00:00आप नौसकार गुड़ीवनीं सच्छेकार एक बाद फिर आप तमाम लों का स्वागत है क्राइम कहानिया विद श्रम्स
00:30या क्या कहिए कि जिस दी कंपनी या दाओद इबराहीम की जगह पर मुंबे में लौरेंस गैंग अपनी हुकूमत कायम
00:39करना जाता है
00:41इतफाक से वो दाओद इबराहीम भी आज से 43 साल पहले उसी साबरमती जेल में कुछ तिनों के लिए बंद
00:51था जिस जेल में इस वक्त लौरेंस विश्णोई बंद है
00:58आखरी बार अगर दाओद इबराहीम की हिंदुस्तान में कहीं गिराफ्तारी हुई थी तो वो गुजरात और आखरी बार हिंदुस्तान के
01:05किसी जेल में दाओद इबराहीम रहा तो वो वही साबरमती जेल जिसमें इस वक्त लौरेंस विश्णोई है
01:14दाओद इब्रहिम के सावरमती जेल जाने की कहानी भी बड़ी अजीब है
01:20और साथ ही लॉरेंस विश्णोई इस वक्त सावरमती जेल में
01:26टाइगर शॉट आउट के बाद कैसे उसी सावरमती जेल के अंदर
01:30उसके सेल को बदल दिया गया जहां उसको रखा गया था
01:33वो भी कहानी और ये बार-बार आपने हर तरफ से सुना की
01:38लॉरेंस विश्णोई सावरमती जेल में तीन साल से कभी बाहर नहीं आ था
01:43लेकिन ये सावरमती जेल वो गया क्यों था किस वज़ा से गया था
01:49तो शुरवात इसी से और फिर दाउद और सावरमती के कनेक्शन से
01:53बात 2022 की ये सितंबर का महीना था
01:57गुजरात पुलिस ने बहुत बड़ी मात्रा में ड्रक्स की खेब पकड़ी थी
02:03उस ड्रक्स की कुल जो वज़न था हिरोईन वो ड्रक्स करीब 39 के के खेब और उसकी कीमत थी लगभग
02:17194 करोर
02:18सितंबर 2022 की बात है उसी के बात फिर अगले साल 2023 अप्रिल में इसी ड्रक्स के केस के सिलसले
02:29में
02:30गुजरात पुलिस ने लौरेंस रिस्टोई को कोट के जरीर रिवान पढ़ लिया और फिर पूचताच के लिए गुजरात ले गई
02:36और पूचताच के बाद उससे साबर मती जेल में रखा गया और फिर इतफाक से उसी वक्त हॉमिनिस्टिक गैक ओर्डर
02:43आया जिसके बाद ये तैह हुआ
02:44कि अब लौरेंस साबर मती जेल में ही रहेगा किसी और जेल में नहीं हवाला ये भी दिया गया कि
02:51उसके गैंग के कनेक्शन को काटने के लिए तमाम गैंग अलग अलग जेलों में रहे एक दूसरे से संपरत ना
02:56करें उसकी वज़ा ये थी लेकिन खैद वज़ा पर कभी बह
03:13अब कहां है वो पहले कहां था यह पूरी कहानी बताओं उससे पहले बात दाओद इबरहीम की जून 1983 की
03:22बात है जून का महीना था दाओद इबरहीम मुंबई से गुजरात गया था पोर बंदर किसी काम के सलसले में
03:34गया होगा वही अंडरवल और बाकी तो पोर बंदर में �
03:37जाम सलाया नाम की एक जगा है वहाँ से वो अपनी कार से लोट रहा था बलके ये कार वहाँ
03:43के एक इसी तरह के शक्स लालू जोगी पटेल का था और लालू जोगी पटेल का जो ड्रैवर है गुलाब
03:51ये कार चला रहा था कार की अगली सीट पर ड्रैवर के बराबर में दा
03:57दाउद इब्रहेम के ठीक पीछे वाली सीथ पर एक और गुजरात का डॉन जिसका नाम था हाजी इसमाईल वो बैठा
04:04हुआ था
04:06कार चली जा रहे थी पोर बंदर से मुंबई की तरफ दाउद को मुंबई लोड़ना था
04:14और ये वो दोर था जब दाउद इब्रहेम की पठान गैंग से दुश्मनी शुरू हो गए थी
04:18पठान गैंग मुंबई के जो दाउद के गोल के स्मगलिं के धन्दे में दोनों गैंग में दराग पड़ी थी
