00:00अशांत 1993 में रिलीज हुई एक भारतिय एक्षन फिल्म है जिसका निर्देशन केशु रामसे ने किया था
00:07यह फिल्म देश में शांती और कानून दिवस्था स्थापित करने के लिए पुलिस बलके अथक प्रयासों की कहानी है
00:14फिल्म में दो प्रमुख पुलिस अधिकारियों की कहानी को दर्शाया गया है जो देश की सुरक्षा के लिए एक बड़े माफिया नेटवर्क से लोहा लेते हैं
00:24फिल्म की स्टार कास्ट बहुत दमदार थी जिसमें दक्षिन भारतिय सिनेमा के दिगज अभिनेता विश्नुवर्धन के साथ बॉलिवुड के एक्शन स्टार अक्षय कुमार मुख्य भूमिका में थे
00:35उनके साथ मम्ता कुलकर्णी और अश्विनी भावे ने नायकाओं की भूमिका निभाई जबकि आशुतोष राना और पंकज धीर जैसे कलाकारों ने सहायक और महत्वपूर्ण भूमिकाए निभाई
00:47यहाँ फिल्म मुख्य रूप से दो कर्तव्यनिष्ट पुलिस अधिकारियों के इर्दगिर घूमती है जिनका एक मात्र उद्देश्य देश में व्याप्त अशान्ती को समाप्त करके शान्ती लाना है
00:58एसीपी विश्नु विश्नुवर्धन बैंगलोर पुलिस में कार्यरत वह एक गंभीर अनुगवी और न्यायप्रिय अधिकारी हैं
01:07वह स्थानिय स्तर पर माफिया के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हैं
01:12एसीपी विजय अक्षय कुमार बंबई अब मुंबई पुलिस में कार्यरत वह एक युवा साहसी और निडर अधिकारी हैं
01:21वह अपने तेज तर्रार अंदास के लिए जाने जाते हैं
01:25यह दोनों अधिकारी हाला की अलग-अलग शहरों में काम करते हैं
01:30लेकिन उनका शत्रू एक ही है एक दुरदान्त माफिया जो नकली करिंसी नोट छापने के अवैध धंधे में लिप्त है
01:36यह नकली मुद्रा का धंधा देश की अर्थव्यवस्था और राष्ट्रिय सुरक्षा के लिए एक गंभीर खत्रा बन चुका है
01:44यह खतरनाक माफिया गिरोह बैंधलोर से संचालित होता है जिसके दो मुख्य सर्गना है
01:51काका, जै कलगतकर माफिया का एक मुख्य डौन
01:55राना, पुनीत काका का साथी और दूसरा प्रमुख डौन
02:00यह दोनों मिलकर नकली नोटों के इस कारोबार को चला रहे हैं
02:05एसीपी विश्णू के नेतरित्व में बैंधलोर पुलिस का उन पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है
02:11जिससे उनका धंधा चलाना मुश्किल हो जाता है
02:14पुलिस के बढ़ते शिकंजे से बचने के लिए
02:17काका और राणा अपनी गतिविधियों का केंदर बैंधलोर से बदल कर देश की आर्थिक राजधानी बंबई ले जाने का फैसला करते हैं
02:26जैसे ही यह माफिया जोडी बंबई में प्रवेश करती है
02:29एसीपी विजय अपनी तेज निगरानी और कारवाई के दमपर राणा को पकड़ने में काम्याब हो जाते हैं और उसे गिरफतार कर लिया जाता है
02:38विजय राणा से पूछताच करके इस पूरे नकली नोट रैकेट की जड़ों तक पहुँचना चाहता है
02:44हालांकि विजय की जाँच जल्द ही बाधित हो जाती है
02:49द्रह मंत्राले से सीधे आदेश आता है कि राणा को बंबई पुलिस की हिरासत से निकाल कर बैंडलोर कोर्ट में स्थानांतरित किया जाए
02:58इसका कारण यह था कि राणा के खिलाफ बैंडलोर में कई गंभीर और पुराने मामले दर्स थे
03:04यह आदेश विजय के लिए एक जटका था क्योंकि वह बंबई में ही इस रैकेट का परदाफाश करना चाहता था
03:12राणा को बैंडलोर ले जाया जा रहा है
03:15यह जानकर ACP विजय अपने दोस्त और सहयोगी ACP अमित पंकजधीर के साथ मिलकर उसे दोबारा गिरफतार करने की योजना बनाता है
03:24उन्हें यह लगता है कि अगर राणा बैंडलोर पहुँच गया तो स्थानिय प्रभाव के चलते वह कानून की गिरफ्ट से बच सकता है
03:33इस मिशन के लिए विजय और अमित ACP विशनू से मिलते हैं जो इस समय राणा के केस के प्रभारी है
03:40विशनूक देशभक्त और न्याय में विश्वास रखने वाले अधिकारी होने के नाते उन्हें इस काम की इजाज़त दे देते हैं
03:49हालांकि उनकी दो शर्ते होती हैं
03:53विजय और अमित अपने मिशन में पुलिस की वर्दी का इस्तिमाल नहीं कर सकते
03:58वे किसी भी हथियार का उप्योग नहीं करेंगे
