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Ahoi Ashtami Vrat Vidhi 2026: करवा चौथ के ठीक चार दिन बाद अहोई अष्टमी का व्रत रखा जाता है और इसे महिलाएं अपनी संतान की दीर्घायु की कामना के साथ रखती हैं। इस व्रत को भी आमतौर पर निर्जला ही रखा जाता है और इसमें तारों की पूजा करके व्रत का पारण करने का विधान है। इस व्रत को करने के साथ माताएं अपनी संतान के अच्छे स्वास्थ्य की कामना करती हैं और अहोई माता से बच्चों की दीर्घायु का आशीर्वाद लेती हैं। इस साल अहोई अष्टमी 01 नवंबर, रविवार को मनाई जाएगी। ऐसा माना जाता है कि यदि कोई भी महिला इस व्रत की करने के साथ अहोई माता की विधि-विधान से पूजा करती है, तो घर की सुख समृद्धि के लिए यह अच्छा होता है। ऐसे में मन में एक स्कवाल यह भी आता है कि आखिर अहोई माता हैं कौन और इनके लिए व्रत करना इतना फलदायी क्यों होता है? आइए आपको बताते हैं, इसके बारे में यहां विस्तार से।Ahoi Ashtami Vrat Vidhi 2026: Vrat Kaise Karte Hai,Upvas Me Kya Khae Kya Nahi ?

The Ahoi Ashtami fast is observed four days after Karva Chauth, and women observe it with the hope of a long life for their children. This fast is also typically observed without water, and the ritual involves breaking the fast by worshipping the stars. By observing this fast, mothers pray for the good health of their children and seek blessings from Ahoi Mata for their long life. This year, Ahoi Ashtami will be celebrated on Sunday, November 1st. It is believed that if any woman observes this fast and worships Ahoi Mata with proper rituals, it is good for the happiness and prosperity of the home. This begs the question: who is Ahoi Mata, and why is fasting for her so fruitful? Let us explain it in detail here.

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~PR.111~HT.318~ED.120~VG.HM~
Transcript
00:02अहोई अश्टमी का वरत उत्तर भारत में माताओ द्वारा अपनी संतान की लंबी उम्र अच्छी स्वास्त और सुख सम्रुद्धी के
00:10लिए रखते हैं
00:11ये वरत करवाचोद की तरह ही कठिन होता है और सुर्योदे से शुरू होकर शाम को तारों को अर्ग देकर
00:17खुला जाता है
00:19अहोई अश्टमी वरत के समय, नियम, क्या खाएं क्या ना खाएं और साथ ही वरत की संपूर्ण विधी क्या रहीगी
00:27आईए बताते हैं
00:28वरत का संकल्प और नियम सुर्योदे से पहले, यानि लगभग सुबस चार बजे से लेकर पांच बजे की बीच से
00:35ही शुरू होगा
00:36ये वरत शाम को तारो का दर्शन और उनको अर्ग देने के साथ समाप्त होगा, कुछ जगहों पर चंद्रमा को
00:42देखकर भी वरत खोला जाता है
00:44वही बात करें पूजा के शुब मुहरत की, तो शाम चार बज कर 69 मिनट से लेकर 6 बज कर
00:5115 मिनट तक का समय पूजा के लिए सबसे शुब रहेगा
00:54तारो के दर्शन शाम पांच बज कर 22 मिनट के आसपास होंगे
00:59ऐसे तो ये वरत निर्जला रखा जाता है
01:02तो सुर्योदय से पहले तड़के 4 बजे से लेकर 5 बजे की बीच आपको कुछ खाना जरूरी है
01:08खाने में सुपाच्य और उर्जा देने वाला भोजन करें जैसे दूद, फेनिया, सिवईया, फल, मेवे और पनीर
01:16भरपूर पानी पीले, नारियल पानी पीले या ताजा जूस पीले ताकि दिन भर डिहाइडरेशन ना हो
01:22इस समय चाय कॉफी पीने से बचे
01:25ये आपको पूरे दिन गैस और अपच का कारण बन सकता है
01:29इस दोरान अधिक मसालेदार, तलाभुना या बुखत मीठा भी ना खाए क्योंकि इस से दिन भर प्यास और आसिडिटी बढ़ेगी
01:37बता दें कि निर्जला वरत से पहले खाना पीना करने के बाद स्नानादी से निवरत तो होकर हाथ में जल
01:44लेकर वरत का संकल्प ले ले
01:46इसके बाद से तारों को अर्ग देने तक आपको कुछ भी खाना पीना नहीं है
01:52लेकिन अगर आपको किसी भी तरह की स्वास्त समस्या है या फिर आप पूरे दिन वरत नहीं रख पाती है
01:59तो ऐसे में आप बीच बीच में फलहार ग्रहन कर सकती हैं इस दोरान चाय कॉफी पानी आदी का सेवन
02:04भी किया जा सकता है
02:05बतादी कि अहोई माता को अर्पित किया गया सात्विक भोग जिसमें मालपुआ, पूरी, हलवा, खीर या मीठे पूवे चड़ते हैं
02:13और सात्विक भोजन ही वरत खोलने के बाद ग्रहन करना चाहिए
02:17लहसुन, प्याज, मसालेदार, बासी खाना या अत्तिधिक तीखा या मसालेदार भोजन पूरे दिन और रात को भी बिलकुल ना बनाए
02:25और ना ही खाए
02:26वही अहोई माता की पूजा और तारो को अर्ग देने के लिए कांसे का, पीतल का या मिट्टी के लोटे
02:32या करवे का इस्तमाल करें
02:34आप करवा चोथ में इस्तमाल किये गए करवे का भी इस्तमाल इस पूजा में कर सकते हैं
02:39तांबे के बरतन से अर्ग देना इस दिन वर्जित माना गया है।
02:43वरत वाले दिन सुई धागा, कैची, सिलाई, कड़ाई या चाकू का इस्तमाल ना करें।
02:48इस दिन घर में या बाहर गमलों या बगीचों में मिट्टी खोदना या पेड़ पौधों को नुकसान ना पहुँचाए।
02:53दिन भर मन शानत रखें, क्रोध ना करें और बच्चों पर गुसा ना करें।
02:58पूजा के दोरान चान्दी की अहोई और मोतियों की माला पहनी जाती हैं, जिसे दिवाली के बाद किसी शुब दिन
03:04पर ही उतारते हैं।
03:06फिलहाल इस वीडियो में इतना ही, वीडियो को लाइक और शेयर करें, साथी चैनल को सब्सक्राइब करना ना भूलें।

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