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00:00मालिनी अपनी दोनों बेटों की शादी एक ही मंडप में पायल सुप्रिया से करवा कर बहु बना कर ले आती है
00:06मालिनी डालिंग, I must say कि तुम्हारी चोटी बहु का ड्रेसिंग जन्स काफ़ी अच्छा है, कितनी गॉर्जिस लग रही है स्लाइट शेड लेहंगे में
00:28पायल ये तंज खुंगट में खड़ी संगीता को सुना रही थी, तभी पडोसन कविता प्रिशन सा करते हुए
00:43केचिबी का हलो मगर दलहन का रूप लाल रंग और कत्थक रंग के जोड़े में ही खिलता है
00:49इसके अच्छे आचरण का क्या मुझे चार डालना है तो मेरे बेटे की मन पसंद के चलते आ गई
01:00वनना मैं अपनी पसंद से बड़ी बहु भी पायल बहु की तरह चुनकर लाती
01:04पता नहीं ममी जी का ये लेक्चर कहां समाप्त होगा जबगी सेधी उंगली से ना निकले तो उंगली टेड़ी करने परती है
01:11गर्मी से परिशान पायल बेओश होने का नाटक करती है
01:14अरे क्या हुआ पायल बहु संभाल कर तुम ठीक तो हो
01:18ममी जी मुझे बहुत ज़ादा चक्कर आ रही है
01:21लगता है तुम्हें गर्मी लग गई ये बस दो मिनट में मैं तुमारा ग्रह प्रवेश करवा देती हूँ फिर तुमारा आराम कर लेना
01:26पर मालिनी पहले तो मैं संगीता बहु का ग्रह प्रवेश करवाना चाहिए
01:31देखो जी, मुझे पता है इस बहु को कौन से स्थान पर रखना है, वैसे भी ये बहु मुझे खास पसंद नहीं
01:36मालीनी के कटू शब्द से घुंगट में खड़ी संगीता का मन दुख चाता है
01:40इधर दो आरती के थाली, मैं अपने घर की लक्षमी का ग्रह प्रवेश करवालूँगा
01:45कलश गिरा कर संगीता पाउंच होती है
01:47नमस्ती बाबुजी
01:49सदा स्वागर नहो, दूदो नहाओ, पूतो फलो बहु
01:53बहु इस घर में तुम्हारी बहुत सी परीक्षाएं होंगी
01:56लेकिन तुम हिम्मत मत हाना, तुम्हारे बाबुजी तुम्हारे साथ है
01:59दर्नेवाद बाबुजी, दरसल अमीर पायल को मालिनी अपनी पसंद से चुन कर लाई थी
02:05जबकि संगीता गरीब घर से आई थी, उसकी दर्जी मा ने एक जोड़े में उसकी विदाई कर दी थी
02:09जिसके चलते मालिनी भेदभाव सही दोनों का स्वागत करती है
02:12पायल प्लीज जल्दी से आ जाओ, आज पूरी रात यूही खराब करने का इरादा है क्या?
02:17बस आ गई डार्लिंग, जिस गिवी टू मिनिट्स
02:20बताओ, कैसी लग रही हूं मैं?
02:23तुमने ड्रेस चेंज कर लिया, मैं तो घब रहा गया था, कि कहीं तुम्हें अंदर फिर से चक्कर ना आ गया हो
02:29वो तो मैंने बाहर मेलो ड्रामा किया था
02:31संगीता, तुम अब तक मा की बातों को दिल से लगाए बैठी हो
02:57मा जी की गलती नहीं है सिध्धान जी
03:00संगीता, मेरी मा बाहर से जितनी कठोर है ना, अंदर से नारियल जितनी नरम है
03:09देखना बच्चा हो जाने के बाद वो मान जाएंगी
03:12संगीता हर दिन सास का दिल जीतने का प्रेतन करती लेकिन मालनी उसे सुई बराबर भी एहमियत नहीं देती है
03:17महीं एक सुभा संगीता को उल्टी करते देख
03:20संगीता तुम ठीक तो हो, इतनी उल्टी क्यों हो रही है
03:25सिध्धान जी, कुछ दिनों से मेरा दिल बहुत कच्चा कच्चा रह रहा है, खटा कटा खाने का मन कर रहा है
03:31एक तो तुम्हारी तबियत खराब है, तुम्हें ये सब चीज खाने का मन कर रहा है, मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा
03:37सिध्धान जी, आप पापा बनने वाले हैं
03:40क्या? सच में? पापा बनने वाला हूँ
03:43मा, आपने सुना, आप दादी बनने वाली है
03:46माली ने इतनी बड़ी खुशखबरी सुनकर भी तुम नीरस्ता दिखा रही हो, तुम्हारा खून खानदान बढ़ने जा रहा है
03:55तबी दर्वाजे से अमीर बहु पती के साथ प्रेगनेंसी टेस्ट की रिपोर्ट लेकर आती है
04:01पाइल बहु डॉक्टर ने क्या कहा?
