शाजापुर। हिंदी भाषा की दशा तो वर्तमान में अच्छी है पर इसकी दिशा पर ध्यान देना जरूरी है। हम बच्चों को हिंदी भाषा की वैज्ञानिकता नहीं बताएंगे तो वह अपनी भाषा का सम्मान करना भूल जाएंगे। यह बात साहित्य अकादमी मध्यप्रदेश के निदेशक डाॅ. विकास दवे ने कही। वे हिंदी जागृति मंच, कालापीपल द्वारा आयोजित व्याख्यान में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि हमारी हिंदी दुनिया की सबसे समृद्ध भाषा है। हिंदी भाषा में लगभग 35 लाख शब्दों का कोश है इतना बड़ा शब्द कोश किसी दूसरी भाषा का नहीं है। विशेष अतिथि के रूप में प्रख्यात कवि रामचंद्र अवस्थी एवं वरिष्ठ पत्रकार मुकेश तिवारी मौजूद रहे। अध्यक्षता मंच के संरक्षक कैलाशनारायण परमार ने की। हिंदी जागृति मंच की ओर से डाॅ. विकास दवे का अभिनंदन भी किया गया। अभिनंदन-पत्र का वाचन श्रीमती ममता मनावत ने किया। वरिष्ठ कवि रामचंद्र अवस्थी ने अपनी कविता भूख-प्यास का पाठ कर हिंदी लेखन में मात्राओं से सम्बन्धी होने वाली त्रुटियों पर चर्चा की। वरिष्ठ पत्रकार मुकेश तिवारी ने उन्होंने हिंदी भाषा, हिंदी साहित्य और हिंदी पत्रकारिता को बहुत समृद्ध बताया।
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