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01:00उसे पैसो का बहुत घमंड था, उसने वैसा ही अपनी बेटी को बना दिया था, इधर बबली मेले में जाने के लिए ढेरो तैयारी कर रहे थी, उधर बेचारी नंदीनी मेला देखने तो जा रही थी, पर मेले में जाने के लिए उसके पास इतने पैसे नहीं थे.
01:13नंदीनी बिटिया, तेरे पापू ने ये 20 रुपे दिये हैं, मेले में खुद से कुछ खाना, समझ गई, कहीं ऐसा नव कि तो कुछ खाये न और हमारी चिंता में रहे, हम घर पर कुछ खा लेंगे लेकिन तू भूखी मत रहना, सब के साथ मिलकर मेले में अच्छे से घूमन
01:43कर, खुब सारा सामान लेकर मेला देखने जा रही थी, और नंदीनी अपने माता पिता को प्रणाम करके, रोटी का डिबा हाथ में लेकर, सहेलियों के साथ मेला देखने के लिए निकल पड़ती है, सारी सहेलियों मेले में पहुँचती है, बबली, तेरी फ्रॉक तो बहु
02:13तुम सबने इस साथ मिलाखे बहुत बड़ी गलती कर दी, कितनी गरीब सिया यह, तो तू इसको साथ हाने के लिए मना कर देती, तो हम भी मना कर देते, साथ हाने के लिए मैं मना नहीं कर सकती थी न, क्योंकि है तो मेरे सघेताओजी की बेटी न, इसई वज़े से मेरे म助 finest
02:43तो हमारे साथ क्यों नहीं जा रही
02:45क्योंकि तेरे पास कुछ खाने के लिए पैसी नहीं है
02:48और हम तुझे अपने में से
02:50बिल्कुल भी कुछ नहीं खिलाएंगे
02:51चलो हम सब वहाँ चलते हैं
02:53इसे यहाँ खड़ी रहने दो
02:54घूमती रहेगी अकेली
02:56बबले और उसकी सहिलिया
02:58दूसरी तरफ खाने पीने चली जाती है
03:00नंदीनी इधर उथर घूमने लगती है
03:02नंदीनी के
03:03पास रोटी थी इसलिए उसने सोचा
03:06मेरे पास रोटी है
03:07मैं रोटी खा लेती हूँ और इन पैसो
03:10Let us get some money on the price.
03:12This will be okay.
03:14It will be too much.
03:16Okay, I'll buy one over her.
03:18My mother says that she's a small money.
03:20If I buy one for the money,
03:22then I will buy one.
03:24That will be really happy.
03:26Let's give her a very hungry.
03:30Put some food.
03:32Dadi, my mother, you have a hungry.
03:34Your house is a messy party.
03:36You're so hungry.
03:37अगर तुम्हारी रोटी मैं खाऊंगी तो तुम क्या खाऊंगी?
03:41कोई बात नहीं दादी मा, मैं घर जाकर खाना खालूंगी, ये रोटी आप खालो.
03:46बुरी औरत फटाफट से रोटी खालेती है.
03:49बिटिया, तुम बहुत अच्छी हो, क्या नाम है तुम्हारा?
03:53मेरा नाम नंदिनी है, तुम बहुत दयालू भी हो, तुमने मुझे रोटी खिलाई, मेरा पेट भर गया, तुम्हें ये सब अच्छी बाते किसने सिखाई?
04:04मेरे मा बापुने, वो कहते हैं कि जब भी कोई भूखा या जरूरत मन देखो, तो उसकी मदद जरूर करो.
04:11बहुत अच्छे संसकार दिये हैं तुम्हारे माता पिता ने तुम्हें, अच्छा ये बताओ, तुम मेले में से अपने माबाप के लिए क्या खरीद कर ले जाओगी?
