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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जापान के बाद चीन दौरे पर रहेंगे...यह यात्रा इसलिए खास है क्योंकि मोदी सात साल बाद चीन की धरती पर कदम रख रहे हैं। अमेरिका के ट्रैरिफ दबाव के बीच भारत-चीन के रिश्तों को सुधरने की नजर से देखा जा रहा है...पीएम मोदी की चीन यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब नई दिल्ली को बीजिंग के साथ वॉशिंगटन की तुलना में कहीं ज्यादा कठिन आर्थिक संतुलन साधना पड़ रहा है। भारत के लिए चीन के साथ व्यापार सिर्फ अर्थव्यवस्था का सवाल नहीं है, बल्कि इसमें रणनीतिक जोखिम, ज्यादा उत्पादन का दबाव और ऐसे पड़ोसी से डील करना शामिल है जिसका राजनीतिक और सैन्य रुख अक्सर भारतीय हितों के खिलाफ रहता है। इसलिए कहा जा सकता है कि चीन से व्यापार आसान नहीं बल्कि चुनौती है...और वो कैसे ये भी देख लीजिए...

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00:00पियम मोदी चीन के दोरे पर हैं लेकिन ये दोरा सिर्फ कूर्टनितिक नहीं है ये भारत के महवेश्य का इम्तिहान भी है एक तरफ अमेरिका जैसा दोस्त है और उसी तरफ चीन जैसा चुनौती पूर्डोजी
00:10सवाल ये है कि क्या भारत चीन से रिष्टे सुदार सकता है या फिर ये रिष्टे और गहरे आर्थिक रौनितिक खत्रे में असा देगी
00:17क्या ये मुलाकात स्वाजेदारी का नया रास्ता खोलेगी या भारत के लिए नई मुश्कलें खड़ी करेगी
00:23आज हम आपको बताएंगे कि क्यों चीन के साथ व्यापार करना उतना असान नहीं है जितना अमेरिका के साथ
00:29और कैसे ये ड्रैगन डिप्लोमेसी भारत की किस्मत तै कर सकती है
00:34नमस्कार मैं हूँ आसिफ इकबाल और आप देख रहे हैं One India
00:37प्रधान मंतरी नरेंद्र मोदी जापान के बाद चीन दोरे पर रहेंगे
00:46ये यात्रा इसलिए खास है क्योंकि मोदी साथ साल बाद चीन की धर्टी पर कदम रख रहे हैं
00:51अमेरिका के टैरिफ दबाव के बीच भारत चीन के रिष्टों को सुधारने की नजर से इसे देखा जा रहा है
00:57पियम मोदी की चीन यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब नई दिल्ली को बीजिन के साथ वाशिंग्टन की तुलना में कहीं जादा कठिन आर्थिक संतुलन साधना पड़ रहा है
01:07भारत के लिए चीन के साथ वियापार सिर्फ अर्थ विवस्था का सवाल नहीं है बलकि इसमें रणनीतिक जोखिम जादा उत्पादन का दबाव और ऐसे पडूसी से टील करना शामिल है जिसका राजनीतिक और सैन रुख अक्सर भारती हितों के खिलाफ रहता है
01:21इसलिए कहा जा सकता है कि चीन से वियापार करना आसान नहीं बलकि चुनौती है और वो कैसे है ये भी देख लीजिए
01:28भारत अमेरिका बनाम भारत चीन वियापार
01:32भारत को अमेरिका से व्यापार में फाइदा होता है
01:35हर साल भारत को अमेरिका के साथ 40 अरब डॉलर से जादा का सर्प्लस मिलता है
01:40यानि हम वहां जादा माल बेशते हैं और कम खरीदते हैं
01:44लेकिन चीन के साथ मामला उल्टा है
01:45चीन भारत को 100 अरब डॉलर का माल बेचता है और भारत से उतना ही माल खरीदता है इससे ट्रेड बैलेंस से बिगड़ता है
01:53अमेरिका के साथ हमारा ट्रेड बैलेंस अच्छा है उधारन के तौर पर जैसे कोई घर का खर्च 10,000 रुपए है और आप 15,000 कमा लें तो 5,000 की बचत होती है लेकिन अगर खर्च 15,000 हो और आपकी कमाई 10,000 हो तो 5,000 का घाटा हुआ चीन के साथ भारत की यही हालत है यानि घ