04:16मा क्या मैं आपके और पाइल के साथ खरीदारी के लिए चल सकती हूँ? अपने लिए कुछ सिंपल कॉटन की सूट खरीद लेती?
04:25क्या तेरी दो कोड़ी की दर्जी माने क्या भर-भर के मेरे घर में दहेज बेजा? जो मैं तुझ पर ड्रेस दिलाने में पैसा खर्चा करूँ? जो है वही पैंच के गुजारा कर
04:34संगीता की प्रती मालनी का कड़बा, सुभाव सबको बहुत खलता है
04:39संगीता, रो मत, तुम तु जानती हो मेरी तनखा इतनी जादा भी नहीं है कि मैं तुम्हें मौल की महंगी ड्रेस दिलवा सकूँ
04:48पर ये कुछ पंधा सो दो हजार रुपए हैं इन्हें रख लो और अपने लिए कुछ कपड़े ले आना
04:52तुम भी सोच रही हो ना कैसा पती मिला है कि खुला खर्चा भी नहीं दे सकता
04:57सिद्धान जी, आपने मुझे दो जोड़ी कपड़े के साथ स्विकार किया है इतने में, मैं कई जोड़े कपड़े बना लूँगी
05:04कुछ पैसे बचाने के लिए भी गरीब प्रेगनेंट बहु बैदल पैदल तक बाजार जाती है, वही मालनी अपनी अमीर बहु को
05:10एसी वाली ओला में बिठा कर बड़िया मॉल में लेकर जाती है
05:13अमीर बहु एक से बढ़कर एक महंगी महंगी ड्रेस चुनती है, तभी वह एक डमी पर बेबी शार के लिए सुन्दर सा गाम देखती है
05:40जो की स्टॉक के पास सिविश्वल था
05:41मामी जी, देखिए कितना प्रीटी गाउन है, मैं तो अपनी गोद भराय में यही पैनूँगी
05:46बहुत तम कैसी बाते कर रही हो, इस गाउन में पेट वाले हिस्से के पास तो एकदम नेट का कपड़ा लगा हुआ है
05:51पूरा साफ पेट दिखाई देगा, ऐसे में बच्चो को नजर लग जाएगी
05:55तो स्टू मा, जब तो यह सासु मा मुझे इरिटेट कर रही है, बच्चा मैं केरी गरी और कपड़े में इनके कोरिंग बेनूँग
06:01पचास रुपए मीटर है बेहन जी, एकदम मख़न कपड़ा है, जो मर्जी काट कर सिल लीजिए
06:15ये सूती का कपड़ा सादा सूट बनाने के लिए सबसे अच्छा रहेगा, इस पर चाग भी आसानी से चड़ जाता है, पर कपड़ा भी मसकने वाला नहीं है
06:23थोड़े पैसो के हिसाब से संगीता कपड़े खरीद कर लाती है, और खुद से तरह तरह का फ्रॉक सूट, सादा सूट वगेरा सिल कर पहनने लगती है, देखते देखते दोनों बहु के साथ आट महीने लग जाते हैं, और अब गोद भराई के खरीदारी शुरू होती है
06:53से मना करते थी है, वहीं संगीता सिंपल साड़ी पर खुद से कारीगरी करके खुब अच्छे से सोला सिंगार बालों में गजरा कमरबंद लगा कर गोद भराई में आती है, तो अब बहुत तुम तो बड़ी गुनवान हो, अपने बच्चों के ले लंगोर कपड़े खु�
07:23खुद दहेज लाई नहीं, बेटी पैदा करके बोज और बढ़ा दिया, मेरे दाथ तो खटे हो गए, बाकी अपनी पायल बहु और पोते का मैं धूम धाम से चटी और खाना पीना करवाऊंगी, मालिनी अपनी अमीर बहु और पोते के लिए ड्रेसेस खरीद के लाती है, �
