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  • 16 minutes ago
Ambala Martyrs Memorial : हरियाणा के अंबाला में शहीद स्मारक बनाया गया है जिसका केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 5 नवंबर को उद्घाटन करेंगे .

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00:00भारत का सबसे बड़ा शहीदी स्मारक एवं संग्रहाल है
00:05अमबाला मिस्थित आजादी की पहली लड़ाई के शहीद स्मारक में आपका स्वागत है
00:12ये स्मारक 1857 की उस क्रांती को समर्पित है
00:16जिसने देश के अलग-अलग हिस्सों को एक साजह संग्राम में जोड़ा
00:3022 एकर में पहले इस परिसर के भीतर करीब 10 लाक वर्ग फुट का संग्रहाले है
00:35जहां फिल्मों, होलोग्राम्स, आउग्मेंटिज रियालिटी, वर्चुल रियालिटी और सेंसर आधारित इंटराक्शन के माध्यम से इतिहास को अनुभव किया जा सकता
00:47है
00:48कहानी की शुरुवात अंबाला से होती है
00:5110 मई 1857 की सुबह ठीक 9 बजे, 60 वी और 5 वी नेटिव इंफेंट्री के भारतिय सिपाहियों ने संग्राम
01:01छेर दिया था
01:02ये मेरट की घटनाओं से लगभग 9 घंटे पहले हुआ और एक एतिहासिक टेलिग्राम इसकी गवाही देता है
01:11आईए, अंबाला के समारत में उस क्रांती की पूरी यात्रा का नभव करें
01:16जिसने संगर्ष की अनेक आवाजों को एक साथ जोड़कर भारत की आजादी का मार्ग प्रशस्त किया
01:24हर्याना की प्रसिद्ध शिल्पकला जैसे फुलकारी, धातुशिल्प, सरकंडा, जूट, तेराकोटा और पंजादरी संगरहाले की द्रिश्य भाषा का हिस्सा है
01:48संगरहाले की यात्रा कमल के आकार की कैनोपी, रिसेप्शन और ओरियन्टेशन क्षेत्र से शुरू होती है
01:56जहां मशूर हस्तियां डिजिटल गाइड बनकर दर्शकों को आगे के अनुभव से परिचित कराती है
02:06इसके बाद 50 दर्शकों की क्षमता वाला 270 डिग्री प्रजेक्शन एलिवेटर हर्याना के इतिहास से परिचित कराते हुए दिखाता है
02:16कि अंबाला से उठी क्रान्ती की चिंगारी किस तरह पूरे भारत में फैल गई
02:20और इस अनुभव के अंत में दर्शक पहली मंजिल से दूसरी मंजिल पर पहुँचते हैं
02:27दूसरी मंजिल पर पहुँचकर अंग्रेजों के आगमन, क्रान्ती के कारणों, चर्बी लगे कार्तूसों, सू नियोजित तयारी, अंबाला की रणनीतिक स्थिती
02:37और 10 मई से पहले हुई घटनाओं की कहानी सामने आती है
02:41इसके बाद दर्शक पहली मंजिल पर लौटते हैं, जहां वो एतिहासिक टेलिग्राम, अंबाला की निरनायक घूमिका की गवाही देता है
02:50और मौर्स कोड के माध्यम से उस दौर की संचार परनाली को समझने का अवसर मिलता है
02:57आगे दस मई की घटनाओं और उनके पीछे की पूरी कहानी को एक इमर्सिव प्रजेक्शन के माध्यम से जीवन्त किया
03:05गया है
03:06इसके बाद एनिमेट्रॉनिक से सजी हर्याना की प्रसिद्ध कटपुतली प्रस्तुती प्रदेश में फैली क्रान्ती की गाथा सुनाती है
03:31इसके बाद संगीत, साहित्य, कविता, प्रतीकों और जन संचार को क्रान्ती के ओजारों के रूप में प्रस्तुत किया गया है
03:40360 degree immersive projection दर्शकों को 1857 की रणभूमी में ले जाता है
03:48इसके बाद मेरट, दिल्ली, लखनउ, बरेली, जासी, कानपुर, सतारा, हैद्राबाद, नौशेरा, अजनाला और गुजरात के आदिवासी समुदायों के साहस, संगठित
04:03प्रतिरोध और देश के विभिन हिस्सों में हुए संगर्ष सामने आते हैं
04:07आगे अंग्रेजों की बरबरता, जेलों की भयावहता और क्रांती के परणामों को समझते हुए यात्रा शद्धांजली क्षेत्र तक पहुशती है
04:19अंत में, ओपन एर थेटर में वाटर स्क्रीन, संगरहाले की दिवारों और 63 मीटर ऊचे मेमोरियल टावर पर प्रोजेक्शन मैपिंग
04:29शो इस एतिहासिक यात्रा को पूल करते हैं
04:32इस मारक से लौटते हुए इतिहास केवल एक स्मृती बन कर साथ नहीं जाता
04:37बलकि ये विश्वास भी जगाता है कि साहस, एकता और संकल्प से उठी हर आवाज आने वाले भारत की दिशा
04:47बदल सकती है
04:48आईए, इस मारक में 1857 की उस यात्रा का अनुभव करें
04:54जहां आजादी की पहली लडाई की कहानी आज भी आपका इंतजार कर रही है

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