04:01इन शर्तों को स्वीकार करते हुए विजय और अमित निजी तोर पर राणा को पकड़ने के मिशन पर निकल पड़ते हैं
04:09कहानी में एक निजी और भावनात्मक मोर कब आता है जब ACP विशनु की पतनी अनिता, अश्विनी भावे और ACP विजय के बीच के पुराने संबंध सामने आते हैं
04:22विशनु की पतनी अनिता और विजय पहले प्रेमी प्रेमी का रह चुके थे
04:26उनके संबंध तूटने की मुख्य वजय अनिता के पिता, घोट पूर्व मुख्य मंतरी निरंजन दास थे
04:33निरंजन दास ने अपनी बेटी की शादी एक साधारन पुलिस अधिकारी से करने से साफ इंकार कर दिया था
04:40इसके अलावा निरंजन दास ने विजय से बदला लेने के लिए उसकी बहन रितू जो एसीपी अमित की पत्नी थी की हत्या करवा दी थी
04:49इस भयानत बदले की कारवाई से विजय पूरी तरह तूट गया था
04:54बदले में एसीपी विजय ने अपनी पुलिस शक्ती का उप्योग करते हुए निरंजन दास पर इतना दबाव डाला की उन्हें मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा देना पड़ा
05:04इस पूरे घटनाक्रम के बाद अनीता ने भी यह शपत ली थी कि वह केवल एक पुलिस अधिकारी से ही शादी करेगी और इसी वजह से उन्होंने एसीपी विश्नु से शादी की
05:15इस बीच माफिया गिरोह के अंदर भी दरार आ जाती है
05:20राणा गिरफतारी से छूटने के बाद अपने पुराने साथी काका से अलग हो जाता है और अपना खुद का माफिया गिरोह बनाता है
05:29समय के साथ राणा का गिरोह अधिक शक्तिशाली और निर्देई हो जाता है
05:35स्थिती की गंभीरता को देखते हुए
05:38एसीपी विजय और एसीपी अमित अब आधिकारिक तौर पर एसीपी विश्णू के साथ मिलकर एक सन्युक्त टीम बनाते है
05:45उनका लक्ष अब केवर राणा को पकड़ना नहीं बलकि काका को भी नश्ट करना है
05:52इस टीम में एक और महत्वपूर्ण सदस्य शामिल होती है
05:56सोनाली ममता कुलकरणी जो काका के होटल में एक डांसर है
06:00सोनाली माफिया की अंदरूनी जानकारी रखने वाली इन तीनों पुलिस अधिकारियों की मदद करने का फैसला करती है
06:08जब पुलिस अधिकारी अपनी एकता से माफिया के लिए बड़ा खत्रा बन जाते हैं तो काका एक घा तक चाल चलता है
06:17वह विश्नु और विजय के बीच गलत फमी पैदा करने की कोशिश करता है ताकि उनकी एकता तूट जाए और उनकी शक्ती विभाजित हो जाए
06:26काका की साजिश काम्याब होने लगती है
06:30विश्नु को यह शक होने लगता है कि उसकी पत्नी अनीता और विजय के बीच अवैद संबंध है
06:37यह संदेह की आग धीरे-धीरे बढ़ती है जिससे तीनों अधिकारियों के बीच तनाफ पैदा होता है और उनके मिशन पर खत्रा मंदराने लगता है
06:48जब शक अपने चरम पर पहुँच जाता है तब ACP अमित बीच बचाव करते हैं
06:54वह विशनु के सामने सच्चाई सपष्ट करते हैं और उन्हें समझाते हैं कि उनके और विजय के बीच कोई अनुचित संबंध नहीं है और यह सब काका की चाल है
07:05अमित की कोशिशों से विशनु और विजय के बीच की गलत्व में दूर हो जाती है
07:10दोनों पुलिस अधिकारी एक बार फिर पक्के विश्वास और एकता के साथ एक दूसरे से हाथ मिलाते हैं
07:18वे जानते हैं कि अब उन्हें निजी भावनाओं को किनारे रखकर देश के लिए लड़ना होगा
07:24अपनी सन्युक्त शक्ती का प्रदर्शन करते हुए वे राना और काका के दोनों माफिया गिरोहों पर जोरदार हमला करते हैं
07:33अंत में पुलिस बल दोनों माफिया सरगनाओं को पूरी तरह से समाप्थ करने में सफल होता है
07:38राना और काका का सामराज जननश्ट हो जाता है और देश में शांती की बहाली होती है
07:45हालांकि इस जीत की भारी कीमत चुकानी पड़ती है
07:49इस लड़ाई में उनका प्रियमित्र और बहादुर अधिकारी एसीपी अमित शहीद हो जाता है
07:56फिल्म इस बात पर जोर देती है कि शांती की स्थापना और कानून का राज स्थापित करने के लिए पुलिस अधिकारियों को कितना बड़ा बलिदान देना पड़ता है
08:06अशांत एक ऐसी कहानी है जो कर्तव्य प्रायंता बलिदान और व्यक्तिगत प्रतिशोध के बीच उल्जे पुलिस अधिकारियों के जीवन को दर्शाती है