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  • 11 months ago

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00:00ए नभी तुमने देखा उस शक्त को उसके हाल पर गौर किया जिसने अपनी खाईश नफ्स को अपना इलाह बना लिया है
00:06अलाहु अक्बर
00:07इलाह ला इलाह इल्लाह
00:12गल्मा इतौहीद का मरकजी लफ्स यहां आ रहा है
00:16मनित्खदा इलाह हूँ फवा हूँ जिसने अपनी खाईश नफ्स को अपना माबूद बना लिया इलाह बना लिया
00:22अफांता तकूनो अलेह वकीला
00:24क्या आप ऐसे शक्त की को जिम्मेदारी ले सकते है
00:27सूद हराम हुआ करेजी हराम वराम
00:33हमारा दंदा जो है वो आगे बढ़ नी सकता
00:37तो
00:39अल्ला के हुक्म को पीछे डाला
00:43नफ्स के तकाजे को आगे रखा कौन माबूद है अब
00:46नाम अब्दुल्ला रखिए
00:49नाम अब्दुर्रह्मान रखिए
00:52है अब्दुन नफ्स
00:53नफ्स के बंदे नफ्स के गुलाम
00:56ये मैंने यूं समझ ये
01:00कि जैसे मैंने
01:02हिजरत और जिहाद की डेफिनिशन की थी
01:04हिजरत का वेस क्या है
01:07पूछा के या यूल हिजरत अफजल हो या रसूल ला
01:11ए अल्ला के रसूल
01:12बताईए सबसे आला हिजरत कौनसी है
01:14अफजल
01:15फरमाया अलता जुरामा करे है रब
01:17हर उस चीज़ को छोड़ दो जो तुम्हारे रब को पसंद नहीं
01:20आज रात ही से आप हिजरत शुरू कर सकते
01:22जाइज़ा लीजे
01:24क्या क्या चीज़े मेरी जिन्दगी में
01:26खिलाफ शरीयत है
01:27तो अल्ला को नापसंद है
01:29फैसला कीज़े कि आज के बाद नहीं होगी
01:31हिजरत शुरू हो गई
01:32अफजल अल्हिजरा सबसे अफजल हिजरत शुरू हो गई
01:35लेकिन टॉप पर ले जाईए
01:38तो ये हिजरत
01:39जब अल्ला के दीन को
01:41काईम करने की जिर्दो हो जो उस मरहले पर आ जाए
01:43कि अब बातिल के साथ टक्राओं है
01:46और अब चाहिए कि सारी कुवत एक बरकेश पर जमा हो जाए
01:50हिजरत फर्स कर दी गई
01:52वो हिजरत घर बार छोड़कर
01:54अहलो आयाल को छोड़कर
01:56और मक्के के बेडियों के रहमों करम पर छोड़कर
02:00अपने घरवालों को जो लोग हिजरत करके आये हुक्म था
02:03हिजरत मदीना फर्स थी
02:04हिजरत हपशा फर्स नहीं थी
02:06सिर्फ इजाज़त थी
02:08कि जिन से सक्तियां नहीं जहली जा रहीं
02:10मजीद वो चले जाए
02:11तो हिजरत का ये
02:15अब्तदाई नुक्ता इंतहा ये
02:17जहाद
02:18अल्मजाहितु मन जहादा नफस हूँ
02:22जहाद को यहां से शुरू हो गया
02:23अपने नफस के खिलाफ जहाद करना
02:25सुबह नफस ने का भी सोजा
02:28आपने नफस की बात को रख किया
02:30अपना कंबर उठा के प्थेका उठे
02:31वजू किया
02:32नमाज के लिए आप मस्चिछ चल दिये
02:35आपने जहाद किया नफस के खिलाफ
02:37ये अफसल जहाद है
02:39और सबसे चोटी उपर ये है
02:42कि जब वो हको बातिल की जंग हो
02:43तो
02:45जान हतेली पर रख कर मैदान में हादिर होता
02:47इसी तरह
02:49ये जो शिर्क फिल इताएट है
02:52मैंने आपको उसकी अब्तिदा भी बता दी
02:54इन्फिरादी सते
02:55अफरायता मनि तखदा इलाह हूँ हवाह
03:00अफांता तकुनु अलेह वकीला
03:02चाह तुमने गौर किया
03:04उस शफ सकी हालत पर जिसने अफ़्ी खाईश है
03:06नशको अपना माबूद बना लिया
03:08इलाह बना लिया
03:08कहरा या इलाह इलाह इलाह
03:11लेकिन इलाह तो उसका उसका नवस है
03:14अब उसको इंतहा पर ले जाहिए
03:17एहद-ए-हाजर का सब से बड़ा शिर्क
