00:00बहुत समय पहले बवन देव की क्रिपा से अंजिना को एक नन्ही पुत्र की प्राप्ती हुई. उसका नाम हनुमान रखा गया. हनुमान एक असाधारण बालक था. वो बहुत ही बहादुर, शक्तिशाली, निर्भीक तथा बुद्धिमान था.
00:20एक दिन भोजन लाने अंजिना वन में गई थी. सोया हुआ हनुमान जाग गया. उसे बहुत भोग लगी थी. उसनी चारों ओर अपनी मा को ढूंडा. किन्तु वो नहीं मिली. खाना ढूंडा, तो वो भी नहीं मिला.
00:40तभी बाहर लगी पेड के पीछी से, उसे लाल-लाल उकता हुआ सूरज दिखा. उसे देखकर हनुमान ने सोचा, ये लाल फल तो बहुत रसीला लगता है.
00:55उचल कर हनुमान ने उसे पकड़ना चाहा. पकड़ में नहीं आने पर, वो उसे पाने आकाश में ओर चला.
01:06सूर्य भगवान ने एक बंदर को तेज गती से अपनी ओर आते देखा. धीरे-धीरे उसका आकार बढ़ता ही जा रहा था.
01:16सूर्य देव डर कर सहायता के लिए पुकारने लगे. पुकार सुनकर इंदरुदेव भागे आए. काले-काले बादल घर गए और सूर्य उसके पीछे छिप गए.
01:29पर हनुमान की तेज गती से सूर्य बच नहीं पाए. उन्होंने सूर्य को निगल लिया और चारों ओर अंधकार छा गया.
01:40इंदर ने हनुमान से सूर्य को छुडाने की बहुत चेश्टा की, पर असफल रहे. क्रोध में आकर उन्होंने अपने वज्र से हनुमान पर प्रहार किया.
01:53घायल होकर हनुमान धर्दी पर गिर पड़े. वज्र के प्रहार से हनुमान के ठुड़ी तोट गई थी और चेहरा फूल गया था. हनुमान का ये हाल देखकर वायू देव कृध्ध हो थे.
02:09वे हनुमान को लेकर पाताल लोग चले गए. वायू का चलना बंध हो गया. पशुपक्षी और मनुश्यू को सास लेना कठिन होने लगा. सभी देवता चिंतित हो थे. वे सभी वायू देव के पास गए. इंद्र ने हनुमान को चोट पहुँचाने के लिए उनसे एक शमा
02:39वायू देव का क्रोच शांद करने का प्रयत्न शुरू कर दिया. उन्होंने हनुमान को भादी-भादी के वर्दान दिये. ब्रम्हा जी ने हनुमान को आशिरवात देते होए कहा. कोई भी शस्त्र इस बालक को नहीं मार पाएगा. वो अपना आकार बदलने में समर्थ हो�
03:09अगनी जला नहीं पाएगी. अंत में इंद्रदेव ने कहा. ये बहादुर बालक चिरन जीवी होगा. हनुमान को इतने सारे वर्दान मिलते देख वायू देव अत्यंत प्रसन्न हो गए. प्रत्वी पर वापस जाने के लिए वे तयार हो गए. सभी जीवन पुनह सांस ले