00:00नमस्कार मैं हूँ शम्स काहरखान और आप देख रहे हैं वारदाथ
00:03नीले ड्रम वाली मुसकान और उसके प्रेमी साहिल का कहना है
00:08कि कोट ने उन्हें मिर्तिव डंड देते वक्त कुल पंदरह गलतियां की
00:12इन दोनों के वकील ने निचली अदालत के फैसले को
00:16इलाहबाद हाई कोट में चुनोती देते हुए
00:18बाकाइदा इन पंदरह गलतियों का हवाला दिया है
00:22इसके साथ ही अपील में इस केस को रेरिस्ट औफ रेर करार देने पर भी सवाल उठाए गया है
00:28आई आज़ आज़ आपको वारदाथ में बताता हूँ
00:30के मुसकान केस में अब आगे क्या क्या होगा
00:36ये मेरट डिस्टिक कोट है
00:39और ये मेरट डिस्टिक कोट से करीब छेसो पचास किलो मिटर दूर इलाहबाद हाई कोट
00:46और ये मेरट की डिस्टिक जेल है
00:49इसी जेल में इस वकत नीले डरमवाली मुसकान और उसका प्रेमी साहिक अलग अलग तैरकों में बन दे वी बन
00:57देने
00:57इस जेल के अंदर इस वकत कुल चार गैद ही ऐसे है جिने फासी की सजा मिल की बिंदे
01:03इन में मुसकान और साहिक के अलावा रवीता और अमरदी बैए
01:19डिस्ट्रिक कोर्ट से मिर्द्यू टंड मिला तो ठीक उसके दो दिन बाद सोला दूबर को रवीता और उसके आशिक अमरदीप
01:26को भी मौत की सजा भी अब चूंकि मुसकान और साहिल को मौत की सजा पहले सुनाई गए थी इसलिए
01:33इस सजा के खलाप दोलों ने उपरी अदाल
01:48यानि हाई कोर्ट सीधे पलट सकता है फैसला रद कर सकता है सजा कम कर सकता है या सीधे बरी
01:56भी कर सकता है और ये सब होता कैसे है सवाल ये भी है कि मुसकान और साहिल मेरट की
02:02जेहल में बंद है तो क्या इलहाबाद हाई कोर्ट में जब ट्राइल शुरू होगा तो क्या बा
02:18मुसकान और साहिल के वकील किस आधार पर उपरी अदालत में चुनौती दे रहे हैं।
02:23वो कौन कौन सी चीजे हैं जो मुसकान और साहिल के वकील के हिसाब से निचली अदालत में सजा सुनाते
02:30वक्तero были या तो नदरन्दास कर दिया या उस्के अंदेखी
02:46की तरफ से इलहाबाद हाई कोट में दाखिल की गए असल में यही वो क्रिमिनल अपील है जिसे आम जुबान
02:52में निचली अदालत के फैसले को उपरी अदालत में चुनौती देना कहते है हाला कि जब बात मिर्तियो डंड यानी
03:00सजा मौत की आती है तब एक चीज अलग हो जात
03:15हाई कोट ही उस मिर्तियो डंड के फैसले को मनजूरी दे सकता है ऐसा इसलिए है ताकि ये तै किया
03:21जा सके कि कहीं निचली अदालत के जरीए कोई सबूत गवाह या केस से जुड़े किसी एहम पहलू को नजरांदास
03:29तो नहीं कर दिया गया इसलिए हाई कोट पहले उस फैस
03:32पहले को देखता और समझता है और फिर निचली अदालत में दिये गए मिर्तियो डंड की सजा को मनजूरी या
03:39फिर खारिच कर देता है इसे ऐसे भी समझा जा सकता है कि मान लीजिए मुसकान और साहिप मेरट डिस्टिक
03:47कोट के फैसले के खलाब इलहाबाद हाई कोट न जा
04:03हमारे देश का जूडिशल सिस्टम कुछ इस तरह है कि किसी भी मुकदमे में सबूत गवाह दस्तावेज यानि जितने भी
