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  • 35 minutes ago
पटाखों से फाइन पार्टिकल्स उत्सर्जित होते हैं, जो हमारे फेफड़ों में जाकर कई बीमारियों से हमें परेशान करते हैं. संवाददाता आशोतोष झा की रिपोर्ट

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00:00So this is the green petakio concept. This is CSIAR NEARI, which is a society and organization.
00:08They have made this and they have made this and they have made this and they have made it.
00:18So this is the 3rd method that they have made this and they have made it.
00:25जिसे एक है Safe Water Religious, इसमें Polymer Hydrogel होता है, जिससे Particulate Matter को कम करने में मदद मिलती
00:34है, दूसरा है Safe Thermite Cracker, इसमें Iron Oxide के इस्तमाल से जो Combustion Efficiency होती है, उसको भेथर करने
00:45का प्रियास होता है, और तीसरा है Safe Minimal Aluminium, इसमें Aluminium के मातरा को कम करके Scientific Based Metal
00:54का उपयोग किया जाता है,
00:55तो CSIR के अनुसार सामान्य पठाकों की तुल्मना में जो जो ग्रीन पठाकी है, तीस से चालिस परसेंट Particulate Matter
01:05की कमी को दर्ज करते हैं, तो ग्रीन पठाकों का MLR यह नहीं, कि उनमें रासाइनिक पदा आर्थ या जहरीले
01:12तत्र नहीं होते, सिर्फ इसमें यह है, कि ओवर्यो
01:25जहरीली गैसों के उत्सरजन को कम कर सकते हैं, तो इसका आंसर है हाँ, यह कुछ जो परमानित आकड़े हैं,
01:33CSIR नीरी और कुछ अन्ने रिसर्च के, कि यह इसमें पर्टिकुलेट मैटर की मातरा कुछ कम देखी गई है, क्योंकि
01:41पठाकों जलाने से PM10, PM2.5 के सासर, अल्ट
01:55इसकुन बात को समझना बहुत जरूरी है, कि PM10, PM2.5 के लावा, फाइन पार्टिकल्स भी इससे उत्सरजित होते हैं,
02:03और जो हमारे फेबरों में जाके, बहुत ही हमें स्वासम्मंदित और अस्तमा जैसी अन्ने बीमारियों से हमें परेसान करते हैं,
02:14तो केवल यह देखना
02:15प्रियाप्त नहीं है कि 30% अगर effect कम है, तो हमें पटाकों के जो 70% उससर जने, उसका
02:25स्वास्त कोई असर नहीं पड़ेगा, इसी संदर में आपका जिसे तीसर सवाल है, कि क्या green पटाके पूरी तरह सुरक्षित
02:33और पर्याण के अनुकूल है, भुजुर्गों, बच्चों
02:35और सांस मरीजों में इसका क्या असर पड़ता है, तो इसका अंसर नहीं, ये पूरी तरीके से सुरक्षित इन्हें नहीं
02:43कहा जा सकता, हमें समझना होगा कि पठाखा जलाने के बाद हवा में धुआ नहीं, बलकि पर्टिकुलेट मैटल, टॉक्सिक मैटल,
02:52बहुत सारे जिस
03:05बच्चों के फेपडों में अगर इस तरीके के पर्दूसक जाते हैं तो उन्हें सांस लेने में और खांसी, जुखाम, नजला
03:14और बहुत सारी समस्य हो सकती है, बुजुर्गों की रेस्परेट्री और कार्डियोवस्कुलर डिजीज में इसका दबाव पड़ सकता है, और
03:22अस्तमा और सीलोपीडी के मरीजों को अटेक आ सकता है, और उन्हें उनकी जो बिमारी है, वो दुबारा से ट्रिगर
03:28हो सकती है, और हिर्दे रोग्यों के लिए भी समपर्क में आने से कार्डियोवस्कुलर डिजीज और स्वास संबंदित बिमारीों का
03:35जोकिम बढ़ जात
03:36और खिरी है कि मुझे जन्हें खुबारा से कार्डियों के लिए और डिला के का रिली जाते हैं, प्रवू पूर्णेन
03:37दिमारी के लिए भी सोड़ूभी जाते हैं, और है, और जा Bemारा, dif आ अ सकता है, ता कम आगी
03:37मुझेज प्लीमारीक के दोड़ टाजीं के अ

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