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  • 6 years ago
गैंगस्टर विकास दूबे के आंतक की कहानी खत्म हो गयी। अब उसकी काली कमाई के चर्चे हैं। विकास ने उज्जैन से लेकर कानपुर के सफर में एसटीएफ से कई राज उगले थे। पुलिस ने उसके लखनऊ आवास से एक लाल डायरी भी बरामद की थी। जिसमें उसके आर्थिक लेनदेन और कारोबार का जिक्र है। प्रवर्तन निदेशालय और पुलिस इसी आधार पर अब विकास की काली को उजागर करने में जुट गयी है। पता चला कि विकास ने लखनऊ, कानपुर, देहरादून, मुंबई और दिल्ली के अलावा दुबई व बैंकॉक तक में प्रापर्टी में लंबी राशि निवेश की थी। जुआ, सट्टेबाजी और मनी लॉड्रिंग से वह अवैध कमाई कर रहा था। प्रापर्टी डीलिंग के कारोबार में वह कानपुर के 4 बड़े घरानों से जुड़ा था। वह उनकी आवासीय योजनाओं के लिए जमीन मुहैया करवाता था।

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प्रवर्तन निदेशालय की टीम रविवार को विकास के गांव बिकरू पहुंची। यहां ब्यौरा जुटाया जा रहा है, डायरियां कागजात खंगाले जा रहे हैं। पता चला है 35 साल के आपराधिक इतिहास में विकास ने दोस्त—यारों और रिश्तेदारों के नाम अकूत सम्पति खरीदी। उसके इस बिजनेस में जय वाजपेयी ने सहयोग किया। ईडी ने एसटीएफ और यूपी पुलिस से पूरी डिटेल मांगी है। कानपुर रेंज के आईजी मोहित अग्रवाल को 6 जुलाई को इस संबंध में एक पत्र भी लिखा गया था।
प्रारंभिक जांच में पता चला है कि विकास दूबे के उत्तराखंड, मुंबई, नोएडा में करीब 21 फ्लैट और 11 से ज्यादा मकान हैं। इसके अलावा 20 से अधिक ऐसी प्रापर्टी के कागजातों का पता चला है जो बेनामी हैं। दुबई और बैंकॉक में करीब 25 करोड़ रुपए के उसने दो आशियाने खरीदे थे। वह कानपुर के बड़े उद्योगपतियों के लिए प्रॉपर्टी डीलिंग और मनी लॉन्ड्रिंग का भी काम करता था।
एक साल के भीतर दर्जनभर से ज्यादा विदेश यात्राएं
ईडी की जांच से पता चला है कि विकास दुबे ने पिछले एक साल में दर्जनभर से ज्यादा विदेश यात्राएं कीं। इनमें थाईलैंड, दुबई और अमरीका की यात्रा प्रमुख है।

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एमएलए करते थे मदद
एसटीएफ से पूछताछ में विकास ने बताया था कि वह प्रदेश के कम से 3 आईपीएस और 6 विधायकों के सीधे संपर्क में है। ये लोग इसके मददगार थे। कानपुर के दो पूर्व विधायक जिसमें एक अब भाजपा और एक कांग्रेस में हैं विकास के लिए धरना-प्रदर्शन तक किया करते थे।
15 साल तक ग्राम प्रधानी
विकास अपराध के साथ राजनीति में भी सक्रिय था। बसपा से वह 15 साल तक जुड़ा रहा। इस दौरान जिला पंचायत सदस्य भी था। 2012 में सपा में आ गया। 1990 में अपराधिक गतिविधियों में शामिल होने के बाद उसे सियासी समर्थन मिलता रहा। इसीलिए उसके घर ही 15 साल तक ग्राम प्रधानी रही। उसकी बहू, पत्नी वह खुद राजनीति में सक्रिय था।

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