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  • 4 minutes ago
चौरी चौरा में आयोजित जनसभा में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर जमकर हमला बोला

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00:00बैन और भाईयों, जब मैं चोरी चोरा आता हूँ, तो मुझे राष्ट कभी रामधारी सिंग दिन करकी कुछ पंग्तियां याद
00:12आती हैं।
00:15बारत के क्रांतिकारियों के बारे में उन्होंने लिखा था, कि जला अस्तियां बारी बारी, छिड़काई जिन्ने चिनगारी, जो चड़ गए
00:28पूर्डवेदी पर, लिये बिना गर्दन का मोल, कलम आज उनकी जैबोल।
00:44आज की जो परिस्तितियां देश के अंदर राजकता पैदा करने वालों के द्वारा जो परिस्तितियां पैदा की जा रही हैं,
00:51जो राजकता सड़कों पर की जा रही हैं, उनके बारे में भी रामधारी सिंग्तिन कर ने लिखा है कि अंदा
01:00चका चोध का मारा, क्या जाने इ
01:13Unki Meyer Bol
01:15Kinki Meyer Bol
01:18Jinao Ne
01:19Apna Sarwassato Necchaor
01:21Kerke
01:23Bharat Ki
01:24Ázaadí Ke Lire
01:25Apna Sarwassato Necchaor
01:27Kea Tha
01:27Or Mujhe To
01:29Ye Dekh Karke
01:32Astray Otah
01:33Hay
01:35Čori čora
01:36Ki Is Aithiasi
01:38Ghatna Ki
01:39Jom Bat Karte
01:40Hay
01:40To Beinor
01:42Barajiyong
01:44चोरी चोरा में 151, 172 देश भक्तों को अंग्रेजों ने फांसी की सजा दी थी
01:55एक कॉंग्रेश के लोग हाई तोबा मचाते हैं
02:01कि पंडित जवालान लेरू देश के बहुत बड़े अदिवक्ता थे
02:07लेकिन सच्चाई क्या है जब चोरी चोरा की एफ्यासी घटना को अंजाम दिया गया था
02:17चार फरवरी 1922 को
02:23और अंग्रेजों ने 172 उस समय के किसानों को सर्मिकों को ब्यापारियों को ग्रफतार करके फांसी की सजा सुनाई थी
02:36तब पंडित जवालाल नेरू नहीं आये थे
02:39तब कोई आया था पैर्वकारी करने के लिए
02:43तो आये थे पंडित मदन मोहन मालवी आये थे
02:48और मदन मोहन मालवी जी ने इतनी अच्छी पैर्वी की थी
02:53कि 151 क्रांतिकारी जो किसान थे सर्मिक थे ब्यापारी थे नौजवान थे उनको भांसी के फंडे से छुडाने में सपलता
03:06प्राप्त की थी
03:07और जिन क्रांतिकारीयों को यहाँ पर इस पूरे अभ्यान के साथ
03:16जिनको हम जानते हैं शी भगवान ही रहे इस घटना के मुख्य मारिद दर्सक
03:24नजर अली हैं कोमल सिंग्यादों हैं लाल मुहम्मद हैं
03:34मेगु तिबाडी हैं अब्दुल्ला हैं स्याम सुन्दर हैं सि महादेव सिंग हैं सि विक्र महीर हैं सि मेगु वली हैं
03:49काली चरण हैं लोटी कुमार हैं लोटू कोहार हैं रगुबीर सुनार हैं राम लखन हैं राम रूप हैं सहदेव हैं
04:04रुदली केवाड संपत अहीर सीताराम दुदही भर ये वे क्रांतिकारी हैं जिने चोरी-चोरा की एथियासि घटना के लिए अंग्रेजों
04:19ने फांसी के फंदे पर लटकाने का काम किया था
04:23बेन और भाईयों क्या इस्तियां थी नियाय की बात नहीं कर सकते थे अराजकता के खिलाब आवाज नहीं उठा सकते
04:33थे ये गुलामी की बेड़ियां देश को क्यों दी गई थी
04:40क्योंकि हम सब बिभाजित थे बटेवे थे आपस में लड़ते रहते थे बिदेशी ताक्तों की कुद्रिष्टी लगी थी जैसे ये
04:53आवसर आया उन्होंने पुरे देश को अपने आगोस में लेकर के भारत को गुलाम बना दिया
05:00हमारी स्वाधिन्ता को कैट कर दिया हमें बंधग बना के रख दिया बारत के संसादनों पर लूट मचा दी याद
05:11करिये
05:12ये भोपा वाजार रेलवे लाइन के दो भागों में बंड गिया
05:19दो भागों में बंड गिया जब 4 फरवरी 1922 को हम लोग यहां आये थे
05:29तब घंटों जाम लगा रहता था दोनों वोर जाम आवा गवन था और विवस्ता की इस्तिती होती थी
05:41लेकिन बेन और भाईयों तब ही हमने कहा था तब भी सी कमलेस पासवांजी ने कहा था इन्होंने मांग उठाई
05:51थी
05:53क्या ये पुल बन सकता है
05:58सिमती संगिता यादो तब विदायक थी इन्होंने भी कहा था
06:01सी जैप्रकास निसाज जी थे फिर सरवन निसाज विदायक बने तो इन्होंने भी कहा कि ये काम अब आगे वढ़ना
06:07चाहिए
06:07और आज मुझे प्रसंता है कि चोरी-चोरा सहीद इसमारक के साथ-साथ यहां के आवा गवन के लिए
06:15यह बहुत अच्छा फ्लाइ ओवर बन गया है जो कभी कल्प ना थी आज वसाकार हो गया है
06:24और इसलिए इस फ्लाइ ओवर को इस ओवर ब्रिच का नाम भी यहां के
06:31Kranthikari overbridge
06:32Ke rop me hi
06:33Saitismarak overbridge ke rop me hi
06:35Jana jana chahiye

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