04:10एविडन्स और बिटनिस होते हैं वो सभी निचली अदालत में ही पेश किये जाते हैं उपरी अदालत यानि हाई कोट
04:17और सुप्रेम कोट में सिर्�
04:19जड्मेंट की कौपी और जड्मेंट के पॉइंट्स पर जिराया बहस होती हैं अमूमन उपरी अदालत में सबूत गवाह दस्तावेज पेश
04:27नहीं किया जाते हैं अलबता कई बार कोट को जरूरी लगता है तब वो ऐसा कर सकता है मुसकान और
04:34साहिल के केस में उनके वकील �
04:36इलावाद हाई कोट में जो क्रिमनल अपील गाहर की है उसमें कुल 15 ऐसे पॉइंट्स है जिनके आधार पर मिर्तियु
04:43धंड देने के निचली अदालत के फैसले को कानून के खिलाप बताया है आईए पहले उन 15 पॉइंट्स को समझ
04:51लेते हैं अपील के पहले ग्राउंड मे
04:54कहा गया है कि निचली अदालत का फैसला पूरी तरह से गहर कानूनी और तर्क ही भी सबूतों को बिना
05:00समझे और जाने फैसला दिया गया है सरकारी वकील शक्ती सारी गुंजाइशों को दूर करने नाकाम रहे किसी भी केस
05:09की तरह ऐसी सूरत में संदेह का लाग दिया जाना
05:12चाहिए खासकर तब जब सबूत भी पुखता ना हो निचली अदालत बिना पुखता सबूत के सिर्फ कमजोर परिस्थिती जन्ने सबूतों
05:20के आधार पर है फैसला सुना दिया सरकारी वकील ने कतले के लिए खरीदे गए हत्यार सिमिन और नीले ड्रम
05:27की सुतंतर गवाह से
05:28ना तो वरिफिकेशन करवाय और ना ही उससे जुड़े बिल या सीसी टीवी फुटेज कोड में पेश की निचली अदालत
05:35एफायार दज करने की टाइमिंग और तारीफ को लेकर उठे सवाल कभी जवाब नहीं दे लिए आरोपियों से बरामत सामान
05:42से जुड़े रिकवरी
05:43मेमों पर ना तो सुतंत्र गवाहों के दस्कत लिए गया और विडियो ग्राफी भी गलत की दे लिए
05:49सरकारी वकील इस केस में पूरी तरह कॉल डिटेल रिकॉर्ड और टावर लोकेशन पर ही भरोसा करते रहे
05:56जबकि इससे जुड़े सबूतों पर किसी नोडल अफसर से न तो उन से बात की ना उन से इसे सत्यापित
06:02किया
06:02बिना डियने प्रोफाइली या बलड लूप मैच कराए ही सौरव राजपूत के कंकाल को सौरव माल लिया गया
06:09पोस्ट मौटम करने वाले डॉक्टर ने ये कहा कि लाश बुरी तरह खराब हो चुकी थी
06:14विसरा भी सम्हाल कर नहीं रखा जा सकता था
06:16जिसकी वज़ा से सौरव की मौट की सही सही वज़ा और मौट का वक्त कभी पता ही नहीं चल पाया
06:23निचले अदालत ने गलत तरीके से इस केस को रेरिस्ट आफ रेर की कैटिगरी में रखा और मौट की सजा
06:30दी
06:30निशले अदालत ने मुसकान और साहिल की कम अम्र जेल के अंदर उनके अच्छे बरताओ
06:35मुसकान की दो बेटियों के पालन पोशर के साथ साथ
06:39इस बात को भी नजर अंदास कर दिया कि ये दोनों का पहला जुरू है
06:43निशले अदालत में पालिका की ये बात भी भूल गई
06:46कि सजा देते वक्त ये भी देखना चाहिए कि सजा पाने वाले के सुधरने की उम्मीद कितनी है
06:52निशले अदालत में दोनों को जो सजा दिये हैं वो सबसे ज़्यादा कठोड है