04:26और पठान गैंग ने बात में दाहोध इब्राहिम के भाई साबिल इब्राहिम को माडा रहा था
04:31जिससे यह दुश्मनी और फेली फिरेकर पठान गैंग के लोगों को दाहोध गैंगने माडा शुरू किया
04:37पठान गैंग को भागना पड़ा हुव oraz चुपना पड़ा
04:39ये उसी दोर की बात है
04:42तो उसी में से एक था आलमजेब पठान
04:45ये आलमजेब पठान कभी दाहूद का साथ ही रहा था
04:48लेकिन फिर आपस में दुश्मनी हो गए थी
04:51तो जब ये लोग कार से गुजर रहे थे
04:53उसी दोरान रास्ते में अचानक
04:56अपोजिट साइब से सामने से आलमजेब
04:58और उसके गुरगे एक कार में बैठे वे चले आ रहे थे
05:02अब आमना सामना जब हुआ
05:04दोरों दुश्मनों का
05:06तो अचानक हाजी इसमाईल की नजर पड़ी
05:09हाजी इसमाईली दाओद के पीछे बैठा वता कार में
05:11उसने अचानक पिस्टल निगा ली
05:13और दाओद के पीछे बैठे बैठे उसने निशाना लिया
05:16आलमजेब की तरफ जो अगली सामने वाली कार में
05:20इत्फाक से मिस्फायर हो गया
05:21एक कहानी ये है कि वो गोली उसके हतेली पर लगी
05:24और हतेली से कार्तूस डाइवट होकर अगली सीथ पर बैठे
05:28दाओद की गर्दन बजा लगी
05:30हलाकि गर्दन के अंदर नहीं बाहरी परत पर
05:34पर एक कहानी ये भी है कि आलमजेब ने वो गोली चलाई
05:37और गोली दाओद की गर्दन को छूते बे निकल गई
05:40और फिर पीछे बैठे बे जो हाजी इसमाईल उसके हतेली पर लगी
05:45इसके बाद जैसी ये शूट आउट हुआ
05:49तो जो लादू जोगी पटेल का ड्राइवर गुलाब था वो मामले को समझी
05:54उसमें गाड़ी तेजी से भगाई और फिर बडौदा की तरफ भागा
05:57ये लोग बडौदा की तरफ भागी और फिर बडौदा में
06:01गाड़ी ले को ले जाकर एक साया जी अस्पताल है वहाँ रोग दी
06:07दाउट और हजी इसमाईल एक उठाया गया अस्पताल के अंदर ले जाया गया
06:10वहाँ उनका ट्रीट्मेंट शुरू हुआ
06:13गोली चुकी गर्दन में बाहर छूती वे निकली थी इसलिए बहुत ज़्यादा सीरियस मैटर नहीं था
06:18लेकिन इस शुट आउट की खबर तब तक जो बडौदा के पुलिस कमिशनर थे
06:24मिस्टर पीके दट ताउन तक पहुँच चुकी थी
06:25और दाउद उस वक्त भी एक बड़ा गाम था
06:28इस स्मगलिंग की दुनिया में सबसे बड़ा गाम
06:30और तब उसका धंदा ही था गोल्ड और एलेक्ट्रोनिक्स स्मगलिंग
06:34तो खुद पलिस कमिशनर पीके दटता पहुँचते हैं सायाजी अस्पताल
06:38दाउद से पूस्टाच करते हैं शूट आउट के बारे में
06:41जब पूस्टाच की तो दाउद ने बताया कि हाँ मेरा स्मगलिंग का धंदा है
06:45फिर उन्होंने पूछा कि ये गोली कैसे लगी
06:48तब दाउद या उसके किसी भी साथी ने आलमजेब खान का नाम नहीं लिया
06:52उन्हें का कि बस ये एक्सिडेंटली गोली चल गई और हमें लग गई
06:57किसी ने आलमजेब का नाम नहीं लिया था
06:59कहते हैं उसकी वज़ा थी
07:00दाओद नहीं कहता था कि पुलिस उसके खिलाफ एक्षन ले या पक ले
07:03वो खुद उसे सजा देना चाहता था
07:07खैर ये इस सूट आउट के बाद अस्पताल से जब छुटी हुई
07:10तो उसी वक्त गुजराद पुलिस तीन करोड की एक
07:15स्मगलिंग के कीस की जाज कर रही थी और जिसमें दाओद का भी नाम था
07:18अब दाओद बैठे बिठाए गुजराद पुलिस के हाथ लग गया था तो फिर गुजराद पुलिस ने
07:26एंटी स्मगलिंग एक्ट के तहट दाओद को ग्रफ़तार कर लिया
07:30कोर्ट में पेश किया कोर्ट में उसे जुडिशल कस्रडी में बेजने का हुक में दिया
