00:00फिल्म सनी संसकारी की तुलसी कुमारी साल 1222 में रिलीज हुई एक हलकी फुलकी रोमांटिक कॉमेडी फिल्म है
00:08इस फिल्म को शशांक खेतान ने लिखा और डायरेक्ट किया है
00:11इसे धर्मा प्रोडक्शन्स और मेंटर डिसाइपल एंटर्टेन्मेंट ने मिलकर बनाया है
00:16फिल्म में वरुन धवन, जानहवी कपूर, सान्या मलहौतरा और रोहित सराफ मुखे भूमिकाओं में है
00:23इनके साथ मनीश पॉल और अक्षे उबेरॉय भी महत्वपूर्ण किरदारों में दिखाई देते हैं
00:29ये फिल्म डू अक्टूबर, डू हजुस दिसनेचिपाइस को दर्शरे के मौके पर सिनेमा घरों में रिलीज हुई थी
00:35रिलीज के बाद फिल्म को दर्शकों और अलोचकों से मिले जुले रिव्यू मिले
00:39कहानी की शुरुआत होती है सनी से, जो एक संसकारी और थोड़ा सीधा साधा लड़का है
00:46वह अपनी गरला फ्रेंड अन्या से बहुत प्यार करता है और उसे प्रपोज करने की पूरी तैयारी कर चुका है
00:54अन्या इस समय इतली में पढ़ाई कर रही है सनी को पूरा भरोसा है कि अन्या हां कहेगी
00:59वह उसे खुश करने के लिए यहां तक करता है कि वह बाहुबली की तरह कपड़े पहन कर प्रपोज करने जाता है
01:05क्योंकि बाहुबली अन्या का पसंदीदा किरदार है लेकिन किसमत को कुछ और ही मंजूर होता है
01:12अन्या सनी का प्रपोजल ठुकरा देती है
01:15वस साफ साफ कहती है कि उनके बीच जो था
01:17वो असली रिष्टा नहीं था
01:19बस एक सिचुएशन शिप था
01:20मतलब वे सही मायने में कभी एक दूसरे के साथ ही नहीं थे
01:24बस वक्त के साथ रिष्टा बना और खत्म हो गया
01:27सनी तूट जाता है और इससे भी ज्यादा बुरा तब होता है
01:30जब अनन्या बताती है कि वहब विक्रम नाम की व्यक्ति से सगाई कर चुकी है
01:35जिसे उसकी माँ ने उसके लिए चुना है
01:38दिल तूटा हुआ सनी अब विक्रम के बारे में पता लगाने लगता है
01:42थोड़ी जांच परताल के बाद उसे पता चलता है कि विक्रम बहुत अमीर आदमी है
01:46एक अरपती
01:47और कुछ समय पहले ही उसने अपनी बच्छपन की प्रेमिका तुलसी कुमारी से रिष्टा तोड़ दिया था
01:53तुलसी एक स्कूल ठीचर है
01:56सीधी, साधी और भावनाओं से भरी लड़की
02:00विक्रम की माँ को तुलसी कभी पसंद नहीं आई
02:03क्योंकि तुलसी के माता-पिता का तलाक हो चुका था
02:06परिवार के दबाव में आकर विक्रम ने तुलसी से रिष्टा तोड़ दिया
02:10जबकि तुलसी उसे सच्चे दिल से प्यार करती थी
02:13सनी को जब यह कहानी पता चलती है
02:16तो उसे तुलसी के लिए बहुत बुरा लगता है
02:18वा उसे मिलने का फैसला करता है
02:20जब वा तुलसी से मिलता है
02:22तो उसे समझ आता है कि ये लड़की अंदर से बहुत तूटी हुई है
02:26वह उसे समझाता है कि अगर उसका प्यार सच्चा था
02:29तो उसे अपने प्यार के लिए लड़ना चाहिए
02:31पहले तो तुलसी हिच की चाती है
02:34लेकिन फिर सनी के हौसले से वह मान जाती है
02:37दोनों मिलकर उदैपूर जाने का फैसला करते हैं
02:40जहां विक्रम और अनन्या की शादी होने वाली है
02:43उदैपूर पहुंचकर सनी और तुलसी एक जूटा नाटक करते हैं
02:48वे सब के सामने कपल बन कर आते हैं
02:51उनका ये ड्रामा शादी के माहौल में आग लगा देता है
02:54वह मौजूद सब लोग हैरान हो जाते हैं
02:57अन्या को सनी को किसी और के साथ देखकर जलन होने लगती है
03:00और विक्रम के दिल में भी पुरानी यादें ताजा हो जाती हैं
03:06तुलसी को देखकर उसे एहसास होता है कि वह अब भी उसी से प्यार करता है
03:10विक्रम का परिवार तुलसी का मजाक उड़ाता है उसे नीचा दिखाता है
03:13लेकिन सनी हमेशा उसकी तरफ खड़ा रहता है
03:16वहाँ सब के सामने तुलसी का सम्मान बचाता है
03:20तुलसी को सनी की ये बात बहुत छू जाती है
03:23और उसके मन में सनी के लिए एक नर्म खोना बनने लगता है
03:26शादी की तैयारियों के बीच एक दिन विक्रम को अलरजी का अटैक आता है
03:30सब घबरा जाते हैं लेकिन तुलसी सबसे पहले दौड कर आती है और उसकी मदद करती है
03:36इससे सावित होता है कि वह अब भी उसके लिए कुछ महसूस करती है
03:40उसी रात अनन्या और उसकी मां के बीच बड़ा जगड़ा होता है
03:45अन्या अपनी माँसे कहती है कि उसे हमेशा बस शादी करने के लिए कहा गया