04:21मेरे पास 20 रुपए है, मा के पास सिलबटा नहीं है, उनका सिलबटा टूट गया है, वो विचारी मसारे नहीं पीस पाती, सोच रही हो वही खरीद लो, अरे मेरे पैसे कहा गए, मैंने यहीं की फ्रॉग की जेब में तो रखे थे, अरे मेरे फ्रॉग की जेब फटी हुई
04:51अपने सामने सुनहरे पंखो वाली परी को देख कर नंदिनी हैरान रह जाती है, परी के हाथ में एक जादूई सिलबटा था, नंदिनी मेरा नाम सुनहरी परी है, मैं ऐसे ही लोगों की परिक्षा लेती हूँ, और जो मन के दयालू और इमानदार होते हैं, उनकी मैं हमेश
05:21सच परी दीदी, ये तो बहुत अच्छा हो जाएगा, अब मेरी मा को मेहनत नहीं करनी पड़ेगी, वो बिचारी बहुत धक जाती थी, आपका बहुत बहुत धन्यवाद परी दीदी, नंदिनी को जायदूई सिलबटा देकर परी गायब हो जाती है, कुछ देर बाद बब
05:51घर आकर नंदिनी अपने मा बापू को परी का दिया हुआ जादूई सिलबटा दिखाती है, नंदिनी की मा जैसे सिलबटे पर साबुत मसारे रखती है, जादूई सिलबटा अपने आप उन मसालों को पीसने लगता है, ये देखकर नंदिनी और उसके मा बापू हैरान रह
06:21जैसे मर्जी मसाले हम इस चादोई सिल्बट्टे पर पीस कर बेच सकते हैं
06:26आप सही कह रहे हो
06:27ये विचार तो बहुत अच्छा है
06:29इससे हमें अच्छी कमाई भी होगी
06:31अब हमें पैसों की तंगी भी नहीं रहेगी
06:34ये सब नंदिनी की वज़ा से हुआ है
06:36नंदिनी तुने तो हमारी किसमत ही बदल दी बिट्यारानी
06:41अपने माता पिता को खुश देखकर नंदिनी भी बहुत खुश होती है
06:44नंदिनी की वज़े से उसके माता पिता की गरीबी दूर हो गई
06:48और वो पैसे वाले हो गई
06:50।
07:20और देखो, आज उनकी किस्मत बदल गई और वो हमसे भी ज़्यादा पैसे वाले हो गए
07:25अब हमें भी बदल जाना चाहिए, बदले की भावना का त्याग कर दो
07:28बबली के माता पिता ने बिलकुल सही सोचा, हम बच्चों को जैसे संसकार देते हैं, बच्चे वैसे ही बनते हैं
07:43अच्छाई की वज़े से आज नंदिनी और उसके माता पिता के पास सारी खुश्यां थी
07:47शीतल फोन पर बात करते हुए रोय जा रहे थी, उधर से उसकी मा उसे समझाते हुए चुप कर वा रहे थी
07:59ममी, मेरी काले रंग के लिए यहां सब मुझे ताने देते हैं, इसमें मेरी क्या गलती है अगर मैं काले रंग की हूँ
08:06क्या काले रंग के लोग इंसान नहीं होते
08:09अब तो बहुत मन कराब होता है मुझे आपकी बहुत याद आ रही है
08:13मैं बहुत परिशान हूँ
08:15रोमत बेटी सब ठीक हो जाएगा
08:19एक दिन तेरे ससुराल वालों को तेरी अच्छाई का एहसास जरूर होगा
08:24शीतल फोन रग देती है और कमरे से बाहर आकर रसोई के कामों में लग जाती है
08:29ममी जी रसोई में मसाले खतम हो गए है
08:33आपके घुटनों में दर्द है और मैं जा नहीं सकती मैंने मशीन लगाई है कपड़े दोने लगी हूँ
08:37अरे तो ये शीतल क्या कर रही है इसे भेज दे मसाले लेने के लिए वैसे भीस की काली शकल देख देखकर दिमाग और खराब होता है