07:36और तब 1983 में जून के महीने में दाओद इबराहिम साबरमती जेल पहुंचा
07:43उसी साबरमती जेल में जहां आज लॉरेंस बिष्ण होई है
07:47अब वो जेल में था कई दिन तक जेल में रहा फिर उसने इस ग्रफ़तारी को चैलेंज किया
07:53चैलेंज किया फिर सबसे बड़े उसक्त के क्रिमनल लॉयल
07:56आज की भी हमारे कहते हैं उनसे बड़ा क्रिमनल लॉयल कोई नी
08:00राम जेट मलानी उनको हैर किया
08:04राम जेख मलानी की टीम ने दाओद का केस लड़ा गुजरात में एहमदाबाद में और फिर बलके बड़ोदा में लड़ा
08:14कोट में यह हुआ कि इनकी गिरफतारी लीगल है दाओद के खलाब को केस बनता नहीं है एकसिडेंटल सूट हुआ
08:19था गोली लगी थी लेकिन कोई दुश्मन भी नहीं था
08:24तो कोट में भी यह कहा कि ऐसी कोई वज़ा समझ में नहीं आती जिससे दाओद की गिरफतारी को सही
08:29ठहरा है
08:30कोट में दाओद इवराहिम को बरी करने का हुक्म दे दिया और पुलिस ने कहा कि उसे जेल से निकालतो
08:36अब गुजरात पुलिस के लिए धक्का था कि दाओद इवराहिम गुजरात में गिरफतार हुआ
08:40इस स्मगलिंग का पूरा नेटवर्क उसके जरीए पता किया जा सकता था
08:44लेकिन कोट में रिहा कर दिया सामदे राम जेट मलानी जैसे दुरंदर वकील थे
08:49फिर भी गुजरात को इसने हार नहीं वानी वो गुजरात गौवर्मेंट के पास गई और उसने कहा कि
08:54एंटी स्मगलिंग लॉक के पहत हमें एक फ्रिश डिटेंशन ओर दे दीजे ताकि हम उसको डिटेन कर सके दाओद गुजरात
09:01से न जा पाए
09:03अभी यह सब कुछ चली रहा था अब इस चक्कर में दाओद की रहाई का ओडर आ गया लेकिन फ्रिश
09:09अप्लिकेशन डालकर कि उसे अभी डिटेंट करना है उसकी रहाई रुखवा दी दाओद अभी सावर्माती जेल में है दाओद ने
09:18दुबारा चैलेंज किया अपने ग
09:31हुई था गुजरात पुलिस के लिए और वो था सावर्माती जेल में बंद तो फिर यह तैह हुआ कि दाओद
09:37को सावर्माती जेल से ब्रौदा ले जाए जाए जाए और सुरक्षा के बीच क्योंकि दाओद के दुश्मनों की तुलम बिलिस
09:43थी और अगर पुलिस कस्टेड
10:01तो सुरक्षित जेल से ले जाना और लाने की जिम्मेदारी एक सब इंस्पेक्टर को दी गए और उस सब इंस्पेक्टर
10:09का नाम था भिष्णोई एसाई भिष्णोई
10:11सब इस्पेक्टर बिश्णोई की जिम्मेदारी थी दाओद को भाहिफाजत कोड तक लाना और बें जाना
10:17लेकिन ठ्रेट था तो हुआ ये कि चकमा देने के लिए हमलावर को
10:22दाओद इबरहिम को पुलिस की गारी में नहीं बिठाए गया बलकि उसे एक प्राइविट फ्येट कार में बिठाए गया
10:28अच्छा उस वक्त भी दाओद के जल्वे पुलिस वालों से सारा तमाम बिली भकत तो रास्ते में कहीं अच्छा होटेल
10:34हो वहाँ गारी रुपती वह अपना हाता पी था सब चलता था
10:40तो फेट गारी में दाओद का काफला चला जेल से साबर मती बड़ोदा जाने के लिए
10:46जब ये लोग वहाँ पहुँचे जेल से बाहर तो एक जगा है जो एहम्दाबाद के करीब है
10:55ये जगा है जमालपुर पगाटिया जमालपुर पगाटिया के पास काफी ट्रैफिक रहती है
11:00लोग भी पैदल चलते हैं मतलब भीरभाड काफी है वहाँ गारी या रेंगते वे चलती है
11:05जब वहाँ ये गाड़ियों का काफला पहुँचा दाओद का तभी अचानक कुछ लोगों ने दाओद की गाड़ी पर फियर्ट पर
11:14गोलिया चलानी शुरू करती है