07:53सस्ती साड़ी और स्वदेश सा कपड़ा देती है, सही है, इस गरीब आली बहु और बच्चे के कपड़े में हजार में ही निप्टारा हो गया, कल मेरे पोते का नामकरण सही डंक से हो जाए, ये साड़ी तो कितनी प्लेन है और कपड़ा भी खिट सा रहा ऐसा करती हो, इस
08:23पायल बहु तूने कितनी गर्मी में बच्चे को जॉर्जट कपड़ा क्यों पहना रखा है, मैं जो कॉटन का ड्रेस लेकर आई थी, वो कहा है, तूने भी ड्रेस बदली हुई ये पहनी है, तूने भी ड्रेस बदली हुई पहनी है
08:34ममी जी, आपकी डाउन मार्केट ड्रेस पहन का मुझे अपनी इंसल्ट नहीं करवानी थी, देखिए मेरी ममी ने मुझे कितना एक्स्पेंसिव ड्रेस प्रेस प्रेजन किया है, नामकरन के पूरे रस्म में पायल अपनी मा को आगे रखती है, जबकि संगीता अपनी सास को
09:04उसके रहन सहन पहनने के साथ स्वीकार कर लेती है, बहुत अच्छा लगा, जो आज आप मेरे घर आई नहीं, तो जब से आपके घर में भी बहु आई है, हम दोनों ते एक दूसरे के घर का रास्ता ही भूल गए शानता जी, सही बोला, आज बस मैंने सोच लिया था कि पड
09:34लगता है कि बारिश होने वाली है, अरे बहुओ, अरे शिखा और प्रिया, यहां आओ, जी मा जी बोलिये, बहुओ देखो मौसम कितना मस्ताना हो रहा है, और शानता जी भी कितने दिनों के बाद आई है, तुम दोने एक काम करो, जाओ जाकर बढ़िया चाय और पकोड़
10:04जोई करने के बचाए, मैं चाय पकोड़े बनाओ, नहीं, ऐसा नहीं हो सकता, जल्दी से बचने का कोई बहाना सोच, शिखा, मा जी मैंना चाय बना दूँगी, शानता जी, मैं अदरक की चाय इतनी अच्छी बना दियोंगी, बस पूछो ने, और प्रिया पकोड़े बना �
10:34दोनों ये बहुँआ के मिज़ाज में अंतर था, एक तरफ जहां शिखा कांचोर टाइप की थी, तो वहीं प्रिया काफी सीधी साधी और महनती थी, आज भी शिखा चालागी से रसुई में आई और उसने दो कप चाय बनने को रख दी, इतने महीं बारिश तेज हो गई
10:49अरे वा, कितनी तेज बारिश हो रही है, इतनी अच्छी बारिश हो, और मैं उसमें ना भीग पाऊं, ऐसा हो सकता है क्या? प्रिया मैंने चाय बनने को रख दिये, अब इसको न तुम देख ले ना, बारिश इतनी अच्छी आ रही है, तो मैं इसमें भीगने जा रही हू�
11:19पुरानी की बूंदे तुझे, तो ढूंडे, ये मिलने की ख्वाहिश, ये ख्वाहिश पुरानी, ओ पूरी मुझी से मेरी ये कहानी
11:34ये च्छत से कैसी आवाज आ रही है, लगता है कि शिखा च्छत पर है, इसने फिर वही किया बेचारी प्रिया ही चाय और पकोड़े दोनों चीज़े बनाने में लगी हुई होगी
11:44प्रिया ने ऐसे बोलकर चाय दोबारा बनने के लिए रखी और साथ साथ पकोड़े बनाई
12:11कुछी देर में उसने दोनों चीज़े बना दी, जिसके बाद वो उन्हें शान्ता और शान्ती के आगे लेकर गई
12:17अरे वाज, चाय और पकोड़े वो भी बारिश के वक्त, खाओ शान्ती जी, बहु तू भी ले ले
