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  • 5 minutes ago
26 अक्टूबर को सरकार ने E100 से चलने वाली गाड़ियों से जुड़े नियमों में बदलाव किया. लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि आप कल से अपनी कार या बाइक में E100 भरवा सकते हैं. क्योंकि इस फ्यूल की कीमत से लेकर आपकी गाड़ी के माइलेज तक, कई ऐसे सवाल हैं जिनके जवाब तय करेंगे कि इससे आपको फायदा होगा या नहीं. क्या इसके लिए नई गाड़ी खरीदनी पड़ेगी. पेट्रोल के मुकाबले इससे कितनी बचत हो सकती है और क्या ये भारत की तेल आयात पर निर्भरता कम करने में मदद कर सकता है ? सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने 26 अक्टूबर 2026 को केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 में संशोधन की अधिसूचना प्रकाशित की. इसके तहत वाहन उत्सर्जन से जुड़े प्रावधानों में E85 के साथ E100 को भी साफ तौर पर शामिल किया गया. अब E100 पर चलने के लिए डिजाइन की गई फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियों के लिए नियमों से जुड़े प्रावधान साफ हैं. E100  एथेनॉल आधारित मोटर फ्यूल है. एथेनॉल एक तरह का अल्कोहल है, जिसे गन्ने के रस, शीरे और कुछ प्रकार के अनाज जैसे जैविक कच्चे माल से बनाया जा सकता है. भारत में E20 पेट्रोल की फ्यूल में 20 प्रतिशत एथेनॉल की मात्रा और बाकी मुख्य रुप से पेट्रोल होता है. E85 में एथेनॉल की मात्रा करीब 85 प्रतिशत होती है.वहीं E100 नाम ऐसे फ्यूल के लिए इस्तेमाल होता है, जो लगभग पूरी तरह एथेनॉल आधारित हो.

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05:44गाड़ी की प्रमारित अनुकूलता दोनों की अलग-अलग पुष्टी करें। इस गुथी को सुलजाना आसान नहीं है। तो ऐसे में
05:52सवाल उठता है कि सरकार इस फ्यूल को बढ़ावा क्यों देना चाहती है। इसका जवाब केवल वाहन मालिक की जेब
05:59नहीं बलकि भारत की
06:01और उर्जा अर्थ विवस्था में भी है। देश की पेट्रोलियम जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात से पूरा होता है। इसके
06:07लिए बहुत सारा पैसा विदेश चला जाता है। यहीं से इथनौल की भूमी का सामने आती है। अगर पेट्रोल के
06:14कुछ हिस्से की जगह इ�
06:29टौती कर सकेंगे और इससे देश का काफी सारा पैसा बचेगा। चुकि इथनौल घरेलू स्तर पर क्रिशी उत्पादों से बनाया
06:37जाता है। ऐसे में किसानों के लिए भी ये एक नया बाजार बन सकता है। सरकार ने इथनौल के इस्तमाल
06:43को किसानों की आये और उर्जा स
06:45सुरक्षा से जोड कर देखा है। हलाकि इस कहानी का दूसरा पहलू भी है। जरूरी नहीं है कि इस से
06:51हर किसान की आये बढ़े। फाइदा फसल की कीमत, उत्पादल लागत, पानी की उपलब्धता, खरीद विवस्था और किसानों तक भुकतान
07:01पहुचने पर निर्भर कर
07:03अगर इथनौल उत्पादन के लिए अधिक पानी या खेती की जमीन की जरूरत पढ़ती है तो उसके पर्यावरिनिये और खाद्य
07:11सुरक्षा से जोड़े सवाल भी उठेंगे। इथनौल के इस्तमाल को अक्सर पर्यावरन हितकारी माना जाता है। लेकिन ये एक तरफा
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07:33पूरा हिसाब जोड़े तो तस्वीर बदल सकती है। इथनौल का संभावित फाइदा ये है कि उसका जैविक कच्चा माल बढ़ते
07:41समय कार्बन डायोकसाइड अवशोशित कर सकता है। फिर भी ये कहना सही नहीं होगा कि E100 इस्तमाल करने से गाड़ी
07:49का प्रदूशन शू
08:01लेकिन भारत के लिए ब्राजील का मॉडल अपनाना इतना आसान नहीं है। ब्राजील के पास गन्ने पर आधारित इथनौल उत्पादन
08:09और फ्लैक्स फ्यूल गाडियों का स्थापित बाजार है। भारत को अपनी क्रिशी विवस्था, पानी की उपलबधता, वाहन बाज
08:17और फ्यूल वित्रन के हिसाब से अपना मॉडल विकसित करना होगा। मौजूदा स्थिती में भारतिया बाजार में फ्लैक्स फ्यूल गाडियों
08:25का आकड़ा तेजी से बढ़ रहा है। मारूती सुजुकी, हीरो मोटर कॉप्स, टोयोटा जैसी कंपनिया इस दिशा में ते
08:47कंपनिया प्रमारित फ्लैक्स फ्यूल गाडियां बजार में उतारती है। E100 की खुर्दोरा कीमत और वास्तविक माइलेज क्या रहता है। कितने
08:56शहरों और हाइवे पर इसका नेटवक बनता है। इन सवालों के जवाब तै करेंगे कि E100 भारत में कितना बड़ा
09:03विकल्प
09:04बन सकता है। ब्यूरो रिपोर्ट ETV भारत
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