03:20सबसे बड़ा शिर्क, सबसे बड़ा शिर्क, अवामी हाक्मियत का तस्वर है, हाकिम अल्ला के सिवा कोई नहीं, इनिल्हुक्म इल्ला निल्ला, जाहिर बात है, फिरौन ने अगर दावा किया था, मैं तुम्हारा खुदा हूँ, अना रबकुम उलादा, तो क्या उसका मतल�
03:50सेरी बनी हुई थी, ये रुदत, जावा क्या था? मेरा हुक्म चलेगा, मैंने जानता, लैसली मलको मिसर, मिसर की हकुमत मेरी है के नहीं, ये दावा था, ये खुदाई का दावा है, किसी जमाने में वो फर्द होते थे, नमरूद होते थे, नमारदा, ये हैं नहमार अब �
04:20के साथ हम फिरॉणों की आुलाद और सद्दाम ने लगाया थैं नारा नानु अब नाउन नमारदा हम नमरूदों की आुलाद इराक के बादशाओं का लकब नमरूद था और मिसर के बादशाह फराइडा थे फिरॉण थे जमाने का जब इर्तिका हुआ है और इसमें फैस्�
04:50की हायात तयवा के बाद खिलाफत इन्फरादी से इस्टमाई हो गई जब तक नबुए जारी थी नभी ही खलीफा होता था था अलाद उसकी हाट लाइन अल्लाद के साथ वही की लगी हुई है उदर से हुकम आता है वो इंप्लिमेंट करता है जहां उसका हुकम नहीं है व
05:20इसराइ दिल्ली में होता था हमारा बादेशाय मलका तो इंगलिस्तान में होती ती अब जो हिस मैजिस्टी गॉर्मिंट की हर मैजिस्टी गॉर्मिन्ट से हुकम आया वाइसराइव उसमें कोई तगएर औ तबदू नहीं कर सकता हिस तू इंप्लिमेंट इट तर सच जहां
05:50खिलाफत المسلمین
05:52अगर्चे शुरू शुरू में अमीरुल मौमिनी कहा जाता था
05:58कुछ अरसे के बाद खिलीफत المسلمین
06:00ये इस्तिराद जो है वो आँ
06:01इसी तरह
06:05इन्फिरादी मुलूकियत की बजाए
06:08इस्तिरादी मुलूकियत का तस्वर जो है शैतान ने पट्टी पढ़ाई
06:12इबलीस की मजली से शुरा जो इक्वाल की बड़ी ही यू समझे के एहम तरीन नजबों में से
06:19उमत मुस्लिमा के नाम पैगाम पर मुश्तमिल वो नजब जो है
06:23और वो उनके आखरी आयाम की है
06:25और वो उनकी जिन्दगी में च्छपी भी नहीं थी
06:29अर्मगान एहजाद उनके इंतिकाल के बाद च्छपी ने
06:31जिसमें आखरी जो कलाम था फार्सी और अर्दू दोनों का जमा कर दिया गया
06:36वरना इससे पहले फार्सी अलैदा च्छपी थी किताबे अर्दू की अलैदा
06:40लेकिन अब इतना कम था कि उनके लिए अलैदा अलैदा किताबे शाय करना मुनासिब में सब जाएगे
06:45अबलीस ने मजलीस ने मजलीस ने शुरा बलाई
06:49एक मजली से शुरा के जो रुकुन ने कहा
06:53कि देखो जमूरियत का दोर आगया है
06:54अब हमारी अबलीसियत को तो बड़ा खत्रा है
06:57अबलीसियत तो खत्म हो जाएगा
06:59जमूरियत
07:01तोड़ दी बंदों ने आकाओं के खेमों की तनाब
07:05ये तो आवाम में अपने आका बेरंज और लॉर्ड और बाक्षाहों के खेमों की तनाबे तोड़ दी गिरा दी ये खेमे
07:13ये तो इनकिलाब आ रहा है
07:14मेरे आका वो जहां जेरो जबर होने को है
07:17जिस जहां का है फक्त तेरी सियासत परमदार
07:21इवलीज क्या कहता है बड़े ठंडे अंदाज में
07:25हमने फुद शाही को पहनाया है जम्हूरी लिबास
07:29जब जरा आदम हुआ है खुद शनास और खुद निगर
07:34आज आदमी में एक सेल्फ इंपॉर्टन्स पैदा हो चुकी है
07:39ये बादशा कॉन होते हैं
07:42जो हमारे सरों पर मसल्ब है
07:43महलों में रहते हैं आश करते हैं
07:46जो फून पसीना जो है वो किसान कर रहा है
07:50अभी इंडिस्ट्रियल डेवलुशन तो नहीं हुआ था
07:52वो सारे बाद जो थी वो जरी मईशत थी
07:56फून पसीना वो करता है
07:58फसल में से लॉइंस शेयर आकर बेरन और लॉर्ड बो ले गया
