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  • 12 minutes ago
शिमला के न्यू शिमला स्थित उड़ान पेरेंट्स एंड गार्जियंस सोसाइटी के विशेष बच्चे इस दिवाली अपने हुनर से लोगों का दिल जीत रहे हैं. यहां बच्चे हाथों से रंग-बिरंगी मोमबत्तियां, राखियां और सजावटी सामान तैयार करते हैं. वर्ष 2003 में शुरू हुई यह संस्था फिलहाल 42 विशेष बच्चों को शिक्षा, थेरेपी और कौशल विकास का प्रशिक्षण दे रही है. कभी इस केंद्र का विरोध होता था, लेकिन आज स्थानीय लोग और सेवानिवृत्त महिलाएं बच्चों की मदद के लिए आगे आ रही हैं. संस्था का मकसद कमाई करना नहीं, बल्कि बच्चों को आत्मनिर्भर बनाना, उनका आत्मविश्वास बढ़ाना और समाज में सम्मानजनक पहचान दिलाना है.

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00:10दिवाली पर हर कोई अपने घर को रोशन करने की तैयारी में है।
00:30इसा मंच दिया है जहां वे अपनी प्रतिभा दिखाने के साथ आत्मिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
01:00संस्थान में उन्हें मुम्बतियां बनाने के साथ साथ राखियां सजावटी सामान तयार करने और बुनाई जैसे काम भी सिखाए जाते
01:06हैं।
01:07छे अध्यापिकाएं बच्चों को उनकी शमता के अनुसार प्रशिक्षड देती हैं।
01:11देखे जब स्पेशल बच्चा है तो नॉमल स्कूल में उसकी बुलिंग तो होगी।
01:17जो मर्जी कहें क्योंकि वह उन बच्चों का भी ग्सूर ही,
01:20जो नॉमल है उनको दिखता है कि यह क्या है तो वह एक मज़ाग का पात्र बन जाता है।
01:25जब यहां आता है तो हमारा यह रहता है कि
01:30independent living is our independent living
01:33prepare for parents for relief
01:37for mother and father for 5-6 hours
01:39after that they learn something here
01:43so that they learn to implement it in their home
01:48so that their parents don't have a responsibility
01:52tomorrow they have siblings or anything
01:56parents don't live, generally parents say
01:59when we don't live, then what will happen
02:00I say to myself, what do we do for our children
02:05our parents need to do our efforts
02:06our parents need to do our efforts
02:10tomorrow we don't have to do our siblings
02:13or any other family
02:16at least self-help
02:18daily living
02:21ुڑान संस्थान की शुरुवात साल 2003
02:23में करीब 10 विशेश बच्चों के अभिबावकों के प्रयासों से हुई थी
02:28शुरुवात में केंद्र को विरोध का सामना करना पड़ा
02:31लेकिन अभिबावकों ने हार नहीं माली
02:33आज आस पास के लोग भी संस्थान से जुड कर बच्चों की मदद कर रहे हैं
02:382004 से मैं जुड़ी हुई हूँ
02:412002 में रिटायर हुई थी उसके बाद से
02:44मैंने यही सोचा कि मंदिर मस्चिद यही है मेरे लिए
02:47तो मैंने यही आना शुरू किया
02:49और बहुत लोगों को मतलब की कंपैल किया कि आओ देखो भुवान ने हमें क्या कुछ दिया
02:55पर बहुत असर पड़ा बहुत कम्यूनिटी हमारी समाज इसमें जोड़ा है हमारे साथ ना
03:01तो तब से लेकर आज तक परिवर्तन तो बड़ा हुआ है
03:04बच्चे कुछ खाना सिखते हैं, खेल भी करते हैं, क्एल भी करते हैं, तो इनको थोड़ा पे प्रोचसान चाहिए होता
03:11तो वह हमें देए ने होता है
03:13इनको प्रोचसान की जरूरत और कुछ मिह हैं
03:19and the other people who are retired, who are also here to come to see them and give them their
03:32time.
03:33They help them to eat their food and also help them.
03:40and there are many people who have been looking for their help.
03:44And in the same way, there are many children who are very hard to do this.
03:49I want to appreciate them all the time,
03:53who are watching and watching.
03:55And teachers, who are such a good time,
04:01they have to give them time to give them.
04:04So I want to give them a lot of time.
04:09Sanstha میں فلحال 42 विशेस बच्चों को सिक्षा, ठेरपी और कौशल विकास की सुविदाएं दी जा रही है
04:15यहाँ 36-38 वर्ष तक के लोगों को उनकी जरूरत की शमता की अनुसार प्रशिक्षन दिया जाता है
04:22बच्चों को इस काबिल बनाने की कोशिश की जाती है कि वे अपने रोजमर्रा के काम खुद कर सकें
04:28जब ETV भारत की टीम उडान संस्था की केंदर पर पहुंची तो हमें देकर बच्चे खासे उत्साहित नजर आए
04:34कभी घरों तक सीमित रहने वाले और छोटी-छोटी जरूरतों के लिए परिजनों पर निर्भर रहने वाले इन बच्चों ने
04:40खुलकर अपनी बात रखने का प्रयास किया कैमरे के सामने आने में भी उन्हें कोई जिजक नहीं थी
04:46चाजिमा, चन्ने, चाजिमा जावर, आवे मताल, तोपली, प्राव, सब ये गाम कते ही है
04:57आज कलर पन गिया है आज में साथ लाने में जित्ते रोड सब पैस हुटा है
05:04नहीं प्याँ से अच्छे का शाथ लाने में जिम्रा जाए हूँ
05:09दावल क्या सिख्चो उप्षू
05:13नहीं स्कूल ने पर ताओं
05:16नहीं में
05:18कोया में साथ
05:21आज कर दू कांगे के
05:24मैंने कित्तो की शो रेके
05:27मैंने कित्तो की विश्टावाज बावाज पांदो अनी
05:32लो रेके
05:34धांक्यू
05:35स्कूल में आना अच्छा लगता है
05:36What conference is it?
05:38Adik, Sanwaya, Aaruz, Bona
05:44Who is your favorite teacher?
05:46Yes
05:47Your name is Leda
05:49My name is Leda
05:50What is your name?
05:52My name Arshita Thakur
05:53What do you teach?
05:55I make candles that you can see
05:58I make a banana, crochet, fly
06:03How do you feel at school?
06:06It feels good
06:07Who are your friends?
06:10My friends
06:15I have to put on the clothes and put them in the bag
06:19Then I put them in the bag
06:21Then I open them in the bag
06:24Then I make candles
06:26ुरान संस्थान को दिव्यांगता की शेत्र में बहतर काम करने के लिए हिमाचल प्रदेश की स्टेट नोडल एजनसी भी बनाया
06:38गया है।

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