00:03बाढ़ का नाम आते ही हमारे दिमाग में सबसे पहले भारी बारिश, उफंती नदियां और बादलो का फटना आता है।
00:3129 अक्टूबर 2026 को भूटान के गासा में शिन्टाफू ग्लेशियर जील के फटने से गासा तसाचू इलाके में सडक और
00:40पुलो को नुकसान पहुचा।
01:0029 अक्टूबर 2026 को भूटे कोशी और त्रिशूली नदियों में अचानक भयंकर बाढ़ाई।
01:04आकडों के मुताबिक इस विनाशकारी बाढ़ में 1200 से अधिक लोगों ने जान गवाई जबकी 5000 लोग लापता हुए।
01:12लेकिन सवाल है कि पहाडों में मौजूद एक जील के फटने से सैक्डों किलोमीटर दूर बाढ़ का खत्रा कैसे पैदा
01:19हो सकता है।
01:20आखिर ग्लेशियर जीले बनती कैसे हैं और इसके फटने की वज़ा क्या होती है।
01:25इन सवालों के जवाब जानेंगे आज के एस एक्स्प्लेनर में।
01:55हिमन दिये जील कहते हैं।
01:57इन में से कई जीलों के सामने पत्थर, मिट्टी और पर्फ से बनी प्राकर्तिक दिवार होती है।
02:02जिसे मोरेन कहा जाता है।
02:03यही दिवार पानी को रोक कर रखती है लेकिन ये दिवार हमेशा मस्बूत नहीं होती।
02:08पानी का दबाव पढ़ने या भूस्खलन जैसी घटनाओं से इसके तूटने का खत्रा रहता है।
02:13अब समझ ये गोल्फ क्या होता है।
02:15और ग्लेशियर जील फट्टी कैसे है।
02:17गोल्फ यानि ग्लेशियर लेक आउटबस्ट फलर्ट।
02:21आसान भाशा में समझें तो पहाडों पर ग्लेशियर के पिघलने से बनी जील का पानी जब अचानक बाहर निकल कर
02:28नीचे की ओर तेज रफतार से बहने लगता है तो उसे गोल्फ कहते हैं।
02:32अब सवाल ये है कि आखिर जील का पानी अचानक बाहर कैसे निकलता है।
02:36दरेसल ग्लेशियर जील के सामने अक्सर मिट्टी, पत्थर और बर्फ से बनी एक फ्राकरतिक दीवार होती है।
02:42यही दीवार जील के पानी को रोक कर रखती है। लेकिन ये दीवार किसी मजबूत कॉंक्रीट के बांध जैसी नहीं
02:48होती।
02:49मान लीजे जील के आसपास के पाहर से अचानक बर्फ या चटान का एक बड़ा हिस्सा तूट कर सीधे पानी
02:55में गिर जाए।
02:56इससे जील में बहुत तेज लहरे उट सकती हैं, पानी दीवार के ऊपर से बहने लगता है और उसे काट
03:03कर तोड सकता है।
03:04कई बार भुकंप, हिम्सखलन या दीवार के अंदर से लगतार पानी रिसने के कारण भी ये प्राकरतिक बांध कमजोर होकर
03:13तूट सकता है।
03:14और जैसे ही ये दिवार तूटती है, जील में जमाल लाखो करोडो घन मीटर पानी एक साथ तेजी से नीचे
03:21की ओर बहने लगता है।
03:22ये पानी अपने साथ सिर्फ पानी ही नहीं, बलकि बड़े-बड़े पत्थर, मिट्टी, पेड़ और चट्टानों का मलबा भी बहा
03:29कर ले जाता है।
03:30इसकी रफ्तार और ताकत इतनी जादा होती है कि रास्तों में आने वाले पुल, सड़के, गाउं तक बहा कर ले
03:38जाए।
03:38हिमालिये राजियों और नदियों के किनारे बसे इलाकों को कितना खत्रा है।
03:44भारत के लिए ये खत्रा इसलिए भी गंभीर है क्योंकि हिमाले से निकलने वाली कई बड़ी नदियां करोडों लोगों की
03:51जिन्दगी से जुड़ी है।
03:52सिक्किम में तिस्ता नदी घाटी, उत्रखण में भागी रथी और अलकनन्दा, हिमाचल प्रदेश में सतलुज और चिनाप, अरोणाचल प्रदेश में
04:01सियांग और सुबन सीरी जैसी नदी घाटियां सम्वेदन शील मानी जाती है।
04:07इसकी आलावा लद्दाक में सिंधु नदी के आसपास के शेत्रों पर भी नजर रखना जरूरी है।
04:37इसकी ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं और पीछे खिसक रहे हैं। जब ग्लेशियर पीछे हटते हैं तो उनके सामने
04:43और आसपास खाली जगह बनती है।
04:45इन जगहों पर पिघली हुई बर्फ का पानी जमा होने लगता है और धीरे-धीरे नई जीले बन जाती है।
05:07इसरो ने 1984 से 2023 से तकी सेटलाइट तस्वीरों का विशलेशन किया। इसमें 2016 से 2017 के दोरान पहचानी गई
05:1610 हेक्टेर से बड़ी 2431 ग्लेशियर जीलों का अध्यान किया गया।
05:23इस अध्यान में पाया गया कि इनमें से 676 जीलों का आकार बढ़ चुका था। जिनमें से 601 का आकार
05:31दो गुने से भी जादा हो गया।