08:02और उसमें से एक हिस्सा उसने बादशा को पहुचा एक अपने पास रखा
08:05जारे माना निजाम है
08:07तो हमने देखा कि इंसानों में कुछ शौर पैदा हो गया खुद शौरी
08:13तो हमने मुलुकियत को ढाल दिया नए सांचे में
08:17हमने खुद शाही को पहनाया है जम्हूरी लिबास
08:22मो गंदगी जो फिरॉण के सर पर टनों के हिसाब से रखी हुई थी
08:27हमने का तोला तोला सब में तक्सीम पर दो
08:29एक एक वोटस हमके हाथ में दे दो
08:32और कह दो तुम हाकिम हो
08:34हमने खुद शाही को पहनाया है जम्हूरी लिबास
08:40जब जरा आदम हुआ है खुद शिनासो खुद निगर
08:44तुने क्या देखा नहीं मगरिब का जम्हूरी निजाम
08:47चेहरा रोशन दंदरू चंगेस से तारीक तर
08:51जिसे जम्हूरीत का राम दिया जा रहा है खेल है तुमाशा है
09:00तो आज की दुनिया का सबसे बड़ा शिर्क सबसे बड़ा शिर्क इसे कोई जानता ही नहीं
09:08वो शिर्क फिल आकीदा उनको मालूँ है
09:13और उसके उपर फत्वे भी वो लगा देंगे
09:15कोई कबर के सामने खड़े होकर कोई दुआ कर रहा है किसी कोई रुकू कर लिया
09:21किसी ने सजिदा कर लिया तो तो खें ठीक है वो तो एक शिर्क जली हो रहा है
09:25वो तो मालूँ मैं उसकी नफी हो रही है
09:27लेकिन ये वो थे शिर्क जो पहले थे
09:31आज का शिर्क बिलकुल और है
09:33आज का शिर्क दो मैं गिनवा देता हूँ आपको
09:37एक है अवामी हाकमियत का तस्वर
09:41एक है माद़ा परस्ती का तस्वर
09:43माद़े पर सारा तवक्ल और इतिमाद है
09:46अल्ला पर कहा तुमक्ल रहा कहा है इतमाद रहा
09:49मैटिरियलिज्म ये एक मजभ है ये एक फलस्फ़ा है
09:54बारहाल इताएट के जिमन में शिर्क फिल इताएट क्या है
10:02इन फिरादी सते पर नफस परस्ती
10:05नफस को अपना मामूद बना लेना
10:08इस्थमाई सते पर
10:09अवाम की हाकमियत बद्तरीन शिर्क
10:16अब आई ये महबत
10:18शिर्क फिल महबत क्या है
10:21अगर किसी भी शेयर और किसी भी इनसान की महबत
10:28अल्ला की महबत से बढ़ जाना तो दूर की बात है
10:32बराबर भी आकर हम नशीन हो गई बैठ गई
10:35तो ये शिर्क है
10:36जब तक अशद महबत आप पे अल्ला की नहीं होगी
10:48अगर कोई और शेयर महबूब है
10:50तो बिनना से मन यत्तखिजू बिन दूनिल्लाह अंदादां युहिबूनहूं का हुब बिनल्लाह
10:58लोगों में से ऐसे भी हैं जोनोंने अल्लाह को छोड़कर किसी और चीजों को मद्दे मकाबल बना लिया है
11:03उनसे वो महबत करते हैं जो अल्लाह से करनी चाहिए थी
11:07तोहीद का तकादा है ला महबूब इल्लाह ला मतलूब इल्लाह ला मकसूद इल्लाह
11:14मकसूद और मतलूब और महबूब हकी कि अल्लाह किसी और कोई
11:18और वो आयत मैं आपको सुना चुका हूँ
11:22सुरह तौबा की आयत नमर चौबीस
11:25इंतहाई लर्जा दिने वाली आयत
11:27गुल इनकाना अबाओकुम वाबनाओकुम वाइखवानुकुम वाजवाजुकुम
11:33आफ़ इनके कान खौल दीजे अच्छी तरह सुना दीजे
11:54ए�ے लोगो एई उमान के दावे दारो
11:57अगर तुमें अपने बाप, अपने बेटे, अपने भाई, अपनी बीवियां या बीवियों के लिए शोहर
12:04और अपने रिश्टेदार
12:06और अपने वह माल जो बड़ी महनत से कमाकर ख़ते भरे हुए है और अपनी वह تिजारत
12:13जिसकी कसाथ बाजारी का तुम्हें अंदेशा रहता है
12:15मंदाना हो जाए
12:16और अपने वो महल अपनी हवेलिया जो तुमने तामीर की है
12:21और बहुत तुम्हें महभूब है
12:22उन्हें खूब फर्णिश किया है
12:24अगर ये आठ चीजें महभूब तर है
12:29अगर्णिश के अपना वाजारी की रामे जिहाद से