12:24अरे वाह, वैसे सच बोल रही थी शान्ती जी, शिखा बहु क्या मज़ेदार चाय बनाई है उसने, लीजे मेरी तरफ से उसे चाय का इनाम दे देना
12:33शान्ता को पता भी नहीं था कि वो चाय शिखा ने नहीं प्रिया ने बनाई थी
12:37शिखा बिना कुछ किये, क्रेटर ले गई, जबके प्रिया को सब कुछ करने के बाद भी कुछ नहीं मिला
12:42ऐसे कुछ दिनों बाद, आज दोनों ही बहुएं बाजार आई होई थी
12:46शिखा बाबी, मैंने सारा तो नाश्टे का सामान ले लिया, अब बस वो चीज़ समझ नहीं आरी कि मैं कुछ खास क्या लूँ
12:52आज जो घर पर महमान आ रहे हो और बाबा की बहुत अच्छे दोस्ते माजी ने बोला था
12:57कि नाश्टे के सामान में कुछ स्पेशल भी लेकर आना, आज जो भी हो हमारी खातेदारी में कोई कमी नहीं रहनी चाहिए
13:02तो मैं ऐसा क्या लूँ जिसको देखते ही माजी का दिल खुश हो जाए
13:06कुछ भी ले लो, मौसम की कोई भी चीज ले लो
13:10प्रिया ने खुद से पकोड़े बनाने की जिम्मेदारी ले ली और वो पकोड़े ही बनाने का सामान ले आई
13:40कुछी देर में घर में महमान आ गई जिसमें महेश का दोस्त और उसकी पतनी थी
13:44कुछ देर तक तो बाते हुई लेकिन बाद में
13:47चलो भाई बाते हैं तो बहुत हो गई अब थोड़ा नाश्ता पानी हो जाए
13:52अरे बहु ओ यहाँ आओ
13:55जी बाबा भोलिये
13:58अरे बहु ओ अंकल के लिए नाश्ता लगाओ देखो मौस्तम कितना अच्छा है
14:03एक काम करो चाय के साथ पकोड़े बना देना
14:06बाबा मैं तो चाय बना दूँगी प्रिया पकोड़े अच्छे बनाती है तो पकोड़े वो बना लेगी
14:10तो नो लग मिल कर बना लो और जल्दी से ले आओ
14:14बेटा हम लोग न मसाला चाय पीते हैं तो चाय प्लेन ना बनाना
14:19थोड़ी सी लॉंग थोड़ी सी अधरा काली मिर्चो तेज पता ये चीज डाल कर ही बनाना
14:23और ये सब साबुत ना डालना पीस कर डालना इलाइची भी डाल देना है
14:28जी दनिया नमक और मिर्ची भी ना डाल दूँ
14:31मैंने तो चाय की जमेदारी इसलिए ली थी क्योंकि ये सिंपल होती है लेकिन ये लोग तो बड़ी मेहनत करवा रहे हैं
14:36अब देखो मैं चाय भी ऐसी बनाऊंगी कि लोग मुझसे बनवाने से पहले सोचा करेंगे
14:41शिखा सोच चुकी थी कि वो आज की चाय को खराब करेगी
14:44दोनों बहुए रसोई में आगी जहां अगर प्रिया ने पकोड़े बनाने शुरू किये तो शिखा चाय बनाने लगी
14:50अरे भापी ऐसे मोटा मोटा मसाला मत डालिये उन्होंने पीस कर बोला है
14:54शिखा घुखे में चाय बनाने लगी उसे सिर्फ चाय बनाना ही मुश्किल लग रहा था
15:04बड़ी ही घुखे में बढ़बढाते हुए शिखा ने अपना काम खतम किया
15:08और दोनों बहुए नाश्टे के साथ चाय और पकोड़े भी लगा दिये
15:11पकोड़े तो सभी को पसंद आए लेकिन चाय बेदली से बनी होई थी
15:15चाय किसी को भी अच्छी नहीं लगी और मेहमान ऐसे ही वहां से चले गई
15:19अब रोजाना ऐसे ही सिलसला जाली था