11:16और जो रोग थे असल में उनमें से एक था लतीफ गैंग के शूटर और दूसरे आलमजेब गैंग के
11:23लतीफ उस वक्त गुजरात का सबसे बड़ा डॉन था और लतीफ की दाओद से भी दुश्मनी थी
11:29क्योंकि लतीफ दाओद से कभी हाथ मिला है नहीं
11:33और पठान गैंग की वज़ा से पठान गैंग लतीफ के तरफ थे वही लतीफ जिसके ओपर फिल्म शारू खान की
11:39वनी थी रईस अब्दुल लतीफ की कहानी में आपको क्राइम तक में सुना चुका हूँ पहले
11:44तो इन लोगों ने घेर लिया और फियेट पर गोडियां चलानी शुरू कर दी दाओद को लगिया कि यहां पर
11:48यह गारी भाग नहीं सकती वो किसी तरह से गारी से निकला और पैदल भागा लेकिन इस शूट आउट में
11:55फियेट में बैठे दो लोगों को गोली लगी वो इ
12:11उतमा चली रहता फिर गुझरात को फिर विस ने या और दलिल दी दाओद को जेल में रखने है भुझरात
12:17में लुझरात ही
12:26भाए हम कोर खत्रा नहीं है कोट में आुडर दे दिया दाओद बरी हो गया तो قरीब महीने से कम
12:38दाओद साबरमती जेग
12:41उसके बाद वो जेल से निकलता है 2023 में ही मुंबई जाता है.
12:45और फिर कुछ महीने बाद 2024 में वो दुबई चला जाता है.
12:50हमशा हमशा के लिए.
12:53हिंदुस्तान में ये उसके आखरी गिरफतारी थी जूल जो 1983.
12:571983 और फिर साबरमती जेल उसकी आखरी जेल थी देश में फिर इसके बाद वो दुबई चला गया और आज
13:04तक वो पकड़ा नहीं गया उधर दुबई पहुंचता है वो और धीरे धीरे अब अपने दुश्मनों से बदला लेना शूर
13:11करता है उसके जितने भी हिट मैन शूटर
13:13यहां मुंबई से लेके गुजरात तक सब पुनिशाना बना रहे हैं उसमें से कुछ को तो कोट के अंदर गोली
13:18मारी जाती है जिन्होंने इसके उपर हमला किया था पोर बंदर से आते हुए या फिर बड़ोदा कोट जाते हुए
13:27उधर गुजरात के अंदर जो दाउद के �
13:31लोग थे उनको लतीफ चुन-चुन कर बदला ले रहा था तो दोनों तरफ से शूट आउट में दरजनों लोग
13:36मारे गए अब दाउद पहुझ किया दुबई
13:401989 में अब तक तमाम लोग जिन लोगों ने दाउद पर हमला किया तो लगबख सम्मारी जा चुके थे अब
13:47इकलाओ था अभी तक लतीफ बहुत बड़ा उसका कद्ध हो चुका था शराब, स्मगिलिंग, किड्नैपिंग, रैंसम, सुपारी किलिंग गुजरात के
13:56लावा अस
13:56पास केते ही राज्यों में उसका दबदबा था, तो वो एक बड़ा नाम था, 1989 में दाउद इबरहिन को लगा
14:04कि इससे लड़ाई की बजाए, क्यों ना हाथ मिला लिया जाए, तब उसने 1989 में अब्दुल लतीफ को एक मैसेज
14:11बिजवाया, दुबई से, कि एक दुश्मनी �
14:15दोस्ती करते हैं, और उसके लिए तुम दुबई आओ, चाहो तो अपने आदमी को लेकर आओ, भरोसी के, दोनों गैंग
14:22में बात हुई, लतीफ दुबई गया, दुबई में कहते हैं, लतीफ के साथ जो लोग थे, और डाउद के साथ
14:29जो लोग थे, ये दोनों एक ही जगा
14:30पर थे, एक मौलाना को बुलाया गया, महा कुरान रखा गया, दोनों गैंग से उस पर हाथ रखकर कस्म खिलाई
14:36गई, कि अब दोनों एक दूसरे से हमेशा दोस्ती निभाएंगे, दुश्मनी नहीं करेंगे, दोनों ग्रुप ने कस्म कर, दाउद में
14:46तब लतीफ से सिर्�
14:57होने के समगने में शुरूर की, बाद में लतीफ एक इनकांटर में माला गया, और दुबई से फिर दाउद कराथी
15:04पहुंद गया, तो 43 साल पहले दाउद इबराहीम इसी सावरमती जेल में था, अलाकि सावरमती जेल का इतिहास इतना पुराना