12:32तो जाओ दफ़व हो जाओ वहाँ बैठकर इन्तिजार करो
12:35यहां तक कि अल्ल्ह अपना फैस्दा सुना दे
12:37और अल्ल्ह ऐसे अपना फैस्दाई नहीं देता
12:40आठ सी रहे
12:43एकमाल ने बहुत कोगई नहीं का है
12:49ये माल औ दौनत दुनिया
12:52ये रिष्टा औ पैवंद
12:55पांच करीब तरी रिष्टे आ गए
12:57बाप, बेटा, भाई, जोजेंग
13:00और रिष्टेदार
13:02रिष्टा औ पैवंद
13:05ये जोड़ने वारा है
13:06और माल औ दौनत दुनिया की तीन शक्ले आ गई
13:09दौनत
13:10जो आप अपनी बैलन्स शीट को देख देखकर
13:15आप उसमें खुश होते हैं
13:18अब हमारे एसेट्स की यकी मत हो गई हैं
13:20और वो मकानाद जो आपने बनाए हैं
13:24बड़े महूब है
13:25और ऐसे बनाए हैं
13:27पुरान मजीद में आता है
13:28लाल लकुम तखलदून
13:30ऐसे बना रहे हैं तुम्हें हमेशा रहना इन मकानों के अंदर
13:33और वो कारोबार जिन में तुम्हें अंदेशा रहता है
13:37कहीं कसाद ना हो जाए
13:40को डिप्रेशन ना आ जाए
13:41यह आठ चीज़ें
13:43यह मालो दौनत दुनिया तीम
13:47यह रिष्टा ओ पैवन
13:49बुताने वहम गुमा ला इलाह इल्लाह
13:54यह सब वहम गुमान के बुत हैं
13:57जिनकी परस्टिश में तुम लगे हो
13:59इन सब की परस्टिश छोड़ो
14:02तो ला इलाह इल्लाह कहा अदावो
14:05अब इस उसूल को भी अप्लाई करना शुरू की है
14:12आईए इंडिविजियूल लेवल पर
14:14दौलत की महबब
14:18अगर आपको दौलत की महबबब आमादा करती है
14:23कि अल्लाह के हुदूद को पामाल करें
14:25हराम जराइ इस्तेमाल करें
14:28दौलत आनी चाहिए हलाल से हो
14:29हराम से हो जाइस हो नाजाइस से हो
14:32माई होक और माई करोक दौलत आनी चाहिए
14:34तो आपकी महबूब हकी कौन हुई दौलत
14:38ये दौलत आपकी माबूद है
14:41कौन बड़े से बड़ा मुवहिद इस शिर्क का एसास रखा
14:47और हुदूर्ने इस अदर कलियर फर्माया है
14:51ताइस अब्द दिनार वाब्द दिर्हम
14:54हलाक हो गया या हलाक हो जाए
14:57ये कलाम इखबरिया है
15:00या ये बड़ा है
15:01ताइस अब्द दिनार वाब्द दिर्हम
15:03दिर्हम औ दिनार का बंदा हलाक हो जाए
15:06नाम अब्द रर्हमान है हकीकत में अब्द दिनार है
15:10عبد الدرہم
15:12درہم و دینار آنے چاہیے
15:15جائے سے یا نا جائے سے
15:18حلال سے یا حرام سے
15:20صحیح سے یا غلط سے
15:21بھائی حکر بھائی
15:22تو معبود کون ہوا
15:23ہمارے ہندو بھائیوں نے کیا ٹھیا
15:28لکشمی دیوی دولت کی دیوی ہے
15:31اس کی پوجہ کرتے کس لیے
15:33مطلوب کیا ہے دولت
15:34اس کی پوجہ وہ خوش ہو جائے
15:37تو دولت ملے گی
15:38ہم نے کہا ہٹاؤ جی اس دیوی کو بیچ میں سے
15:41ہم براہ راستی پوجھ لیں گے
15:42بس یہی تو فرق کیا ہے نا
15:44عبد الدینار و عبد الدرہم
15:49یہ ہے انفرادی سطح پر
15:53شرف المحبت
15:55جو روح عبادت ہے
16:00تو عبادت کی جان ہے
16:03محبت
16:03غایت الحب
16:05ما غایت الظل والخضور
16:07اور ٹاپ پر لے آئیے
16:10آج کی دنیا
16:14اجتماعیت کے میدان میں
16:16اگرچہ اب
16:18زمانہ بدل رہا ہے لیکن
16:21تقریباً ایک صدی سے
16:23نیشن سٹیٹس
16:26وطن کی بنیاد پر قومیت
16:29وطن محبوب ترین شے
16:33جو شے میرے وطن
16:36کے لیے صحیح ہے
16:37وہ میں کروں گا
16:39چاہے وہ غلط ہو
16:40وہ حرام ہو
16:41اللہ کے قانون کے خلاف ہو
16:44لیکن میرے وطن کے لیے ہوگا
16:46وطن زندہ بات
16:47یہ وطن پرستی