06:59इनी 15 पॉइंट्स के साथ मुस्कान और साहिल के वकील इलहाबाद हाई कोर्ट से
07:04दोनों की मौत की सजा को रद्द करने और उस पर रोक लगाने की मांग की है
07:10तीस दिन के अंदर या तो प्राइवेट अपील होनी होती है जब किसी को में पुदन मिलता है
07:15या फिर सरकारी अपील होनी होती है तो जब हम लोगों ने पूछा कि प्राइवेट अपील होगी या सरकारी अपील
07:22तो दोनों ने बताया कि वो प्राइवेट अपील करेंगे
07:25और मान्यू चन्याल है कि वरिष्ट अधिवक्ता एडवोकेट सुसील सुकला जी उस केस को लड़ रहे है दोनों का केस
07:33एक ही वकील लड़ रहे है तो जेल को भी ऐसे बंदी जो कि प्राइवेट या सरकारी अपील करते है
07:38उस अपील का रिकॉर्ड रखना होता है प्राइ�
07:43अपील पड़ गई है तो हम लोगों ने रिकॉर्ड देखा तो उसमें एक ही वकील दोनों के करेंगे इस अपील
07:50को और उन्होंने अपील डाकिल भी कर दी है उसका नमरादी आगया इलाबाद हाई कोट में जैसे ही अपील सुईकार
07:57होगी मुसकान और साहिल के मिर्दी दं�
08:12कोट हर तारीख पर जाना नहीं पड़ेगा अगर गलती से दोनों को हर पेशी पर हाई कोट जाना पड़ता तो
08:18सोची हर बार उन्हें करीब साड़े छे सो किलो मेटर का जेल से कोट तक का सफ़त तैक करना पड़ता
08:28मुहम्मद उस्मान चौधरी मेरट आज तक
08:36मुस्कान का केस अब मेरट डिस्ट्रिक कोट से इलाहाबाद हाई कोट पहुच गया है
08:41मेरट कोट के वकीलों की एक लड़ाई लंबे वक्त से चली आ रही है
08:45और वो ये कि इलाहाबाद हाई कोट जाने में उन्हें इतना वक्त लगता है कि उससे पहले तो वो लाहोर
08:52हाई कोट पहुँच जाए
08:53इसलिए जरूरी है कि मेरट में ही इलाहाबाद हाई कोट की एक और बिंच हो
09:0225 करोड की आबादी वाले उत्तर प्रदेश में हर राज्य की तरह एक हाई कोट है इलाहाबाद हाई कोट अब
09:09चुकि राज्य बड़ा है और आबादी बड़ी तो लहाजा इलाहाबाद हाई कोट की एक और बिंच भी है जिसे लखनो
09:15बिंच के नाम से जाना जाता है
09:21परामूमन इलहाबाद हाई कोट की इस लखनो बेंच में पूर्वी उत्तरप्रदेश के ही ज्यादा तर मामले आते हैं
09:27पश्मी उत्तरप्रदेश जिन में मेरट भी शामिल है यहां से जो भी मुकदमे गूपरी अदालत में जाते हैं
09:33वो सीधे इलहाबाद हाई कोर्ट जाते हैं
09:35हाला कि पिछले करी 50 सालों से
09:38मेरट कोर्ट के वकील ये मांग करते आए
09:40कि लखनौ बेंच की तरह पश्मी उत्तर प्रदेश में भी
09:43हाई कोर्ट की एक बेंच हो
09:45ये बेंच मेरट में भी हो सकती है
09:5214 अक्तूबर को जिस दिन मुसकान और साहिल को सजा मौत दी गई
09:55उस दिन भी इस इमांग को लेकर मेरट डिस्ट्रिक कोर्ट के तमाम वकील स्ट्राइक पर दे
10:00सिर्फ दो ही मामलों की सुनवाई के लिए कोर्ट खुला हुआ था
10:04एक किसी मुकदमे का आखरी फैसला सुनाने के लिए
10:07जैसे मुसकान और साहिल का केस और दूसरा जमानत के लिए
10:11यहां के वकीलों की शिकायत यह है कि मेरट डिस्ट्रिक कोर्ट से इलावाद हाई कोर्ट इतनी दूर है