08:45थोड़ी देर घर से बाहर रहेगी तो घर में उचाला रहेगा
08:48शीतल जा बाजार से रसोई के सारे मसाले खरीद लाओ
08:52एक भी मसाला चूटना नहीं चाहिए
08:54मैंने लिस्ट में सारे मसाले लिख दिये है
08:57जी भाबी मैं ले आती हूँ
08:59हमारी ही किसमत फूटी थी जो ऐसी काली बहु मिली
09:02कोई ऐसा मसाला भी ढूण लाना जिसे खाने से तेरा रंग गोरा हो जाए
09:06शीतल अपनी सास की बाते सुनकर चुप रहती है
09:10क्योंकि ये सब वो रोजाना ही सुनती थी
09:12शीतल बाजार को चली जाती है पर उस दिन बाजार बंद था
09:16भाईया ये राशन की दुकाने क्यों बंद है
09:19बहन जे सोमवार सारे दुकाने बंद रहती है
09:23अरे, आज तो सोमवार है, मुझे तो ध्यानी नहीं रहा
09:27शीतल को तो ध्यान नहीं रहा, पर उसकी जेठानी और सास को ये बात अच्छे से पता थी
09:32मम्मी जी, हमने अच्छा किया, आज सोमवार की छुट्टी होती है
09:36वो बेचारी शीतल बाजार में मसाले की दुकान डून रहे होगी
09:41आप शीतल को तंग करने का कोई मौका नहीं चोड़ते हो
09:45छोड़ना भी नहीं है, मैं तो सच में उससे बहुत नफरत करती हूँ
09:49घूमती रहने दो धूप में बाजार में, जब खाली हाथ लोट कराएगी तो अच्छे से सुना देंगे
09:54शीतल बहुत परिशान थी, बाजार में मसाले की कोई भी दुकान नहीं खुली थी
09:59शीतल घूमती रही, दोपहर में धूप बहुत तेज हो गई थी
10:03शीतल को बहुत प्यास भी लगी थी, वो एक दुकान से पानी खरीद में जाने लगी
10:07तो उसने सड़क के किनारे एक बुड़ी औरत को बेहोश देखा
10:10ही भगवान, ये कौन है?
10:13बिचारी लगता है धूप से बेहोश हो गई है, मैं भईया से पानी खरीद कर लाती है
10:17भईया ज़र एक बोतल पानी देना?
10:23शीतल पानी की बोतल लेकर उस औरत के पास जाती है
10:26और उसके मूपर थोड़ी से पानी के छीटे डालती है
10:29और अथोश में आ जाती है
10:31शुक्रिया बेटी, तुम्हें देख कर बहुत अच्छा लगा
10:35तुमने मेरी मदद की
10:37आज के जमाने में कौन किसी की परवा करता है
10:41बेटी, एक काम और कर दो, कुछ दूरी पर मेरा घर है
10:45मुझे वहां तक छोड़ दो, बहुत कमजोरी महसूस हो रही है
10:49क्यों नहीं दादी मा, जरूर, चलिए
10:52शीतल उन बुड़ी औरत को उनके घर तक छोड़ देती है
10:55बातों बातों में शीतल अपने बारे में बात करती है
10:58बेटी, मैं तुम्हें बताना चाहती हूँ
11:02कि किसी जमाने में मैं एक मशूर जादू करनी थी
11:05अब उम्र के साथ मैंने जादू करना छोड़ दिया है
11:08पर मैं तुम्हारी मदद जरूर करूँगी
11:11बेटी, मैं तुम्हें जादूई मसाले दूँगी
11:15उन मसालों के इस्तेमाल करने से
11:17घर पर सभी लोगों का व्यवहार तुम्हारे लिए अच्छा हो जाएगा
11:22सब तुमसे बहुत प्यार से बात करेंगे
11:25और सब ये भूल जाएंगे कि तुम्हारा रंग काला है
11:28इससे तुम्हारी जिंदगी में खुशियां आ जाएंगी
11:32पर एक बात का खयाल रखना बेटी
11:34ये मसाले हमेशा जादूई रहेंगे