03:49लेकिन कभी अपनी पसंद या अपने सपनों के बारे में सोचने की आजादी नहीं दी गई
03:54उधर विक्रम भी सोच में पढ़ जाता है कि वह सच में किस से प्यार करता है
03:59आखिरकार वह समझता है कि उसका दिल अब भी तुलसी के लिए धरकता है
04:04वह अपनी मंगेतर अन्या से साफ कह देता है कि वह ये शादी नहीं करेगा
04:09उसके परिवार को ये बात बुरी लगती है
04:12उसका बड़ा भाई उसे थपड भी मारता है
04:14लेकिन विक्रम पर अब कोई असर नहीं होता
04:17वह वहां से चला जाता है
04:18इधर अनन्या सनी से मिलती है और उसे अपने दिल की बात बताती है
04:23लेकिन सनी साफ कह देता है कि अब उसका दिल तुलसी के लिए धरकता है
04:28दोनों ये मान लेते हैं कि अब उनके बीच कुछ नहीं बचा
04:32थोड़ी देर बाद सनी तुलसी को डूडने जाता है और देखता है कि विकरम तुलसी को फिर से प्रपोज कर रहा है
04:39सनी ये देखकर सोचता है कि अब तुलसी विकरम से शादी कर लेगी
04:43इसलिए वह वहां से चुप चाप चला जाता है
04:47रास्ते में उसकी मुलाकात रोती हुई अन्या से होती है
04:51दोनों एक दूसरे को दुज़ेते हैं और ऐसा दिखाते हैं जैसे वे फिर से साथ हैं और शहर छोड़ रहे हैं
04:57सनी जाते जाते विकरम के परिवार से भी भिज जाता है और उन्हें फटकार लगाता है कि उन्होंने हमेशा तुलसी जैसी लड़की के साथ अन्याय किया
05:06और अब अन्या को भी दुख दिया
05:08अगले दिन जो असल में शादी का दिन था तुलसी भागती हुई सनी के पास पहुँचती है
05:14वह सनी को रोकती है दोनों गलगती है और यह तैय करते हैं कि वह अच्छे दोस्त रहेंगे
05:20एक महीने बाद सनी तुलसी से मिलने जाता है लेकिन देखता है कि वह विक्रम से मिल रही है और दोनों के हाथ में शादी का कार्ड है
05:29ये देखकर सनी का दिल टूट जाता है
05:32दो महीने बाद सनी अपने दिन बस तुलसी की याद में बिताने लगता है
05:36वहाग घर के जवेलर्डी बिजनेस में परिवार के साथ काम करता है
05:40लेकिन अंदर से हमेशा उदास रहता है
05:43उसी दोरान अनन्या एक शादी में जाती है
05:47जहां कुछ लोग बात कर रहे होते हैं
05:49कि वे विकरम सिनह के फार्म हाउस में काम करते हैं
05:52इससे लगता है कि विकरम और तुलसी की शादी होने वाली है
05:55अनन्या तुरंट सनी के पास पहुँचती है और उसे ये बताती है
06:00वह सनी से कहती है कि अगर वह सच में तुलसी से प्यार करता है
06:04तो उसे जाकर अपना दिल उसके सामने खोल देना चाहिए
06:07सनी तुरंट दौड पढ़ता है जब वह शादी की जगा पहुंचता है तो विक्रम से उसकी भिडंत हो जाती है दोनों में जगड़ा होता है
06:14विक्रम सनी से कहता है कि वह उसकी दो दो शादियां बरबाद करने आया है तब ही विक्रम का परिवार और उसकी होने वाली दुलहन दिनपल वहाँ पहुंचते हैं उन्हें लगता है कि सनी शायद विक्रम से ही प्यार करता है तब ही विक्रम सब के सामने सच्चाई बताता है
06:44उस सनी से जिसने हमेशा उसके लिए खड़ा रहना सीखा जिसने उसे कभी नीचा महसूस नहीं कराया तुलसी ने कहा कि अब वह किसी ऐसे इंसान के साथ रहना चाहती है जो उसके जैसी स्विकार करे ना कि परिवार के डर से छोड़ दे बाद में तुलसी को ये गलत फहमी हो
07:14जाने पर सनी तुलसी के स्कूल पहुंचता है जहां वह बच्चों को पड़ा रही होती है वहां दोनों की मुलाकात होती है और दोनों एक दूसरे से अपने प्यार का इजहार करते हैं दोनों एक दूसरे को किस करते हैं तभी स्कूल का प्रिंसिपल उन्हें देख लेता है
07:44कि अब कोई फर्क नहीं पड़ता है
07:46क्योंकि उसने आखिरकार अपनी जिंदगी की सची खुशी पा ली है
07:49वह तुलसी को गोद में उठा कर वहां से निकल जाता है
07:53और उसके माते पर प्यार से चुम्बन देता है
07:55फिल्म का अंत बहुत प्यारा और हलका फुलका है
08:00ये बताता है कि सच्चा प्यार कभी परफेक्ट नहीं होता
08:03लेकिन अगर दिल सच्चा हो तो सारी मुश्किलें आसान हो जाती है
08:07सनी संसकारी की तुलसी कुमारी एक ऐसी कहानी है जो हनसाती भी है
08:12रुलाती भी है और सिखाती है कि रिष्टों में सबसे जरूरी चीज है
08:16सम्मान, भरोसा और सच्चाई
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