15:21शिखा चालाकी से बस चाय ही बनाती थी
15:24और वो भी अब वो इस तरह से बनाने लगी थी
15:27जो उससे फिर कभी चाय बनाने को बोला ही न जाए
15:30शिखा ने काफी लोगों को बेकार चाय ही बना कर पिलाई थी
15:33और ऐसे ही आज के दिन भी बरसाथ होने की संभाव हो
15:36संड़े का दिन था दोनों बहुँओं के पती घर में थे
15:39उनकी नंद के सहेलिया भी आई होई थी
15:41ऐसे में
15:42भाबी मेरी फ्रेंड्स भी आई होई हैं
15:46भाईया भी आज घर में ही और मौसम भी अच्छा हो रहा है
15:48तो आप दोनों चाए पकोड़े बनाओ ना मज़ा आएगा
15:51बरसाथ मी तो सभी की जबान चटोरी ही हो जाती है
15:54ठीक है सोना हम जाती है बनाने को
15:56मैं तो हमेशा की तरह बस चाए ही बना दूगी
15:58नहीं बहुँओं
15:59जरा रुको शिखा बहुँ
16:01आज तू चाए और पकोड़े दोनों बनाना
16:04और हाँ आज हमें नॉर्मल चाए नहीं
16:06कुलर की चाए पीनी और साथ में आलू, मिर्च और प्यास की पकोड़े
16:09जा जल्दी से बना कर ला
16:10क्यों मा जी
16:12बस मैं ही क्यों
16:15क्यों, जब सिर्फ प्रिया रसोई के काम करती थी
16:18तब ये सवाल नहीं उठा कि सिर्फ प्रिया ही क्यों
16:20मैं कबसे देख रही हूं शिखा कि तू बस अपने हिस्से में आसान काम को ही लेती है
16:25और उसमें भी पूरा नहीं डालती
16:27और अब तो तुझसे वो एक काम भी ना करवाया जाए
16:30इसलिए तू कामों को बिगारने भी लगी है
16:32लेकिन तुझे क्या लगता है कि हम सभी बेवकूस है
16:34नहीं बेटा, बिलकुल भी नहीं
16:36हम तुझसे ज़्यादा समशदार है
16:37अब जा और तू सभी के लिए चाय पकोड़े ला
16:40और हाँ, ध्यान से अच्छे से बनाना कोई कमी हुई
16:43तो दोबारा बनवाऊंगी
16:44शिखा शांती के आगे कुछ नहीं बोल पाई
16:47और वो शांती से चाय पकोड़े बनाने को आ गई
16:49शिखा ने आज रसोई में जीजान से काम किया
17:05उसने कुल्हडवाली चाय बनाई
17:06साथी उसने बहुती करारे करारे पकोड़े बनाई
17:09कुछी दिन में उसका खाना बन गया
17:11जिसको उसने सभी को दिया और
17:13वाह, ये स्वाद है ना मेरी शिखा बहु के हाथों का
17:16पता नहीं क्यों आपने इतने शीरी वाले हाथों का खाना ये भी गारती है
17:20भाबी, चाय और पकोड़ों का तो जवाब ही नहीं है
17:24वाव, वीकेंड हॉलिडे, बारिश और शिखा के हाथों के चाय पकोड़े
17:29सभी का कोई तोड नहीं है
17:32हाँ भाबी, मज़ा आ गया
17:34आपने बहुत ही टेस्टी चाय पकोड़े बनाए है
17:36सभी ने शिखा की बहुत जादे तारिफ की
17:39जिससे शिखा का दिल खुश हो गया
17:41अब उसे समझ भी आ रहा था कि फैमिली के लिए काम करने में खुशी ही मिलती है
17:45आज के बाद से अब शिखाने कभी काम चोरी नहीं की
17:49बलके अब तो वो कामों को बड़े मन से करने लगी थी
17:52और अब सब कुछ ठीक हो चुका था