00:00हाजी करम, दीन की कहानी, एक पिता, एक हीरो.
00:03हाजी करम दीन एक बेहत गरीब, लेकिन इमानदार और धार्मिक इनसान था,
00:08जो एक पुराने, कच्चे से मकान में अपनी तीन बेटियों के साथ जिन्दगी गुजार रहा था.
00:12वो गाम के किनारे स्थित मस्जिद में अजान देता, सफाई करता और इमाम सहब की सेवा करता.
00:19उसकी जिन्दगी, साथगी, सब्र और तनहाई का नमूना थी.
00:23उसकी तीन बेटियां, जैनब, सल्मा और हफसा, धार्मिक, आग्याकारी और परदे की पावन थी.
00:30उनकी मां का इंतकाल कई साथ पहले हो चुका था.
00:33तब से हाजी करमदीन ने अकेले ही उनकी परवरश की थी.
00:36भले ही पेट भर खाना न मिलता, लेकिन वो हमेशा कहता,
00:40अगर अगर अल्लाह ने सबर का वादा किया है, तो इनाम भी जरूर देगा.
00:43एक रात तेज बारिश होई, घर की छट टपकने लगी, दीवारों से पानी रिसने लगा, बेटियां कांप रही थी.
00:51हाजी करमदीन ने उनके सिर पर पुराना कंबल डाल दिया, और खुद भीगी दीवार से टेक लगा कर बैठ गया.
00:58सुबह गाम वालों ने देखा कि उसका आधा घर गिर चुका है.
01:01गाम के रही इसने रहम खाकर थोड़ा राशन दिया, मगर साथ ही तंज भी किया.
01:06अल्ला पर भरोसा ठीक है, मगर थोड़ी दुनियादारी भी होनी चाहिए.
01:11हाजी करम दीन ने जुकी नजरों से सिर्फ इतना कहा,
01:14अल्ला ही मेरा कफील है.
01:16कई दिन गुजर गए, हाजी करम दीन का मकान अब रहने के काबिल नहीं रहा था.
01:21एक दिन मस्जिद के दरवाजे पर उसे एक लिफाफा मिला.
01:25अंदर कुछ हजार रुपया और एक छोटा सा नोट था.
01:28डौम, अपनी बेटियों के लिए इस्तेमाल करें.
01:32अल्ला है आपके सब्र को देखा है.
01:34हाजी करम दीन हैरान रह गया.
01:36लेकिन उसने शुक्र के साथ वो मदद कुबूल की.
01:39सबसे पहले उसने बेटियों के लिए गरम कपड़े
01:41और खाने पीने का सामान खरीदा.
01:44मगर उसके दिल में सवाल था.
01:46यह मदद किसने भेजी?
01:47कुछ दिन बाद गाउं में एक नेक और दीनी नौजवान,
01:51कारी फहद, अपने माता-पिता के साथ
01:53जैनब का रिष्टा मांगने आया.
01:56सब जानते थे कि हाजी कर्म दीन के पास दहेज नहीं है.
01:59लेकिन कारी फहद ने कहा,
02:01मुझे दहेज नहीं, एक नेक बीवी चाहिए.
02:05निकाह बहुत सादगी से हुआ.
02:07फिर कुछ ही दिनों में,
02:08दो और नेक नौजवानों ने सल्मा और हफसा के रिष्टे मांगे.
02:13सब शादियां अल्लाह पर भरूसे से हुई.
02:16गाम वाले हैरान थे कि इतने अच्छे रिष्टे अचानक कहां से आ गए?
02:20जैनब की शादी के कुछ दिन बाद एक पुराना खत मिला,
02:23जिसे हाजी करम दीन ने अपनी बेटी से छुपा लिया.
02:27उस खत में लिखा था,
02:29करम दीन, वक्त आ गया है कि तुम अपना बादा पूरा करो.
02:33अगर तुमने हमसे संपर्क नहीं किया,
02:35तो हम तुम्हारे राज़ खोल देंगे.
02:37एक निन्यानवे,
02:38जैनब ने अपने पिता को रूते देखा,
02:41लेकि कभी वज़ा नहीं पूची.
02:42वो बस इतना बोले.
02:44कुछ राजल्लाह के हवाले होते हैं.
02:47एक दिन जैनब ने चुपके से अपने पिता के पुराने संदूग की तलाशी ली.
02:51उसमें एक फौजी यूनिफॉर्म,
03:08जैनब के पैरों तले जमीन खिसक गई.
03:11उसने अपने शोहर कारी फेहद से सलाह ली.
03:14फेहद ने कहा,
03:15अबा को वक्त दो, वो खुद सब बता देंगे.
03:18कुछ ही दिन बाद गाउं में दो संदिक्ध लोग नज़र आएं,
03:21जो हाजी करमदीन के बारे में पूच्टाच कर रहे थे.
03:25असल में वे पुराने दुश्मन थे,
03:27जिनके खिलाफ करमदीन ने गुप्त मिशन में काम किया था.
03:30हाजी करमदीन ने महसूस किया,
03:33कि अब खामोश रहना मुम्किन नहीं.
03:35उसने अपनी बेटियों को सचाई बता दी.
03:37मैं पाकिस्तान की हिफाज़त के मिशन पर था.
03:40जब मिशन पूरा हुआ तो मेरी जान को खत्रा था.
03:43इसलिए मैंने करमदीन बन कर एक सादा जिन्दगी शुरू की.
03:46उन दुश्मनों ने जैनब को अगवा करने की कोशिश की.
03:50मगर हाजी करमदीन ने अपनी जान भाउं पर लगा कर बेटी को बचा लिया.
03:55इस घटना के बाद सुरक्षा एजेंसियां हरकत में आ गई.
03:58और हाजी करमदीन को फिर से उसकी असली पहचान देने की पेशकश की.
04:02मगर उसने मना कर दिया.
04:03अब मैं सिर्फ एक बाप हूँ.
04:05मुझे और कोई पहचान नहीं चाहिए.
04:08कुछ महीनों बाद हाजी करमदीन हज के लिए गया.
04:11वहां मदीना में उसने अल्ला से दूआ मांगी.
04:14एई अल्ला, मेरी बेटियों की इज़त सलामत रहे.
04:17और मेरे अतीद का बोज उन्हें ना उठाना पड़े.
04:20मदीना में ही उसका इंतकाल हुआ.
04:22उसके चेहरे पर मुस्कान थी.
04:24जैसे सुकून पा गया हो.
04:25उसकी लाश वतन लाई गई.
04:27रियासत ने पूरे सेन्य सम्मान के साथ उसे दफन किया.
04:31खानी से सीख और संदेश, हैमान, सब्र और कुर्बानी हमेशा रंग लाते हैं.
04:37हर बाप के दिल में अपनी बेटियों के लिए बेपनाह महबत होती है.
04:40चाहे वो गरीब हो या एक गुमनाम हीरो, असल दौलत किरदार और नियत की पाकीज़गी है.