00:00फिल्म धम्मा साल डोसाजनगीस माइव में रिलीज हुई एक रोमांटिक कॉमेडी हॉरर फिल्म है
00:10इसे निर्देशत किया है अदित सर्पोतर ने और कहानी लिखी है नीरन भट सुरेश मैथ्यू और अरुन फलारा ने
00:17फिल्म के मुख्य किर्दार है आयुश्मान खुराना, रश्मिका मंदाना, नवाजदीन सिदीकी और पड़ेश रावल
00:24फिल्म का म्यूजिक दिया है सचिन जिगर की जोडी ने
00:27ये फिल्म दिवाली के मौके पर डिवड अक्टूबर 2000 यूसमाइस को रिलीज हुई थी
00:32ये फिल्म मैडॉक हॉरर कॉमेडी यूनिवर्स की पांचवी फिल्म है
00:37जिसमें डर हनसी और प्यारतीनों का जबरदस्त मेल है
00:41कहानी की शुरुआत होती है आलोक गोयल नाम के एक पत्रकार से
00:45आलोक एक डरपोक लेकिन दिखावे में बहादूर आदमी है
00:49वह हमेशा अपने आपको बहादूर बताता है ताकि लोग उसका मजाक नोड़ाएं
00:54वह दिली में काम करता है और एक दिन किसी खबर की तलाश में एक जंगल में पहुँच जाता है
00:59वहीं से फिल्म की असली कहानी शुरू होती है जंगल में आलोक रास्ता भटक जाता है
01:05चारो तरफ अंधेरा मने अजीब आवाजेंग और डरावना माहौल होता है
01:10तब ही अचानक उस पर एक भालू हमला करने आता है
01:12आलोक अपनी जान बचाने के लिए भागता है लेकिन भालू उसके बहुत करीब पहुच जाता है
01:17उसी वक एक रहसेमी औरत आती है और आलोक को बचा लेती है
01:22उसका नाम है ताड़का
01:24वह बहुत सुन्दर लेकिन रहसेमी और अलक सी लगती है
01:28उसकी आँखों में कुछ अंजाना सा रहसे चलगता है
01:31धीरे धीरे पता चलता है कि ताड़का कोई आम लड़की नहीं है
01:34वह एक बेताल है
01:36यानि एक ऐसी बराणी जो इसन नहीं लेकिन इसन जैसा दिकता है
01:41पुराने जमाने में ये बेताल लोग इसनों का खून पीते थे
01:45लेकिन वानिया इस्वाराजी सेटे सेबन के भारत वे भाज़न के समय
01:48इनसानों की खुरूरता देखी और तैय किया कि अब वे कभी इनसानों का खून नहीं पिएंगे
01:53उनके समाज ने एक नियम बनाया कि अब किसी भी बेताल को इनसान को नुकसान नहीं पहुचाना है
01:59उनके बीच एक नेता था यक शासंग जिसने इस नियम का विरोध किया
02:18तार्का अलोग को जंगल से सुरक्षित निकालने की कोशिश करती है।
02:22वहाँ उसे वापस दिली पहुंचने में मदत करती है।
02:24जब वह जाने लगती है तो अलोग कहता है कि उसे अकेले नहीं जाना चाहिए।
02:29बहुत मनाने पर वहाँ भी उसके साथ दिल लिया जाती है
02:32वहाँ पहुंचने पर अलोक के माता पिता उसे देखकर चौंक जाते हैं
02:37उन्हें ये लड़की बहुत अजीब लगती है
02:39तार्का को वे तारिका बुलाने लगते हैं ताकि पडोजी सवाल नं करें
02:43लेकिन आलोक के पिता को उसकी मौजूदगी पर हमेशा शक रहता है
02:49तार्का धीरे धीरे आलोक के परिवार के साथ घुलने मिलने की कोशिश करती है
02:53लेकिन उसे सामानी खाना पसंद नहीं आता
02:56उसे कुछ अलग चाहिए होता है
02:58अलोक सोचता है कि शायद उसे बाहर का खाना पसंद आए
03:02तो वह उसे एक पार्टी में लेकर जाता है जहां सब नौन वेज खाना खाते है
03:06वहां ताड़का पहली बार खुले माहौल में आती है और थोड़ी शराब भी लेती है
03:11शराब की नशे में वह अजनबी लोगों के साथ डांस करने लगती है
