जिसे अल्लाह रखे, भला उसे कौन चक्खे! क्या गुनाह मासूम का जो बिन व्हाई माँ ने उसे पैदा होते ही फेक दिया! नावालिग उम्र में बिन व्हाई माँ बन कर मासूम जीवन को तालाब किनारे छाड़ियों में फेकने बालियों, तुम बदकिस्मत हो! किस्मत है उस मासूम की जिसे झाड़ियों में फिकने के बाद भी संकुशल अस्पताल पहुंच गई! भला हो उस पुलिस दरोगा और ग्राम प्रधान पति का जो बक्त रहते मौके पर पहुंच गये और बचा लिया! मामला तिलहर तहसील क्षेत्र के गांव का है! जहाँ की लगभग १६ वर्षीय लड़की बिना शादी किये माँ बन गई और समाज़ से छिपाने के लिए अपने ही कलेजे के टुकड़े को तालाब किनारे झाड़ियों में फेक अपनी ब्लीडिंग बन्द कराने सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पहुंच गई परन्तु उसे क्या पता कि उसका गुनाह आसमान ने देख लिया और उसके द्वारा जान से मारने की नियत से फेकी गई बच्ची को फरिश्तो के रूप में पुलिस दरोगा और प्रधान पति मिल गये और बच्ची को बचा लिया!