10:17कि उससे नजदीक तो पाकिस्तान का लाहौर हाई कोर्ट है
10:23अब पूरे यूपी में हराजी की तरह एक हाई कोर्ट होता है
10:26यूपी में एक हाई कोर्ट है अलावाद में और उसी हाई कोर्ट की एक बेंच है लखनो में
10:32मेरट में या फिर 22 डिस्टिक में जो मुकदमे आते हैं अगर यह लोवर कोट से हाई कोट में जाते
10:38हैं तो यहां के लोगों को लगबक 700 किलोमेटर ट्रैवल करना पड़ता है लखनो जाने के लिए अब इनकी एक
10:48बड़ी अजीब सी दुविधा या जो भी कहें कि लखनो जा
10:54से इनको नजदीक पड़ता है लहौर 435 किलोमेटर दूर है इनकी मांग कि मेरट के जो कोट है यहां एक
11:02हाई कोट की बेंच दी जाए आज तक पूरी नहीं हुए अब यह कहते हैं कि भाईया हम लखनो या
11:09लाबाद जाए उससे नजदीक तो लहौर पड़ जाएगा तो कु
11:23पचास साल से सर इस पछिमी उत्तर परदेश में हमें जो है मेरट में एक यह सेंटर है सर मेरट
11:32क्योंकि इसका लाश शिचेसन साहरनपुर सर शारनपुर से अलाबाद का डिस्टेंस है आठ सो किलोमेटरर और यहां से
11:51अभी मानियय योग अदित्यनाद जी आये थे उन से भी इस बात के लिए कहा गया था तो उन्हों न
11:57कहा कि ये मेरा मतलब विशे नहीं है ये सुप्रेम कोट का विशे है हमें बहुत परिशानी होती है यहां
12:03से हाई कोट तक जाने में साथ सो साथ सो किलोमीटर का सफर करना उस
12:21मानते हैं गंगा एक्सप्रेस वे देना एक अच्छी बात है लेकिन किया गरीब आदमी गंगा एक्सप्रेस वे वहन कर पाएगा
12:26क्या उसका टोल टैक्स और गाड़ी का पेंट्रोलिंग का खर्चा वह सब वहन कर पाएगा नहीं और अभी तो कुछ
12:30भी नहीं है यह जो हा�
13:03सब्सक्राइब कर देखा जाए तो लाहूर फॉर्टी फॉर एंडर 35 किलिम्टर फॉर मेर्ट से जो की पाकिस्थान बढ़ता है और
13:19हमारा जो
13:21अलावाद हाई कोट है वो 700 किलिमेटर है यहां से उच्छाइब की दूरी तैकरने के बाद जब हैना हम वकील
13:27लोग भी जाते है ना तो इतना बड़ा मतलब वहां के वकील लोग होते हैं वो खुद हैना मतलब इस्तरकी
13:32विहाव करते हैं कि मतलब बताये नहीं जा सकता
13:43खेर मुस्कान और साहिल के मिर्टूडन पर जिरह, बहस, दलील, सब कुछ अब इलहाबाद हाई कोर्ट में ही होना है
13:51अपील के साथ इस मुकदमे का आगास हो चुका है
13:54अब फैसला कितने महीनों या कितने सालों में आता है
13:57ये फिलहाल कोई नहीं बता सकता
13:59एक बार फैसला आ जाए, तब फिर फैसला जो भी हो, मुकदमा फिर भी खत्म नहीं होने वाला
14:05क्योंकि एलाबाद हाई कोर्ट में मुकदमा खत्म होते ही
14:08देश की सबसे बड़ी अदालत सुप्रिम कोर्ट में फिर से एक नई शुरुआत होगा
14:13उस शुरुआत के बार खात्मे तक वहाँ भी कितने महीने या कितने साल लगेंगा, कोई नहीं चाबता
14:28मुकदमा उस्मान चौदरी मेरट आज तक
14:34तो वारदात में फिराल इतना ही, मगर देश और दुनिया की बाकी खबरों के लिए आप देखते रही आज तक
14:40मेशने सकते है
14:40जजल
14:40झाल
14:40कि जजल