03:16जिससे अलोक को थोड़ी शर्म आती है लेकिन वह कुछ नहीं कहता
03:20पार्टी खत्म होने के बाद दोनों घर लोट रहे होते हैं
03:24तभी वही लोग जो पार्टी में थे गाड़ी रोक कर तार्का से बत्तमीजी करने की कोशिश करते हैं
03:30आलोक उनसे बात करके मामला शांत करने की कोशिश करता है लेकिन वह काम्याब नहीं होता
03:36तभी तार्का असली रूप दिखाती है
03:38उसकी आँखें लाल हो जाती हैं दांत लंबे हो जाते हैं और वह बेताल बन जाती है
03:44वह उन लोगों पर हमला करती है लेकिन उन्हें मारती नहीं बस डरा कर छोड़ देती है
03:49मगर बाद में वे सब यक्षासन के अन्वियाईयों के हाथों मारे जाते हैं
03:54कुछ दिनों बाद एक सीनियर पुलिस अफसर आलोग के घर आता है
03:58वह खुद भी एक पिताल होता है
04:01उसे लगता है कि तार्का ने उन लोगों की हत्या की है
04:03वह आलोक को चितावनी देता है कि अगर तारका यहीं रही तो आलोक के लिए खत्रा बढ़ सकता है
04:09डर के मारे तारका शहर छोडने का फैसला करती है
04:13जब वह बस से जा रही होती है तो आलोक उसे रोकने के लिए भागता है
04:18रास्ते में एक हादसा हो जाता है और आलोक की कार पलट जाती है
04:22वा मरने की हालत में होता है
04:24तारका उसे बचाने के लिए मजबूर होकर उसे काट लेती है और उसका खून पीती है
04:29इससे आलोक खुद एक बेताल बन जाता है
04:31जैसे ही आलोक का रूप बदलता है यक्षासन को इसका इहसास हो जाता है
04:37वह खुश होता है क्योंकि अपनी गुफा की कैद से निकल सकता है
04:41क्योंकि नियम था कि अगर कोई बेताल किसी इनसान को बदल दे
04:44तो उस बेताल को सजा के तौर पर कैद किया जाएगा
04:47यक्षासन जानता है कि अब ताड़का को उसकी जगह गुफा में बंद किया जाएगा
04:53और वह आजाद हो जाएगा
04:54अब आलोक एक नए जीवन में प्रवेश करता है
04:58उसे अपनी नई शक्तियों को समझना होता है
05:01तेज सुनना, उड़ना और इनसानी खून की प्यास को रोकना
05:05ताड़का उसे सब सिखाती है
05:07दोनो एक दूसरे के करीब आते हैं
05:09लेकिन आलोक का पिता उसकी बदलती शकल देखकर डर जाता है
05:13उसे अपने बेटे के दांत और आंखें अजीब लगती है
05:16जब उसे सच्चाई पता चलती है कि उसका बेटा अब इनसान नहीं रहा
05:20तो आट टूट जाता है
05:21वह एक तांतरिक प्रभाकर के पास जाता है जो बुरी आत्माओं को भगाता है
05:27प्रभाकर कहता है कि आलोक की हालत अब बदली नहीं जा सकती
05:30वहीं प्रभाकर के पास एक और आदमी आता है जनारदनुर्फ जना
05:35वह अपने कजिन भासकर के लिए मदद मांगता है भासकर एक वेर वुल्फ है यानि आधा इनसान आधा भेडिया
05:42वह एक सरकटा नाम के सिरकटी राक्षस से लड़ते हुए बुरी तरह खायल हो गया है
05:48प्रभाकर कहता है कि उसे ठीक करने के लिए सिर्फ बेताल के खून की जरूरत है
05:52भासकर आलोग को डूनता है और दोनों के बीच जबरदस्त लराई होती है
05:57इस लड़ाई में भासकर आलोग के खून की एक बून्द पा लेता है
06:01और उससे उसकी शक्तियां कई गुना बढ़ जाती है
06:03वहाँ आधा बेताल आधा वेरवुल्फ बन जाता है
06:07एक बहुत ही शक्तिशाली रूप
06:09आलोग बुरी तरहाईल होता है