16:50اس وطن پرستی کے مذہب کی
16:56ایک نماز بھی ہے
16:57تیرانہ ہو رہا ہے
16:59تو کھڑے ہو جا
16:59قنوط
17:00کھڑے ہو جانا
17:02عبادت کا حصہ ہے
17:04اس کا جھنڈا سلامی دو
17:08یہ وطن کے معبود کے
17:12ریچولز ہیں
17:14مذہب وطنیت
17:16اسی لیے اقبال نے کہا تھا
17:19اس کو سمجھانے کسی نے
17:20اس دور میں میں اور ہے جام اور ہے جم اور
17:26ساقینِ بنا کی رویشِ لطف و ستم اور
17:30تہزیب کے آذر نے ترشوائے سنم اور
17:35آج کا سنم آج کا پتھ کون ہے
17:37تہزیب کے آذر نے ترشوائے سنم اور
17:43مسلم نے بھی تعمیر کیا اپنا حرم اور
17:47ان تازہ خداوں میں بڑا سب سے وطن ہے
17:51جو پیرہن اس کا ہے وہ مذہب کا کفن
17:54خدا پرستی
17:57یہ وطن کی لکیر سے تم اور ہو گیا
18:00میں اور ہو گیا
18:01لکیر
18:02انسانیت منقصی ہو
18:07جو تمہارا وطن کے لیے ٹھیک ہے وہ تم کروگے چاہے وہ
18:12اخلاقا غلط
18:13اور جو میرے وطن کے لیے ٹھیک ہے وہ میں کروں گا چاہے
18:16اخلاقا غلط
18:17یہ کونسا دین ہے
18:19یہاں تو وطن تمہارا معبود بنی
18:22پاکستان میں بڑا شور اٹھا تھا جب میں نے کہا تھا
18:28کہ جندے کو سلامی دینا شرک ہے
18:30اور ترانے کے وقت کھڑا ہو جانا شرک ہے
18:34اور میں کبھی بھی تقریبات میں جاتا ہوں
18:38اقبال دے ہو رہا ہے کچھ اور ہو رہا ہے
18:41میں ان تقریبات کا مقرر نہیں ہوں
18:43لیکن جب بہت زور دیتے ہیں چلا جاتا ہوں
18:46لیکن وہاں ترانا پڑا جاتا ہے میں پیٹھا رہتا ہوں
18:50میں کھڑا دیتا ہوں
18:52اور اس پر چے میں گوئیاں ہوتی ہیں
18:55ہمارا آپ کے
18:55لیکن میرے نسطیق
18:57یہ وطن کی نماز پڑھ رہے ہوں
19:00تمہارا یہ قنوط
19:02اور وطن کا ترانہ
19:04اس میں حمد ہو رہی ہے وطن کی
19:05یہ کیا ہے
19:09آج کے دور کا بدترین شرک
19:13شرک فی المحبت
19:14آگے چلیے
19:18شرک فی الدعاء
19:20کسی کو مت پکارو
19:25کسی مدد کے لیے
19:26سوائے اللہ
19:27فَأَنَا الْمَسَاجِدَ لِلَّهِ
19:33فَلَا تَدْعُوا مَا اللَّهِ أَحَدًا
19:35اللہ کے ساتھ
19:36یعنی ایک تو یہ ہے کہ اللہ کو چھوڑ کر کسی کو پکارنا
19:40ایک ہے اللہ کے ساتھ پکارنا
19:43اللہ کو بھی پکارنا
19:44اوروں کو بھی پکارنا
19:45بدترین شرک ہے دعا اللہ کے لیے
19:48دعا اللہ کے لیے
19:49اس کا بھی ذرا میں تجزیہ کر دوں آپ
19:52دیکھئے ایک ہے
19:54عام مادنی قوانین
19:56دنیا کے جو ہے
19:57اس کے تحت کسی سے مدد چاہتا
19:59بھائی ذرا مجھے پانی پلا دینا
20:02یہ بھی آپ نے مدد چاہیے ہیں
20:04حضور کے بارے میں تو آیا ہے
20:07کہ آپ اتنے خوددار تھے
20:08صلی اللہ علیہ وسلم
20:09کہ اگر سواری پر ہوتے تھے
20:11اور آپ کا
20:12کوڑا نیچے گر جاتا تھا
20:13تو کسی سے یہ نہیں کہتے تھے
20:15کہ یہ کوڑا مجھے اٹھا کر دے
20:16بیلکہ خود
20:19سواری سے اتر کر
20:20کوڑا اٹھا دیتے تھے
20:21تو یہ جو قانون مادی ہے
20:25اس کے تحت مدد مانگنا
20:26کوئی بری بات نہیں ہے
20:27کوئی غلط بات نہیں ہے
20:30ماورائی اعتبار سے
20:33غیبی اعتبار سے
20:34کسی سے بدل مانگنا
20:35کسے باشد
20:36توئی ہو
20:37شرک
20:38شرک فی الدعا
20:40اِنَّ الْمَسَاجِدَنِ اللَّهِ
20:43فَلَا تَدْرُو مَعَ اللَّهِ اَحَدَا
20:45ایک استعارتاً
20:51استعارتاً اقبال کرتا ہے
20:52اے حمالہ اے فصیلِ کشورِ ہندوستان
20:55تو یہ خطاب بالکل