05:33इन 676 जीलों में 130 जीले भारत के भीतर मौजूद है। इनमें 65 सिंधु नदी बेसिन, साथ गंगा बेसिन और
05:4258 भ्रमपुत्र नदी बेसिन में है।
05:45यानि ये खत्रा सिर्फ हिमाले के किसी एक हिस्से तक सीमित नहीं है, बलकि भारत की प्रमुख नदी घाटियों से
05:52भी जुड़ा हुआ है। अब यहां एक और बात समझना जरूरी है। जील का आकार बढ़ने का मतलब ये नहीं
05:59है कि वो निशित रूप से फट जाएगी।
06:01लेकिन उसमें जमा पानी की मातरा बढ़ने से संभावित बाढ़ का पैमाना बढ़ा हो सकता है। जील के सामने बनी
06:08प्राकरतिक दीवार कितनी मजबूत है, उसमें कितना पानी जमा है, आसपास की पहाडियों पर भूस्खलन या हिम्श्खलन का खत्रा कितना
06:16है और बांध
06:17तूटने पर पानी किस दिशा में बहेगा, ये सभी बाते उसके वास्तविक खत्रे को तै करती हैं।
06:47इसके साथ पहाडों के बीच पानी के नए और बड़े जलाशे भी बन रहे हैं, जिनकी लगतार निगरानी करना बेहत
06:55जरूरी है।
06:55वहीं केंद्रिय जल आयोग यानी CWC भी ग्लेशेर जीलो और उनसे जुड़ी नदी घाटियों की निगरानी करता है।
07:03सेटलाइट डेटा के जरिये जीलो के जल शेतर में होने वाले बदलावों का आंकलन करता है।
07:09इसके अलावा नदियों के जलस्तर की निगरानी और बाढ़ संबंधी चेतावनी जारी करने में भी इसकी एहम भूमी का है।
07:17सरकार के मताबिक हिमालिय नदी बेसिन में 10 हेक्टिर से बड़ी 902 ग्लेशियर जीलो और जल निकाईयों की निगरानी करता
07:26है।
07:26इसके लिए हर साल जून से अक्टूबर के बीच रिमोट सेंसिंग तकनीक का इस्तमाल किया जाता है।
07:32अब बात NDMA की।
07:34इसकी जिम्मदारी सिर्फ खतरे की पहचान करना नहीं बलकि ऐसी आपदा से निपटने की तयारी करना भी है।
07:41जिसके तहट संबेदंशील जीलो की पहचान जोखिम का आंकलन संबंधित एजेंसियों के बीच तालमेल और जरूरत पढ़ने पर लोगों को
07:49सुरक्षित स्थानों तक पहुचाने की रणनीती तयार की जाती है।
07:53लेकिन इस पूरी विवस्था में एक और तकनीक बेहद एहम है। वो है सेंसर आधारित Early Warning System. CDAC यानि
08:02Sensor for Development of Advanced Computing से सिक्किम में भारत का पहला गोल्फ Early Warning System विकसित और तैनात किया
08:11गया है।
08:11इस सिस्टम को आसान भाशा में समझें तो Glacier जील के पास खास तरह के सेंसर लगाये जाते हैं। ये
08:17सेंसर जील के पानी के स्थर में होने वाले बदलावों को लगतार रिकॉर्ड करते हैं। और सेटलाइट के जरीए इसकी
08:24जानकारी कंट्रोल सेंटर तक पहुचाते हैं�
08:26इसके बाद कंप्यूटर मॉडल की मदद से ये अनुमान लगाया जात सकता है कि अगर जील से अचानक पानी बाहर
08:33निकलता है तो बाढ़ का पानी किस रास्ते से आगे बढ़ सकता है। कौन से इलाके डूप सकते हैं और
08:41पानी को वहाँ पहुचने में कितना समय लग सकता ह
08:43यानि कोशिश ये है कि बाढ़ आने के बाद बचाओ अभियान शुरू करने के बजाए खत्रे का संकेत मिलते ही
08:50प्रशासं को कारवाई का समय मिल जाए। इतना ही नहीं मार्च दोहसर चपिस में CDAC ने NDMA और हिमाचल प्रदेश
08:59की आपदा प्रबहनन एजेंसियों के साथ म
09:12इन में पानी की निगरानी करने वाले सेंसर, आटोमेटिक विदर स्टेशन और ग्लेशियर की निगरानी करने वाली तक्नीक को जोड़ा
09:19गया है। इन तमाम तक्नीकों के बावजूद किसी ग्लेशियर जील के फटने का सटीक समय पहले से बता पाना अभी
09:26संभब नहीं है�
09:29foreign
09:59We can put a light on it today.
10:01Today we have a satellite, an adhonic sensor, and an early warning system.
10:07But the real truth is the fact that these people will be able to stay with the ground.
10:14Because the glacier, the glacier, the glacier, the glacier, the glacier, the glacier, the glacier, the glacier, the glacier, the
10:18glacier, the glacier.
10:28This is the end of the day of the day of the day of the day.