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  • 11 months ago
Sthal is a 2023 Indian Marathi-language drama film written and directed by Jayant Digambar Somalkar and produced under the banner of Dhun Productions while it is presented by Sachin Pilgaonkar. It stars Nandini Chikte in the lead role. The film explores the tradition of arranged marriage in rural India, where a girl's marriage takes precedence over basic survival. Told from the perspective of a young girl, Savita, Sthal highlights deep-rooted patriarchy and the harsh realities, including humiliation and societal pressures, faced by Indian brides.
Transcript
00:00फिल्म स्टाल एक माराथी भाषा की ड्रामा फिल्म है जिसे 12,23 में निर्देशक जैंत दिगंबर सोमालकर ने बनाया
00:08ये उनकी पहली फिल्म है और इसे दून प्रोडक्शन्स ने बनाया जबकि इसे सचिन पिलगामकर ने प्रस्तुत किया
00:15फिल्म में नंदिनी चिक्टे मुकी भूमिका में है
00:18यहा कहानी भारत के ग्रामीन इलाकों में होने वाली अरेंज मैरिज
00:22यानि तैशुदा शादी की परंपड़ा पराधारित है
00:24जहां एक लड़की की शादी उसके जीवन और सपनों से भी ज्यादा जरूरी मानी जाती है
00:30फिल्म में दिखाया गया है कि किस तरह समाज में पितर सत्ता गहराई तक जमी हुई है
00:36और लड़कियां आज भी अपमान और दबाव जिलती है
00:40कहानी एक लड़की सविता की नजर से दिखाये गई है
00:43फिल्म सेवन मार्च डोजन वजीजिसपाइस को अंतराष्टरी महिला दिवस पर रिलीज हुई थी
00:49इसे दर्शकों और आलोचकों दोनों ने बहुत सराहा
00:52खासकर इसके निर्देशन एक सची कहानी और कलाकारों के नैचरल अभिनय की खूप तारीफ हुई
00:58नंदिनी चिक्टे और तरनात खिराटकच के अभिनय को बहुत पसंद किया गया
01:04कहानी महराश्टर के एक छोटे से गाव डोंगर गाव की है
01:07यहां की लड़की सवितावंधारे अपने छोटे से घर में अपने परिवार के साथ रहती है
01:12सविता एक होशियार और समझदार लड़की है
01:15उसका सपना है कि वह अपनी पढ़ाई पूरी करे और आगे बढ़े शायद कोई नौकरी करे या अपने पैरों पर खड़ी हो
01:21लेकिन उसका परिवार खासकर उसका पिता दौलत रावंधारे कुछ और ही सोचता है
01:27वह एक संगरशरत कपास किसान है जो अपने खेतों से जैसे तैसे गुजारा कर रहा है
01:32समाज के लोग और रिष्टेदार बार बार उसे कहते हैं कि अब उसकी बेटी बड़ी हो गई है उसकी शादी कर दो
01:40समाज में ये माना जाता है कि लड़ी की शादी सबसे जरूरी काम है चाहे पड़ीवार के पास पैसे हो यान हो
01:46सविता का पिता भी ही सोचता है कि अगर वह जल्दी शादी नहीं करेगा तो लोग बाते बनाएंगे
01:52उसे डर है कि उसकी बेटी घर में बैठी रहेगी तो समाज उसे और उसके पड़ीवार को नीचा दिखाएगा
01:57धीरे धीरे वह अपनी बेटी की पड़ाई को निजर अंदाज करके उसके लिए रिष्टा डूडने लगता है
02:01फिल्म बहुत ही सच्चाई से दिखाती है कि गावों में शादी के नाम पर लड़कियों के साथ कितना अपमान और भेदभाव होता है
02:09हर बार जब कोई लड़के वाला परिवार समिता को देखने आता है
02:12तो एक जैसा दृश्य होता है
02:14सविता को एक छोटी सी स्टूल पर बैठाया जाता है
02:17सब की नजरें उस पर टिकी रहती है
02:19कोई उसकी रंगत पर टिपपनी करता है
02:22कोई कहता है लंबाई थोड़ी कम है
02:24कोई जात पूछता है
02:25लेकिन किसी को भी ये जानने में दिल्जस्पी नहीं होती कि सविता के सपने क्या है
02:31वा क्या बनना चाहती है, उसे जिन्दगी से क्या चाहिए
02:34सब कुछ बस बाहरी दिखावे और परमपरा पर ठिके है
02:38उसकी माँ और घर की बाकी औरतें कुछ नहीं क्या पाती
02:41वे बस खाना परोस्ती है
02:43चुपचाप खोने में बैठ कर सब देखती है
02:46मानो उनके पास कोई अधिकारी नहीं
02:48सविता हर मुलाकात में अपने मन को मजबूत करती है
02:51पर अंदर से वे टूटी जा रही होती है
02:54इसी बीच सविता अपने कॉलेज में थोड़ी राहत महसूस करती है
02:57वहाँ उसका एक अधियापक है जो महिलाओं की अधिकार और समानता पर पढ़ाता है
03:02उसकी बातें सविता को बहुत प्रभावित करती है
03:05उसे लगता है कि शायद दुनिया में बदलाव संभव है