20:57ایک استعارہ سا ہے
20:58اسی معنی میں
21:01مولانا حالی نے
21:03اپنی مسدس کے اختیام پر
21:04جو مناجات لکھی ہے
21:07اے خاصہ اے خاصانِ رسول وقتِ دعا ہے
21:10امت میں تیری آکے
21:11جب وقت پڑھا ہے
21:12وہ دی جو بڑی شان سے
21:15نکلا تھا وطن سے
21:16پردیس میں وہ آج
21:18غریب الغربہ ہے
21:19تو اس معنی میں
21:22اس لفظ استعمال ہو جائے
21:24تو اس پر بہت زیادہ
21:25الرجک بھی نہیں ہونا چاہیے
21:27لیکن غیبی طور پر
21:30کسی کے بارے میں
21:31یہ عقیدہ رکھ کر
21:33کہ وہ میری مشکل
21:34کشائی کر سکتا ہے
21:35عادت روائی کر سکتا ہے
21:37میری مدد کر سکتا ہے
21:39یہ شرک ہے
21:40اور اس کے شرک ہونے میں
21:42کوئی شرک
21:43اَنَّ الْمَسَاجِدَ لِلَّهِ
21:46فَلَا تَدْعُو مَعَ اللَّهِ
21:47آپ دیکھئے
21:48ہمارے یہ فرشتے
21:52یہاں بیٹھے ہیں نا
21:53ہم کہہ سکتے ہیں
21:55ذرا بھائی میرا یہ کام کر دینا
21:56نہیں کہہ سکتا ہے
21:59جبرائیل کو پکار سکتے ہیں
22:01اے جبرائیل
22:02ذرا میرا یہ کام کر دینا
22:04نہیں
22:05وہ عالم غیب کی شاہ ہے
22:08کسی ولی اللہ کی روح
22:11اس کو پکار کر کہنا
22:12کہ میری یہ مشکل دور کر دے
22:13نہیں
22:14اللہ سے کہیں
22:16اللہ کیوں پکاریں
22:17اللہ جس کے ذریعے سے چاہے
22:19آپ کی ضرورت پوری کر دیں
22:20اس زمن میں میں کہوں گا
22:24کہ شاہ ولی اللہ دہلوی نے
22:26ایک بات کہی ہے
22:27اگرچہ مجھے اس کی
22:28کوئی دلیل
22:29اپنے طور پر
22:30انڈیپینڈنٹلی کتاب
22:31اس سنت میں نہیں ملی ہے
22:32لیکن شاہ صاحب کا
22:34ایک مقام مرتبہ ہے
22:35جو میری نگاہ میں
22:36بہت بلند ہے
22:37میرے نزدیک
22:40دو عظیم شخصیتیں
22:41عالم اسلام کی
22:42امام ابن تیمیہ
22:45اور امام غزالی
22:47کو جمع کریں
22:48تو شاہ ولی اللہ بنتے ہیں
22:49اتنی عظیم شخصیت
22:52انہوں نے یہ لکھا ہے
22:54کہ جو
22:56اللہ کے برگزیدہ
22:57بندے ہوتے ہیں
22:58اولیاء اللہ
22:59اللہ تعالیٰ
23:00ان کی ارواح کو
23:02ان کے فوت ہونے کے بعد
23:03ملائکہ کے طبقے
23:06اسفل میں شامل کر دیتے ہیں
23:08اور وہ بھی
23:09جس طرح وہ
23:10ملائکہ اللہ کے حکام
23:12کی زمین میں
23:12تنفیذ کر رہے ہیں
23:14وہ بھی
23:15اسی کام میں
23:15لگ جاتے ہیں
23:16میں نے ارز کیا
23:19کہ میرے پاس
23:19انڈیپینڈنلی
23:20کوئی دلیل نہیں ہے
23:21اس کے حق میں
23:22لیکن
23:23شاہ صاحب کا فرمانہ
23:25خود میرے لیے
23:26ایک درجے میں دلیل ہے
23:27لیکن یہاں
23:30ایک تو یہ نوٹ کرنے کا
23:31ملائکہ کا
23:32طبقہ
23:32اسفل
23:33ملائکہ کا
23:34سب سے نچلا
23:34طبقہ
23:35اور اللہ کے حکم کی
23:38تنفیذ کرتے ہیں
23:39تو فرشتے کر رہے ہیں
23:40وہ بھی ہوں
23:41ہمیں سے کیا غرض ہے
23:42ہم نہ فرشتے کو
23:43پکار سکتے ہیں
23:44اور نہ کسی ولی
23:45اللہ کو پکار سکتے ہیں
23:46پکارو اللہ کو
23:49قَالَ رَبُّكُمُ دُعُونِي يَسْتَجِبْ لَكُمْ
23:55اِنَّ الَّذِينَ يَسْتَقْبِرُونَ
23:57عن عبادتی سید غلون
23:58جہنم داخلین
23:59تمہارا رب کہتا ہے
24:01مجھے پکارو
24:02مجھ سے مانگو
24:03میں تمہیں دوں گا
24:04تمہاری دعا سنوں گا
24:06قبول کروں گا
24:07اور جو بربنائے تکبر
24:10مجھ سے نہیں مانگتے
24:13وہ چہنم میں داخل ہوں گے
24:16ظلیل و خار ہو گا
