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फ्रांस में शिक्षा व्यवस्था को लेकर छात्रों का विरोध अब बड़े राष्ट्रव्यापी आंदोलन का रूप लेता दिखाई दे रहा है। पेरिस से शुरू हुआ यह आंदोलन शिक्षकों की कमी, बढ़ती छात्र संख्या, ओवरक्रोडेड क्लासरूम, जर्जर स्कूल इमारतों और बुनियादी सुविधाओं की कमी जैसे मुद्दों से जुड़ा है। 6 अक्टूबर को फ्रांस के कई शहरों में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए, जहां पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें भी हुईं। कुछ घटनाओं में छात्रों के घायल होने और संपत्ति को नुकसान पहुंचने की खबरें सामने आईं। सरकार पर शिक्षा बजट और संसाधनों को लेकर दबाव बढ़ रहा है, जबकि देश पहले से आर्थिक चुनौतियों, बढ़ती ऊर्जा कीमतों और सामाजिक असंतोष का सामना कर रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की विवादित टिप्पणी ने भी इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय बहस में ला दिया है। अब बड़ा सवाल है कि सरकार छात्रों की मांगों का समाधान कैसे निकालेगी और क्या यह आंदोलन फ्रांस की राजनीति को भी प्रभावित करेगा?

France is witnessing a major student-led protest movement over the country’s struggling education system. What began in Paris has now spread across several cities, with students raising concerns over teacher shortages, overcrowded classrooms, deteriorating school buildings, and inadequate basic facilities. On October 6, large demonstrations took place across France, with clashes reported between protesters and police. Several students were reportedly injured, while incidents of vandalism and damage to public property added to the tension. The government is facing growing pressure to increase education funding and address the shortage of teachers and resources. At the same time, France is dealing with wider economic challenges, rising energy costs, and growing social unrest.

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~HT.410~PR.516~ED.108~GR.506~GR.538~VG.HM~