03:09वहाँ उस अधियापक के साथ कोई प्रेम संबंद नहीं रखती
03:13लेकिन उनके बीच एक चुपचाप समझदारी का रिष्टा बन जाता है
03:17एक ऐसा रिष्टा जिसमें कोई शब्द नहीं बस सोच का मेल है
03:21लेकिन जब वह घर लोटती है तो हकीकत बहुत कठोड लगती है
03:25घर में उसकी शादी का दबाव बढ़ता जा रहा होता है
03:29उसका पिता अब इतना परेशान हो जाता है कि वह अपनी जमीन बेचने तक का सोच लेता है
03:35ताकि अपनी बेडी की शादी की ये पैसे जुटा सके
03:37उसे लगता है कि शादी ही उसकी बेडी की इज़त और भविश्या है
03:42सविता की माँ अंदर से दुखी है लेकिन कुछ नहीं कह पाती
03:45वह भी समाज के डर में बंधी हुई है
03:48सविता का भाई मंग या भी चाहता है कि उसकी बेहन की शादी जल्दी हो जाए
03:53ताकि वह अपनी प्रेमिका को घर में बता सके
03:55उसे लगता है कि जब बेहन की शादी हो जाएगी
03:59तो वह अपने प्यार के बारे में खुल कर बात कर सकेगा
04:02यानि हर कोई अपने स्वार्थ में लगा है और कोई भी सविता की भावनाओं को नहीं समझता
04:07हर नए रिष्टे के आने पर सविता का मन और ठकने लगता है
04:11हर बोसे जांचने पढखने का सलसिला चलता है
04:16जैसे वह कोई वस्तु हो
04:17कोई उसकी आँखों में नहीं देखता बस उसके चेहरे और शरीर को देखता है
04:22यह सब देखकर दर्शक का दिल भारी हो जाता है
04:25फिल्म सविता के जरीए बताती है कि भारत के गामों में आज भी शादी को ही लड़की की मनजिल माना जाता है
04:32चाहे वह लड़की पड़ी लिखी हो या नहीं चाहे उसके सपने कुछ भी हो
04:36कहानी के आगे बढ़ने के साथ सविता की हिम्मत कम नहीं होती
04:40परसिते से विरोध करना चाहती है लेकिन उसे कोई रास्ता नहीं दिखता
04:45समाज का दबाव, पिता की उमीदें और अपने भविश्य की चिंता सब मिलकर उसे एक जाल में बात देते हैं
04:52फिल्म बहुत ही शांत और वास्तविक तरीके से दिखाती है कि किस तरह एक लड़की को सिर्फ उसके रंग, जात और रूप से आंका जाता है
05:00एक साधारन लड़की के जीवन की ये कहानी पूरे भारत की लाखो लड़कियों की हकीकत बन जाती है
05:06कई बार सविता सोचती है कि अगर वा पढ़ाई पूरी करे और खुद का कुछ करे, तो शायद वा अपने पिता का बोज भी हलका कर सके
05:15लेकिन समाज की परंपरा इतनी मजबूत है कि कोई उसे ये सोचने का मौका नहीं देता
05:20एक दिर्शी में जब एक अमीर परिवार सविता को देखने आता है, तो वे लोग दहेज की बात करते है
05:26पिता का चेहरा जुग जाता है, उसे समझ नहीं आता कि बेटी की शादी इजद की बात है या व्यापार की
05:33यही वह पल है जब फिल्म दर्शकों के दिल को छूती है
05:37फिल्म में ये भी दिखाया गया है कि गाव में औरतों को किस तरह शादी के लिए तैयार की गई चीज माना जाता है
05:43कोई उनकी राए नहीं पूछता, बस उनके लिए फैसले किये जाते है
05:48धीरे धीरे सविता का मन विद्रोह करने लगता है
05:51वह सोचती है कि क्या ये जिन्दगी जीने लायक है जहापनी मरजी की कोई जगा नहीं
05:56कहानी का हर पल समाज के दहेज पर था, जातिवाद और लिंग भेदभाव पर गहरावार करती है
06:03ये फिल्म किसी एक लड़की की नहीं, बल्कि उन सब की आवाज है जो अपने अधिकारों के लिए चुपचाप संगर्श कर रही है
06:09स्टैल का मतलब ही है स्थान, यानि जगा
06:14फिल्म का नाम यताता है कि समाज में एक लड़की की जगा आखिर कहा है
06:18क्या उसकी जगा सिर्फ किसी के घर की बहू बन कर रहना है
06:22या उसे भी अपने सपनों की जगा मिलनी चाहिए
06:24फिल्म का अंत दर्शकों को सोचने पर मजबूर कर देता है
06:28ये कहानी सिर्फ सविता की नहीं, बल्कि हर उस लड़की की है
06:32जो अपने सपनों के बदले समाज की परंपराओं के बोज तले दबाई जाती है
06:36स्ताल, बहुत ही सादगी, सच्चाई और भावनाओं के साथ बनाए गई फिल्म है
06:42इसमें न कोई चमक दमक है, न कोई बनावटी पन
06:45ये फिल्म दिल को छू जाती है क्योंकि इसमें वो दर्द है जो सच में हमारे समाज में आज भी जिन्दा है
06:51ये फिल्म ये सवाल छोड़ जाती है, कब तक लड़कियां अमस्तपनों को कुर्बान करती रहेंगी, सिर्फ इसलिए की समाज क्या कहेगा
06:58और ये सवाल ही इस फिल्म की असली ताकत है

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