00:00पौरानिक कता नुसार एक समय अयोध्या में बड़े प्रतापी नहुश राजा राजी की अकरते थे।
00:30उन्होंने भी निश्य किया कि संतान प्राप्ति के लिए वो सुवरत को जरूर करेंगी। लेकिन समय अंतराल में वो भूल गए। समय का चक्र चलता रहा और राणि और उनके सहिली देहत्याकर परलोग चली गए। फिर इनका पश्रू समेत अन्य योनियों में जर्म हुआ �
01:00अता ही बाते यात थी। उसने संतान संतमी का व्रत किया, ज traces उसे आठ शंताने प्राप्त हुए। लेकिन इश्वरी ने इस व्रत को नहीं किया, जिस से वह संजन्व में निह संतान रही। रूहमती के पुत्रों को देख कर इश्वरी को जलन होती और उसने कई बार उन्ह
01:30सुपकी प्राप्ती हुई