11:37पर हर रविवार की रात इन मसालों का जादू काम नहीं करेगा
11:41इसलिए तुम्हें बहुत सावधानी रखनी है
11:44तुम्हें उस रात किसी के भी सामने नहीं जाना
11:47नहीं तो फिर से सब कुछ पहले जैसा हो जाएगा
11:51उसके बाद ये मसाले अपना जादू नहीं दिखा पाएंगे
11:55मैं ध्यान रखूंगी दादी मा आपका बहुत बहुत शुक्रिया
11:58आपने मेरी सारी चिंता दूर कर दिये
12:01शीतल वो जादूई मसाले लेकर घर आ जाती है
12:04मसाले इतने सुगंधित थे कि उसकी सास और जिठानी कुछ बोल ही ने पाए
12:08उस दिन सब्जी में वही मसाले इस्तिमाल हुए
12:11और जादूई मसालों ने अपना काम करना शुरू कर दिया
12:14वाह क्या सब्जी बनाई है शीतल बहु
12:18चलो अब तुम भी बैठ कर खालो
12:34कि सास और जिठानी उससे खुब प्यार से बात करने लगी
12:37तीन चार दिन तक ऐसे ही रहा
12:39पर जब संडे आया तो शीतल को चिंता हो गई
12:41आज तो संडे है आज रात मुझे बहुत ध्यान देना है
12:44ऐसा ना हो कि किसी को पता चल जाए मैं कमरे में ही रहूंगी
12:48शीतल मैं और बड़े भाईया रात को शादी में जा रहे हैं
12:53हम सुबह तक लोटेंगे तो मा का ख्याल रखना
12:55हाँ हाँ आप चिंता मत करो
12:58चलो अच्छा है आज रात ये और भाईया शादी में जा रहे हैं
13:02मैं चुप करके सोजाओंगी किसी को पता नहीं चलेगा
13:05और कल सब कुछ फिर से ठीक हो जाएगा
13:07शीतल को तसली थी कि रवी और उसके जेट दोनों शादी में चले गए हैं
13:11शीतल ने सोचा वो अपने कमरे की कुंडी लगा कर सो जाएगी ताकि रविवार की रात आराम से निकल जाए
13:17पर अचानक शीतल की सास अपने कमरे में से आवाज लगाने लगी
13:20कविता बहू जल्दी आओ मेरी सास घुट रही है
13:24सास की आवाज शीतल ने भी सुन ली थी
13:27वो भी जेठानी के साथ अपनी सास के कमरे में जाती है
13:30सास की तव्यत बहुत जादा खराब हो चुकी थी
13:33शीतल को याद ही नहीं रहा कि मसालों का असर खत्म हो चुका है
13:37ममी ची चिंता मत करो
13:39हम आपको अभी डॉक्टर के पास ले चलते हैं
13:41येलो, कर लो बात
13:42जैसी शकल वैसी अकल
13:44अरे इतनी रात में कोई औरटो रिक्षा नहीं मिलेगा
13:46ना ही कोई गाडी मिलेगी
13:48भावी कार तो घरपर खड़ी है ना
13:50हम अपनी कार से ले चलते हैं
13:51हमें कार चलानी थोड़ी आती है, ये दोनों भाई भी घर पर नहीं है, भावी मुझे ड्राइविंग आती है, आप टेंशन मतलो, चलिए ममी जी मैं आपको डॉक्टर के पास ले चलती हूँ, शीतल ने बिना देर की अपनी सास को कार में लिटाया, और कार चलाकर अस्पतार
14:21संपन्न हो, ये बात मुझे कल पता चल गई कि तुम हमारे लिए कितना सोचती हो, हम तुमें कितने ताने देते हैं, फिर भी तुम हमारी भलाई देखती हो, कविता, अपनी देवरानी से अब गलत बात मत करना, शीतल बहुत अच्छी है, हाँ ममी जी, अब नहीं करेंगे,
14:51वितल ने सब का दिल जीत लिया,

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