24:18حضور نے ایک بات
24:21مجھے بطن یاد نہیں ہے
24:22بہت پیاری فرمائی
24:23دیکھو انسانوں سے
24:25تم مانگتے ہو کچھ
24:27تو ایک دفعہ تو
24:29اس کے ماتھے پر
24:30تیوری پر بل پڑھ ہی جاتا ہے
24:32یہ کیوں میں نے سامنے
24:33ہاتھ سوال کیا
24:34کیوں مجھ سے مانگتا ہے
24:35چلیے بعد میں کچھ
24:36مدعی دے
24:37تاگوار گزرتا ہے
24:40ارے اس سے مانگو
24:41جو کہتا ہے
24:42کہ مجھ سے مانگو
24:43اور میں دوں گا
24:45وہ نہ مانگنے پہ ناراض ہے
24:48مجھ سے نہیں مانگتے
24:50رات کے آخری ساتھوں میں
24:54یا جسے آپ کہتے ہیں
24:57small hours of the morning
24:59حدیث میں آتا
25:01اللہ نزولِ جلال فرماتے
25:03جس کو ہم نہیں جانتے
25:04کیسے نزول ہوتا ہے
25:06ذاتِ باری تعالیٰ
25:07اس کے متعلقات کے بارے میں
25:09جو بات آگئی
25:10قرآن میں
25:11حدیث میں
25:12وہ ہم مانتے ہیں
25:12کیسا یہ ہم نہیں جانتے ہیں
25:14اس کا ہاتھ ہے
25:14کیسا ہے ہم نہیں جانتے ہیں
25:15اس کا چہرہ ہے
25:17کیسا ہے ہم نہیں جانتے ہیں
25:19اس کی ساکھ ہے
25:20اس کی
25:22پندری ہے
25:23کیسی ہم نہیں جانتے ہیں
25:24کہ وہ سنتا ہے
25:26کیسے سنتا ہے
25:27ہم نہیں جانتے ہیں
25:28کیا اس کے کان ہے
25:28کیا اسے بھی
25:30ساؤنڈ ویرز کی ضرورت ہے
25:32سننے کے لئے
25:32तो देखता है कैसे देखता है अबनी जादा
25:36वो उतरता है कैसे उतरता है अबनी जादा
25:41जो कुरान में आगया हदीस में आगया मान लीजिए
25:43बस बाकी ये मुतशाबहात में से है
25:46इसकी खोद कुरेद में पड़ो गया तो फितने में मुतला हो जाओ
25:50अफ्तगाल फित्नत वप्तिगा तावीले
25:52लहादा
25:56हदीश में आता है
25:58कि रात के आखरी साथों में
26:00अल्ला समाए दुनिया तक नजूल फर्माते
26:03और पिर निदा लगती है
26:05हल मिन साइल इन फाउतिया हू
26:09है कोई सवाल करने वाला
26:11मांगने वाला के मैं उसे दू
26:12हल मिन मुस्तग्फिर इन फाउफिरा लहू
26:17है कोई
26:18कुनाहों की माफी चाहने वाला
26:20के मैं उसे माफ कर दू
26:22हम अंटा गफील सो रहे
26:26हम तो माईल बकरम हैं
26:31कोई साही लिए ने
26:32राह दिखलाएं किसे
26:35रहनवे मन्जिल ही नहीं आ किसे दिखा
26:38अल्ला के रास्टे पर चलने का फैस्टा करो
26:42अल्ला की राह में जिहाद का फैस्टा करो
26:46फिर अल्ला रास्टा को लेगा
26:48वो लोग के जो हमारे रास्टे में
26:54जिहाद करें, मेहनत करें, मुशक्कते करें
26:57हम लाजमन उन पर अपने रास्ते खोलते चले जाएं
26:59और दौा शिर्क फिद्दौा
27:05मांगो सिर्फ पन्रास, अल्लास, अल्लास
27:10वो चाहे किसी फरिष्टे के दरीए
27:13चाहे किसी फौद सुदा वलियुलाह की रूँ के दरीए से
27:18चाहे किसी को भी नहीं परा रास्त अपने होकुम से
27:22उसकी तो खुर्ट है जो चाहे करे, कुन वयकूर भी
27:25तो जैसे भी हो, वो आपकी दरूरत पूरी करेगा
27:30वोही है, जोकि मुश्किलाद को हल करने वाला है
27:35वोही है, जो मर्स से शिफा देने वाला है
27:42भुकारो उसी को मांगो उसी से
27:44अब आईए
27:47कुछ मरास्म अबूदियत होते है
27:51मरास्म रस्म कहते हैं किसी चीज़ की जाहरी शक्रिक्ट
27:53रह गई रस्म अजा रूह बिलाली न रही
27:58फलस्फा रह गई या तल्कीन गजाली न रही
28:02ये कुरान का भी हम इसे रस्म-ल-खत कहते हैं
28:05रस्म-ल-खत
28:06और ये हज़रत या रस्मान के जमाने में फाइनल कुआ है