15:15है, करीवर 1495 में शायद बन
15:26उस वक्त अंग्रेज जो भी आंदोलन कारी थे, उन्हें इस जेल में रखा करते थे, दाउद इबराहीम इस जेल में
15:33रहा, 2010 में करीब तीन मेहने के लिए हम इसी जेल में रहते हैं, सावरमती जेल में, जो भी हमारे
15:40इंग्रहमंटरी हैं, तब उनके उपर इलजाम था एक �
15:45जो क्रिमिनल, सोहरा बुद्दीन एक शूटर और उसकी वाइफ कॉसर भी, इन दोनों का फेक इंकॉंटर कराने का, किड्नैपिंग का,
15:53बहुत सारे चार्जेज लगे थे, तो 25 जुलाई 2010 से 29 अक्तूबर 2010 तक, यानि लग भक तीन महीने, हम
16:03इस शावरमती जेल में रहें, �
16:08केस खत्म हुआ, इसके राबा इस वकट सावरमती जेल, जो शुर्खियों में है, वो इसी लौरेंस विश्णोई की वज़ा से
16:16है।
16:16लॉरेंस विश्णोई अप्रेल 2023 से अभी तक इस जेल में है इस जेल में लॉरेंस विश्णोई को जब लाया गया
16:27था तो यही कहकर लाया गया था कि इसका गैंग से कनेक्शन तोड़ना है और उसकी वज़ा थी उसक्षिद्धू मुशेवाला
16:33का जो शूट आउट हुआ उस
16:46उसको रखा गया था वो दस खोली ब्लॉक थी इस जेल में जो खोली है बैरक सेल जो होता जिसमें
16:53एक को रुकते हैं कहदी को बड़ा भी कुछ सेल होता है उसको खोली बोलते हैं तो शुरवात में इसको
17:00दस खोली जो नाम की हाई सेक्रेटी ब्लॉक उसमें रखी गया थी �
17:04इसमें यह था है कि सिर्फ दस कैदियों के रहने की जगाती और हर खोली में एक कैदियों से लॉरेंस
17:10विश्णोई को दूर रखा जा सके और उस पर नज़र भी रखी जा सके लेकिन फिर देरे देरे यह हुआ
17:15कि लॉरेंस अंदर है फिर भी बाहर सारे काम तो हो रहे हैं अभ
17:34और यहां पर चार अलग-अलग ऐसे बैरक हैं पचास-पचास करके यानि एक-एक में पचास-पचास करे दी
17:41तो अब दो सो खोली में लॉरेंस विश्णोई को शिफ्ट कर दिया गया और उन्हीं से एक खोली में वो
17:48रह रहा है और उसके उपर तमाम नज़रे रखने का दा
18:02हो गी हैं तो उस पर जो एजनसिया हैं हमारे उनका यह कहना है कि असल में लॉरेंस अंदर है
18:06सिर्फ और सिर्फ बाहरी दुनिया से उसका कनेक्शन तब होता है जब वीडियो कॉन्फरेंसिंग के जरी वो अपने मुकदमे की
18:12पैरवी के लिए वकीनों से जोड़ता है या को
18:28करना है तो एजनसियों और कुछ पुलिस वालों से मेरी बात हुई उनका जवाब यह था कि असल में जो
18:38बाहर की दुनिया में खास्तोर पर देश के बाहर हैं जो कैनेडा और अमेरिका में इन लोगों ने एक ऐसी
18:45टीम ना रखी है जिनको शायद किसी और रूट से एक मेसि
18:58या गया है कहां पर किसको टार्गेट करना किस जगह पर किसे करना है कैसे रमकी देनी है क्या कुछ
19:03करना है और ये काम अपने आप हो रहा है लेकिन कि क्या ये बात हजम करने रायक है क्योंकि
19:09टार्गेट चुनना और अगर टार्गेट को छोटे मोटा मामूली नहीं बड़
19:25उसका छोटा भाई अन्मोल विश्णो ही, वो भी तिहार जेल में है, तो जब दोनों भाई जेल में हैं, तो
19:31फिर तीसरा बाहर कैसे फैस्टे ले सकता है, तो इसका मतलब है कि यह जो सारी बाते हैं, कि बाहर
19:38की दुनिया से connection कट चुका है, यह सिर्ब बाते ही हैं, बनासल में
19:43तो यह है, कि मेसेज आद भी देल से ही जा रहा है, तो खेर, यह थी आद की कहानी,