00:00बहने राखी में क्यों लगाती हैं तीन गांठें?
00:04रक्षबंधन पर क्या रहेगा शुब मुहरत?
00:09राखी की ये रोचक बातें आप नहीं जानते होंगे
00:12श्रवन मस की पूरिमा की पावन सुब है
00:17जब अपनी पूरी आभा के साथ दस्तक देती है
00:20तो अपने साथ लाती है भाई बहन के अटूट प्रेम के उत्सव की आहट
00:26ये दिन होता है रक्षा बंधन का
00:29एक ऐसा पर्व जहां रिष्टे रेशम के कच्छे धागी से बंद कर
00:34चटान के तरहे मजबूत हो जाते हैं
00:38इस साली पवित्र त्योहार नौगस्त शनिवार को मनाया जाएगा
00:42और घरों में इसकी तैयारी की मिठास अभी से घुलने लगी
00:47बाजार रंग विरंगी राखियों से सजे हैं
00:50और हर बहन अपने भाई के लिए सबसे सुन्दर राखी चुन रही है
00:55ये त्योहार सिर्फ एक परंपरा नहीं
00:58बल्कि भावनाओं का एक बैता हुआ समंदर है
01:01जहां बहने अपने भाई की कलाई पर एक धागा नहीं
01:05बल्कि अपनी प्रार्थनाएं, अपना विश्वास और अपनी सुरक्षा का वचन बांधती है
01:11लेकिन इस पूरी रस्म के केंदर में एक गहरा रहस्य छिपा है
01:15जिस पर अक्सर हमारा ध्यान नहीं जाता
01:18राखी की तीन पवित्र गांठें ये महज एक धागे को कसने की प्रक्रिया नहीं
01:24बलकि हर एक गांठ में तुरी देवों की शक्ती और बहन की एक विशेश कामना समाई होती है
01:32जब बहन पूजा की थाली सजाकर अपने भाई के माथे पर तिलक लगा कर उसकी कलाई पर राखी बांधना शुरू करती है
01:40तो वो असल में एक पवित्र अनुष्ठान को पूरा कर रही है
01:44पहली गांठ जब वे बांधती है तो वे शृष्टी के रच्यता भगवान ब्रह्मा को समर्बित होती है
01:52इस गांठ के माध्यम से बहन ये प्रार्थना करती है कि उसके भाई का जीवन हमेशा सकारात्म पूर्चा और नई शुरुवात से भरा रहे ठीक वैसे ही जैसे ब्रह्मा जी ने इस शृष्टी की रच्णा की
02:07इसके बाद आती है दूसरी गांठ जो जगत के पालनहार भगवान विश्णों को अरपित की जाती है इस गांठ में बहन अपने भाई के लिए रक्षा, समरिथी और अच्छे स्वास्थे का आशिरवाद मांगती है
02:22ये गांठ एक तरह से सुरक्षा का कवच होता है जो भाई को जीवन के हर उतार चड़ाव में सुरक्षित रखने का वचन देती है अंत में तीसरी और अंतिम गांठ, संहारत और मोक्षताता, देवों के देव महादेव को समर्पित होती है
02:40ये सबसे शक्तिशाली गांठ मानी जाती है जो भाई को हर बुरी शक्ती, नकरात्मा कूचा और बुरे कर्मों के प्रभाव से बचाने के लिए बांधी जाती है ताकि उसका जीवन, निशकलंक और सफल बने
02:56इस तरह से ये तीनों गांठे महस धागे का बंधन नहीं, ये ब्रह्मा, विश्रू और महेश के दिव्या अशुरवात का एक संगम बन जाती है, जो भाई की कलाई पर सज जाता है
03:10ये प्रेम, विश्वास और सुरक्षा का एक ऐसा तरिकून है, जिसे दुनिया की कोई भी ताकत तोड नहीं सकती, जब बहर इन गांठों को बांधती है, तो वो ना केवल अपने भाई की दीरगायू की काम ना करती है, बलकि अपने रिष्टे की नीव को और मजबूत करत
03:40बांधी जाएगी, तो हर बहन इन तीन गांठों के गहरे अर्थ को याद रखेगी, क्योंकि ये सिर्फ धागे नहीं, बलकि बहन की आस्था और उसके निस्वार्थ प्रेम का एक जिविद प्रतीख है, जो भाई की रक्षा के लिए देवताओं को भी धरती बराने का निम
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