06:11लेकिन अभी ताड़का आकर उसे बचा लेती है
06:14दोनों यश्वनती आधवनाम के एक बेताल के पास आते हैं
06:17जोगहता है कि वह उन हैं सुरक्ष तरखेगा
06:19लेकिन यह सब एक जाल होता है दो
06:21और बाकी बेतालोग आलोग को नशे में डाल देते हैं
06:23और ताड़का को घेर लेते हैं
06:26वे खते हैं कि उसने अपने समाजका नियम तोड़ा है
06:28और उसे अब सजा में लेगी
06:29ताड़का खुद को समर्पित कर देती है
06:31और कैद में चली जाती है
06:32अब आलोक अकिला रहा जाता है लेकिन वहार नहीं मानता
06:36वह बेत आलोकी उस जगह पहुंचता है
06:37जहां यक्षासन बन था
06:39वहाँ दोनों में जबरदस्त लड़ाई होती है
06:41यक्षासन बहुत ताकत वर होता है
06:43और आलोक को बुरी तरह गाय ले देता है
06:45जब आलोक को मारने होता है
06:47तभी देवी की किर्पा से एक चमतकार होता है
06:50आलोक फिर से जिन्दा हो जाता है
06:52और उसे देवी का धरकता हुआ दिल मिलता है
06:54इस दिल की शक्ती से आलोक को देवता जैसी ताकत मिल जाती है
06:59वा यक्शासन को हरा कर उसे फिर से गुफा में कैद कर देता है
07:02अब अलोक नया निता बन जाता है
07:05जो बेतालों को इनसानों से दूर रखेगा और दोनों के बीच शांती बनाएगा
07:09लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती
07:12अचानक सरकटा फिर से लौट आता है और यक्शासन को अजाद कर देता है
07:16अब फिर से बेतालों और राक्षसों के बीच जंग छिड़ जाती है
07:22फिल्म के आकिरी हिस्से में आलोक, ताडगा और बाकी बेतालनेता मिलकर यक्शासन को रोखने की तयारी करते हैं
07:30अलोग को बताया जाता है कि अक्षासन को हराने के लिए उसे और शक्तिशाली बनना होगा और इसके लिए उसे वेर वुल्फ के खून की जरूरत पड़ेगी।
07:38उधर भासकर जो अब एक शक्तिशाली वेर वुल्फ बन चुका है सीधे बेताल मंदिर की ओर बढ़ता है।
08:00जैसे दोनों जानते हैं कि अब असली लड़ाई शुरू होने वाली है।
08:04ये फिल्म डर, प्यार और कॉमेडी का एक अनोखा मिश्रन है।
08:08कहानी दिखाती है कि इनसान और राक्षस में फर्क सिर्फ खून का नहीं बलकि दिल का होता है।
08:14तारका और आलोक का रिष्टा बताता है कि प्यार, जाती, रूप या ताकत नहीं देखता।
08:19अगर दिल सच्चा है तो वो सबसे बड़ा इंसान है, चाहे वो बिताल ही क्यों नहो।
08:24फिल्म के गाने और बैक ग्राउंड म्यूजिक भी कहानी को और दिल जस्प बनाते हैं।
08:29कभी डर का माहौल होता है, कभी हंसी के पल और कभी इमोशनल सीन सब कुछ बहुत संतुलित लगता है।
08:35आयुश्मान खुराना और रश्मिका मंदाना की जोड़ी कहानी में जान डाल देती है।
08:40नवाज उद्दीन सिद्दीकी का किरदार रहसेमी और शक्तिशाली लगता है, जबकि परेश रावल फिल्म में अपने खास अंदाज से हासी लाते हैं।
08:50आखिर में धंमा सिर्फ हॉरर नहीं, बलकि प्यार और इंसानियत की कहानी है।
08:55ये दिखाती है कि अगर इंसान के अंदर अच्छाई जिन्दा है, तो कोई भी अंदकार उसे हरा नहीं सकता।
09:01प्यार और विश्वास की ताकत सबसे बड़ी होती है, चाहे सामने बिताल ही क्यों नहों।
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