02:23पादन धाचा बना लिया है कि पूरी दुनिया उसके सस्ते माल पर निर्भर हो गई है आज आपके मोबाइल से लेकर टीवी खिलोने से लेकर कपड़े हर जगें मेड इन चाइना छपा दिखता है यही चीन की ताकत है और भारत की कमजोरी भी भारत की विनिर्माण चनौत
02:53बहुत आगे निकल गया है चीन में हाल के वर्षों में विनिर्माण व्रिभी काफी इस्थिर और उच रही है यह पांच से साथ फीज़ती हर साल की दर से बढ़ रही है आप माल लीजे दो खिलाड़ी दोड़ रहे हैं एक खिलाड़ी हर साल दस कदम बढ़ा रहा है और द
03:23बहुत पर चीन से दूरी बनाने का दबाव डाल रहा है और अगर भारत चीन की तरफ जुका तो ये दबाव भारत पर भी आ सकता है तो यही हाल भारत चीन और अमेरिका के बीच है
03:43चीन की ओवर कैपिसिटी और खत्रा
03:46ओवर कैपिसिटी का मतलब है कि किसी देश की उतपादन शमता उसकी घरेलू मांग से कहीं जादा हो जाना
03:51चीन ने पिछली 20-25 सालों में भारी बरकम फैक्टरियां, स्टील प्लांट्स, इलेक्टोनिक्स, कैमिकल्स और आटो सेक्टर में इतनी शमता खड़ी कर दी है कि वो अपनी जरूर से कई गुना जादा उतपादन कर सकता है
04:02जब घरेलू मांग कम हो जाती है तो ये अतरिक्त माल उसके लिए सिरदर्द बन जाता है इससे निपटने के लिए वो अपना माल दुनिया भर में ढखेल सकता है
04:11अगर भारत में सावधानी नहीं बरती तो हमारा बाजार सस्ते चीनी सामान से भर जाएगा जिससे भारती उद्ध हो गया और जादा कमजोर हो जाएगा
04:20उधारण के तौर पर जैसे बाजार में कोई चीज अचानक आदी कीमत पर मिलने लगे तो ग्राहत वहीं भागेंगे लेकिन उस वज़े से आपके लाके के छोटे दुकानदार बरबाद हो जाएगे
04:28यही चीन का खत्रा है
04:30भारत चीन स्वाभाविक साज़ेदार नहीं
04:34भारत और चीन दोनों बड़ी अर्थ विवस्ताएं हैं लेकिन दोनों के सिस्टम बिल्कुल अलग है
04:38भारत लोकतांत्रिक और निजी शेत्र आधारित है जबकि चीन स्टेट नियंत्रित है
04:42इसके लावा चीन पाकिस्तान का समर्था का है जो भारत का स्थाई दुश्मन है
04:47ऐसे में भरोसे मंद रिष्टे बनाना मुश्किल हो सकता है
04:50भारत का आगे क रास्ता क्या है
05:06भारत के लिए असली चुनोती चीन से मुकाबला करना है ना कि उसके आगे जुकना
05:10चीन के वल एक ट्रेड पार्टनर नहीं है बलकि भारत का रणनीतिक प्रतिद्वन्दी भी है
05:15चुनोती सिर्फ व्यापार घाटे की नहीं है बलकि ये भी है कि भारत कहीं सस्ते चीनी सामान पर निर्भर न हो जाए
05:21अगर भारत जुकता है तो उसकी आर्थिक स्वतंतरता और रणनीतिक आजादी दोनों खत्रे में पढ़ सकती है इसके लिए जरूरी है आत्म निर्भर भारत निजी शेत्र को मजबूती देना और लोगतांतरिक देशों के साथ मजबूत साज़ेदारी बनाना
05:37तो सवाल ये है क्या भारत चीन के इस आर्थिक और रणनीतिक जाल से अपने को दूर रख पाएगा क्या हम चीन के सस्ते माल के समंदर में डूबेंगे या फिर अपने युवाओं अपने बाजार और अपनी शमिता के दम पर नया इतिहास निखेंगे
05:50आने वाला वक्त ये टै करेगा कि भारत सिर्फ एक बड़ी अर्थ विवस्था बनेगा या एक सच्ची वैश्विक शक्ती फिलाल के लिए इतना ही देखते रहें वान इंडिया
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