क्या लोचना इतनी बर जाती है कि खिलाडियों की एक हार को उनकी पूरी ख्षमता पर सवाल
06:56की तरह पेश किया जाने लगता है
06:58लेकिन क्रिकेट का मैदान किसी एक देश की जागीर नहीं है
07:04पाकिस्तान, भारत, श्रीलंका और दूसरी एशियाई टीमों ने बार-बार दिखाया है
07:08कि वे दुनिया की किसी भी मजबूर टीम को चुनावती दे सकती है
07:11इसलिए इंग्लैंड की इसहार को किसी देश की पूरी क्रिकेट व्यवस्था की नाकामी कहना सही नहीं होगा
07:16लेकिन यह मुकाबला उन लोगों के लिए जरूर एक सबक है
07:20जो किसी टीम को उसके नाम, रैंकिंग या शुरुवाती बढ़त के आधार पर पहले ही विजेता माल लेते है
07:27इंग्लैंड ने पाकिस्तान को बेहद मुश्किल स्थिति में पहुचा दिया था
07:30मगर वो आखरी विकेट हासिल नहीं कर सका
07:33यही उसके सबसे बड़ी निराशा रही
07:35क्रिकेट में घमंड और आत्मविश्वास के बीच बहुत बारीक अंतर होता है
07:40आत्मविश्वास आपको आखरी गेन तक लड़ने की ताकत देता है
07:44जबकि अति आत्म विश्वास कभी-कभी आपको उस खत्रे को कम आकने पर मजबूर कर देता है जो भी खत्म
07:52नहीं हुआ
07:53हम ये नहीं कह सकते कि इंग्लाइड के खिलाडियों ने पाकिस्तान को हलके में लिया ही था
07:56लेकिन नतीजा ये जरूर बताता है कि मैच को खत्म करने के लिए सिर्फ अच्छी शुरुआत काफी नहीं होती
08:03आपको आखिरी विकेट तक अपनी योजना एकागरता और दबाव में फैसले लेने की क्षमता बनाये रखनी पड़ती है
08:10पाकिस्तान ने अपनी आखरी जोड़ी के जरिये इंग्लैंड को यही सबख दिया
08:13और अंग्रेजी मीडिया के लिए भी याद रखने का मौका है कि क्रिकेट में किसी विरोधी टीम को कम आखना
08:18कभी समझधारी नहीं
08:19होती क्योंकि मैदान पर जवाब अकसर शब्दों से नहीं प्रदर्शन से दिया जाता है
08:24लेकिन इस जीत का सबसे बड़ा पहलू सिर्फ इंग्लैंड की हार नहीं बलकि पाकिस्तान के लिए इसके माइने है
08:31पाकिस्तान ने जिस स्थिती से वापसी की उसने टीम को आत्म विश्वास देने के साथ साथ ये भी दिखाया कि
08:37मुश्किल वक्त में निचले करम के खिलाडियों का योगदान कितना एहम हो सकता है
08:41अगर शादाब खान और हारिस रॉफ उस वक्त हार मान लेते तो शायद कहानी बिलकुल अलग होती
08:48मगर उन्होंने आखरी विकेट की साज़ेदारी को अपनी टीम की उमीद बना दिया
08:52ऐसी जीते टीम के भीतर विश्वास पैदा करती हैं और फैन्स को भी एहसास कराती हैं कि क्रिकेट में कुछ
08:57भी असमभव नहीं है
08:59पाकिस्तान की टीम अब फाइनल तक पहुँच चुकी है इसलिए इस मुकाबले की एहमियत और भी बढ़ जाती है
09:05फैनल से पहले इस तरह की जीत खिलाडियों को मानसिक मजबूती दे सकती है क्योंकि उन्होंने देखा कि बेहद मुश्किल
09:11परिस्थिती में भी मुकाबला जीता जा सकता है
09:14तीम को ये भी समझना होगा कि हर मैच में आखिरी विकेट की साज़ेदारी के भरोसे नहीं दाए जा सकता
09:19अगर पाकिस्तान को फाइनल में भी ऐसा ही प्रदर्शन करना है तो शुरुवाती बले बाजो, मध्यकरम, गेंद बाजो और फिल्डरो
09:26सभी को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी
09:28शादाब और हारिस की साज़ेदारी ने टीम को जीत दिलाई लेकिन आगे सफलता हासिल करने के लिए पूरी टीम का
09:34योगदान जरूरी होगा
09:35दूसरी तरफ इंगलाइन को भी सार से सीखना होगा कि मजबूत सिती में पहुँचने के बाद मुकाबले को खत्म कैसे
09:41किया जाता है
09:42एक ऐसी टीम जिसने पाकिस्तान को एक 154 रन पर 9 विकेट तक सीमित कर दिया था
09:48अगर वही मैच हार जाती है तो उसे अपनी डेथ बॉलिंग दबाव में रन नीती और आखरी विकेट के खिलाफ
09:54योजना का विशलेशन करना ही होगा
09:56आखिर कार इस मुकाबले ने फिर साबित कर दिया कि पाकिस्तान को समझना आसान नहीं है
10:01कभी ये टीम ऐसे मौके गंवा देती है जिनें जीतना चाहिए और कभी ऐसी बाजी पलट देती है जिसे दुनिया
10:09लगभग खत्म मान चुकी होती है
10:11यही पाकिस्तान क्रिकेट की अनिशित्ता है यही इसका रोमांच है और यही वज़ा है कि इसके मुकाबलों में आखिरी गेंट
10:18तक उम्मीद बाकी रहती है
10:20इंग्लैंड के खिलाफ यह जीत शादाव खान और हारिस रूफ के नाम जरूर रहेगी लेकिन इसका संदेश पूरी क्रिकेट दुनिया
10:27के लिए है
10:28मैश तब तक खत्म नहीं होता जब तक आखिरी विकेट नहीं गिरता