00:00बात कितनी ही बढ़ जाए लेकिन रास्ता तो टेवल पर बैट करी निकलता है
00:04तो हम बातों को बहुत बिगड़ने से पहले अगर समभलने की कोशिश करें
00:10और समवात का स्लसला खतम न
00:19और ये तो आपसी सोहाट को बिगाडने का एक शड्यमत रथा
00:24इश्ख हो जाए किसी से कोई चारा तो नहीं
00:27सिर्फ मुस्लिम का मुहम्मद पर जारा तो नहीं
00:34मुझे तो ताज्जुब है
00:36कि अगर मैं इसे चिंगारी भी कहूं
00:42तो ये छोटी सी बात इतना बड़ा शोला कैसे बन गई
00:46अगर जिला इंतिजामिया चाहता
00:50तो बाचीज से हल हो जाता मसला
00:56क्योंकि बहरहाल बात कितनी ही बढ़ जाए
01:01लेकिन रास्ता तो टेबल पर बैटकर ही निकलता है
01:04आप पूरी जंगों के फैसले देख लीजे
01:06फरस्ट वर्ड वार का नतीजा देख लीजे
01:09सेकिंड वर्ड वार का नतीजा देख लीजे
01:11आधी दुनिया जिसमें मारी जा चुकी थी
01:14उसमें जब संधी और समझोता हुआ
01:17तो टेबल पर बैटकर ही हुआ अच्छे माहौल में हुआ
01:21तो हम बातों को बहुत बिगड़ने से पहले
01:25अगर संभालने की कोशिश करें
01:28और समवाद का सिलसला खतम न करें
01:31बाचीत का सिलसला
01:33मसले को हल करने का सिलसला
01:35तो खतरनाक से खतरनाक मसले का हल निकारा जासकता है
01:39और ये तो
01:42आपसी सौहार्थ को
01:45बिगाडने का एक शड़ियंत रथा
01:48और
01:49जाहिर है अगर कोई किसी से
01:51महबत करता है वो कोई हो
01:53तो महबत करना तो उसका अख्तियार है
01:56उसका पैदाईश ही हख है
01:58मुझे तो इस वक्त याद आ रहा है
02:02कौर मेहनदा सिंग
02:03बेदी सहर का
02:12किसी से
02:13कोई चारा तो नहीं
02:16इश्ख हो जाए
02:18किसी से
02:19कोई चारा तो नहीं
02:22सिर्फ मुस्लिम का महम्मद
02:24पर जारा तो नहीं
02:25तो हमें
02:28लाना पड़ेगा इस एसास
02:30को वापस
02:30वो सिख थे
02:32सरदार थे
02:34लेकिन क्या कहे गए
02:37जो बुजर्ग होते है
02:39जो मजभी पेशवा होते है
02:43वो इस लिए मजभी पेशवा होते है
02:45क्यों किसी एक मजभ के
02:47नहीं होते है
02:47वो मशल रह बनके आते हैं
02:50इंसानियत के लिए
02:51हर धर्व हर मजभ के लिए
02:54हम उने महदूद नहीं कर सकते हैं
02:57हम उनके नाम पर
02:58कोई बिगाड खड़ा नहीं कर सकते
03:03लेकिन ये वसूल लागू सिर्फ एक
03:06धारंग एक मज़भ पर नहीं होता है
03:09तमाम धर्म और
03:10तमाम मज़भ अपर लागू होता है
03:12ऐसा नहीं कि हम अपने लिए
03:15तो मीठा मीठा तैकर ले
03:17और दूसरे के लिए कड़वा ना
03:28नहीं है दिये रोशन होते है
03:32वो लोग जो दिये जलाते है
03:35वो कुछ भी जला सकते है
03:37लेकिन जो लोग दिये रोशन करते है
03:41उनका मकसद सिर्फ
03:44उजाला देना होता है
03:45ठंड़क देना होता है
03:47नफरतों के अंधेरे को मिटाना होता है
03:50वही लोग मेरे लिए काबिल कदर है
03:53और मैं उनकी सराना भी करता हूँ
03:56उनसे महबत करता हूँ