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00:00जरा सोची, अगर आपकी बच्चे सुभा किताबे लेकर स्कूल जाए और शाम को उनके हाथों में विरोध प्रदर्शन के पोस्टर,
00:06आखों में आसु गैस का दुआ और जखमों के इंशान हो तो एक देश के तौर पर आप कहां खड़ें।
00:12फ्रांस, जुसे हम आईफिल टावर, पार्शन और आधुनिक सोच का प्रतीक मानते हैं, आज वहीं फ्रांस सडकों पर जल रहा
00:19है।
00:19कक्षाओं से शुरू हुआ चातरों का गुस्ता, आज एक ऐसी राश्रव्यापी बवंडर बन चुका है जिसने इमान्योल माकरॉन की सरकार
00:27को हिला कर रख दिया है।
00:286 ओक्टूबर 2006 की शाम को फ्रांस के पिधान मंत्री सेबस्टेन लेकॉर्णू को एक इतिहासिक और अपात कालीन पैसला लेना
00:36पड़ा।
00:36पूरी देश के हाई स्कूलों की कक्षाइस हफते के लिए पूरी तरह निलमवित कर दी गे।
00:41आखिर उरोप के सबसे शक्तिशाली देशों में एक फ्रांस में ऐसा क्या हुआ कि 15 साल के बच्चों को पुलिस
00:48से भिड़ना पड़ रहा है।
00:49क्यों लाकों लोग हमें गैस नहीं जबाब चाहिए कि नारों के साथ सड़को पर।
00:53आए इस पूरी घटना की एक एक परत को विस्तार से समझती है।
01:23कोने में पहल चुका था। सितंबर के अंग तक पारिस, मार्शे, लियॉन, नांथ और मॉंट पेलियर जैसे बड़े शहरों के
01:31700 से अधिक स्कूल इस आंदोलन की चपेट में आ चुके थे।
01:346 अक्टुबर को सडको पर उग्र जन से लाव उमर पड़ा। सरकारी आक्टो के मुताबिक लगबग 2,666,000 लोग
01:42सडको पर उत्रे।
01:43जबकि प्रमुक चात्र संगटन युनियन, सिंटिकल लेसिन का दावा है कि ये संख्या 4,5 लाग के करीब थी।
01:50देश के लगबग 3,700 हाई स्कूलों में से करीब 2,000 स्कूलों में नाकिबिंदी की गए।
01:55यक अक्षाय पूरी तरह ठप रहे हैं। चात्र बढ़े लेकिन शिक्षक खट गड़े। ये गुस्सा अचानक पैदा नहीं हुआ है
02:02बलकि इसके पीछे एक गहरा समाजिक और आर्थिक कारण है।
02:06साल 2010 में 8,33,000 बच्चों का जन हुआ। ठीक 16 साल बाद साल 2026 में ये सभी बच्चे
02:13अब हाई स्कूल में पहुँच चुके हैं।
02:15परिनाम चातर की संख्या धाई लाग से अधिक बढ़ी। शिक्षकों की संख्या 2008 की तुलना में काफी कम। नतीजा ओवर्क्राउड़िड
02:23प्लासेज और जरजर इमारित।
02:252010 में फ्रांस में बर्थ रेट में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई थी। उस बक्त पैदा हुए बच्चे आज 15
02:31-16 साल के होकर हाई स्कूल पहुँच चुके हैं।
03:24शात्र प्ले कार्ट्स लेकर चुलना रहे हैं।
03:25प्ले शेहर लेंस में एक 15 वर्षे चात्र ने प्रिदर्शन के दौरान जमीन पर गिरा हुआ पुलिस का एक स्टन
03:31ग्रेनेट उठा लिया।
03:33वो ग्रेनेट उसके हाथ में ही फट गया जिससे उस बच्चे का हाथ और बाह का हिस्सा उड़ गया।
03:37पैरस में 14 साल के चात्रे इडन के चहरे पर बहुत करीब से आसुगया इसका कैंस्टर लगा जिससे उसके जबडे
03:44में दो जगा फ्राक्चर आ गए और उसकी बड़ी सर्चरी करनी पड़ी।
03:48आकडो का डरावना सच गिरफ्तारी 6500 से ज़्यादा लोग हिरासत में ले जाचुके है जुट में से 87-90%
03:55तक नाबालिक बच्चे हैं।
03:57घायल कम से कम 215 चात और 715 पुलिस अधिकारी खायल है।
04:02संपत्ति का नुसा करीब 24 स्कूलों को आपके हवाले कर दिया गया या तोड़ फोड़ की गए।
04:07फ्रांस के ग्रह मंत्री लॉरिन नुनेज ने पुलिस की कारवाई का बचाव करते हुए कहा कि प्रदर्शनों में उप्रदर्वी शामिन
04:14हो चुके थे, इस लेबल प्रियोग करना जरूरी था।
04:16वह विपक्षी पार्टियों जैसे फ्रांस अन्बाउं ने इसे नाबालिक बच्चों पर सरकारी बरबरता करा दिया है।
04:46गाहों को जाम कर दिया है। घर्मियों में जंगलों की आग बुझाने वाले फायरफाइटर संसाधनों की कमी को लेकर गुस्ते
04:52में।
04:53जबकि स्वास्ते कर्मी बजट में कटौर्टी का विरूध कर रहे है।
04:56फ्रांस का आर्थिक दलदर पैसा कहां से लाए सरकार।
04:58चातल सिक्षा बजट बढ़ाने की मांग कर रहे हैं लेकिन फ्रांस सरकार की हाथ आर्थिक रूप से बंदे हुए।
05:044 ट्रिलियन डॉलर का कर्ज। फ्रांस पर उसकी GDP का लगभग 119 प्रतिशक कर्ज।
05:102027 तक फ्रांस को अपने कज़ पर सालाना 100 अरब डॉलर सिफ ब्याज के रूप में चुकाने होगा।
05:16पेंशन, स्वास्त सेवाओ और रक्षा बजट। यूकरेन युद के कारण का खर्च इतना बढ़ चुका है कि सारवजनिक सिक्षा के
05:23लिए फंड निकाल पाना सरकार के लिए बहुत मुश्किल चुनौती बन चुका है।
05:27फ्रांस के इस अंद्रूनी संकट पर अंतराष्ट्रे राजनीती भी हावी हो गए। अमेरिके राश्ट्रपती डॉनल्ड ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया
05:33प्लाटफॉर्म तुर्ट सोशल पर एक बेहत विवादित बयान गिया।
05:36ट्रम्प ने लिखा फ्रांस में जो हो रहा है वो बिकावू पड़े पैमाने पर हो रहे पलायन से कम नहीं
05:42है।
05:42यह स्कूलों के बारे में नहीं है बलकि इसलाम के उस शहर पर कबजा करने की कोशश के बारे में
05:47है जो कभी महान हुआ करता था।
05:49अलकि इस बात का कोई सुबूत नहीं है कि आंदोलन धार्मिक या प्रवासन से जुड़ा है।
05:54विशेश्यकों का मानना है कि अमेरिका में होने वाले आग्दमी चुनावों को ध्यान में रखकर ट्रम्प इस तरह की बयान
05:59बाजी कर रहे हैं।
06:00प्रुधानमंत्री सेबस्टियन लेकॉर्णू ने ऑक्टूबर के अन तक छात्रों की मांगो का समधान निकालने के लिए प्रस्ताव पेश करने का
06:07वादा किया है।
06:08इसके साथ ही चात्रों को अपनी समध से आए सीधे दर्ज कराने के लिए एक ओनलाइन पोटल शुरू किया गया
06:13है।
06:38देश अपने युवाओ की बुन्याद यानि सिक्षा को नजर अंदाज करता है तो उसका खामियाज आ पूवी अर्थ विवस्था और
06:44शान्ती को खुगतना पड़ता है।
06:46क्या फ्रांस सरकार अक्टूबर के अंतक को ऐसा ठोसा मधान लापाएगी जो लाग कुछ चातरों के गुस्से को शांत कर
06:51सके या फिर या आंदोलन इमानुल माकरॉन की सत्ता के पतन का कारण बनेगा।
06:56इस पूरे मुद्दे पर आपकी क्या राय है क्या चातरों को अपनी मांगों के लिए इस तरह सडकों पर उतरना
07:00सही है।
07:27आपकी क्या चातरों के लिए इस तरह सब्सक्षा इस पर आपकी क्या चातरों के पर आपकी क्या बनेगा।
07:42प्रीज लेब अले दिर्ड बाहना लेब एपी एिड दिले डिचे कि अले लुट क्ट्ट्राइब ट्राइब को सब्सक्राइब के सब्सक्राइब की
07:59अबश्याप जायाब की शाएब है

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