28:09कि ये इस तरीक किसे लिखा जाए
28:11तो अबदियत के इजहार के लिए कुछ रसूमात है
28:15जिसमें से एक पर गुफ्तबू हो चुके
28:17ये कुनूत वल्कानितीन वल्कानितात
28:22ये जो है अल्ला के खुदूर में चाहे हाथ बादे चाहे हाथ खुले
28:28लेकिन जरा चुक कर गर्दन में खम करके खड़े होना
28:34ये नमाज के अंदर जो कुनूत है
28:35ये कुनूत है
28:36ये भी अपनी आजजी का इसा है
28:39इज्द और तसल्ल
28:41वो जो ये अपने कयम की मैंने डैफिनिशन आपको बताई
28:44अलिबादत तज्माव असलैन गायत अल्हुब्ब्ब्ब्ब्ब्ब्गायत जुल्ल्वल्खुदूर
28:50हब दर्जे में अल्ला के सामने बिच जाना जुक जाना निर जाना
28:56रुकूब
29:09ऑर योमा अकमलतो लक्म दीनकों वाइतमतो अलचनव निमती वरजीतो लक्म अलिस्लाम हदिना
29:15आ हुजोर की बैसत से कबल
29:19सच्ध ताजीनी चाईस्ता
29:26किसे श्थ की ताजीन के लिए उसकी इस्धत के लिए उसके सामने सच्धा के चाश्ता
29:32حضرتِ یوسف کے سامنے
29:36उनके वाले देन
29:37और क्यारा भाई
29:40सज्दे में गिल देन
29:41बच्पल में खाफ देखा था
29:43और 40-50 साल बाद
29:46उसकी तावीर बिल्फेल
29:47एक इस वाके के तोर पर सामने आ दे
29:50सज्दा करना
29:52जुकना सज्दा करना
29:55ये जाइस था सज्दा ये तासीर
29:57खुदूर्थ पर शरीयत मकमल
30:01दोहीद मकमल
30:02अब हर नौका सज्दा हराम मुद्बख है
30:05सिवाए ल्ला की किसी को
30:06हमारे मुसल्मानों
30:11ने भी अपने दौरे मुलुकियत में
30:12सज्दा ये शुरू तरा
30:14अदानत के अंदर
30:15बादशा के दर्मार में जा रहे
30:17तो सज्दा सर जुखा कर रुकू की हालत में
30:20ये आपके बढूस में
30:23जो हैदरबाद की रियासत थी
30:25सलाम कैसे करते थे
30:26कितने जुखते थे
30:27और फिर वो उखतर हो
30:29सलाम दो रहे थे
30:30ये श्मुश्रिकाना फेल है
30:34युखलिया दर्बार में भी था
30:37शेख एमद सरहंदी रहमत अल्या ने कहा
30:42अलत है हराम है जाइस नहीं
30:44दर्बार में शिकायत पहुंच गई
30:47आखिर मुखबरी करने वाले भी थे
30:50हासिर भी थे
30:51वबिन शर्र रहासे दिन इजा हसन
30:54तलबी हो गई
30:56बुलाया गया दर्बार में हादरी
30:59और ऐसा इहत्वाम किया गया
31:04कि जब हदुनते मुखदित आगे आएं
31:07बादशाह तक जाने के लिए
31:09तो दर्मियान में एक दिवार से हाई करके
31:11उसमें खिर्की खोल दी
31:13कि इसमें से जुकर गुदरेंगे ना
31:16तो रुकू किसी दरजे में तो हो जाएगा
31:18रुकू भी सज्दे ही की एक शकल है
31:21सज्दे का खाफ कह लिए लेकिन ये के
31:24जब आयात सज्दा आती है
31:26पुरान मजीन में
31:27वह आम नमाजों में मैं देखता हूँ
31:30कि वह आयात सज्दा वाली आयात पढ़ी दी जाती
31:32हाला कि उनकी एक खास कैफियत है
31:34तरावी में तो पढ़ी जाती है
31:37लेगि पहले बता देते हैं
31:38कि ये दूसरी रकट में
31:40ये पहले रकट में सज्दा आ रहा है
31:41तो लोग तैयार होते है
31:42रुकों भी अगर फौरण हो जाए
31:46आयत सज्दा के बाद तो उससे भी
31:48उस सज्दे का हक अदा हो जाता
31:50बाराण
31:51हद्रत शेखِ मुझदित रह्मतुल्ह अले
31:55दर्बार में आये
31:57तो उस खिड़की में से पहले
31:59पाउं गुजारे फिर अत्रा सर्क निकाला
32:01कर जेल में डाल दिये गया
32:05डाल दिये गया कोई परवारे को
32:06ठाजिर हुआ मैं शेखِ मुझदित की लहग पर
32:11वो खाख के है जेर फलक मतलए अन्वार
32:16गर्दन न जुकी जिसकी जहांगीर के आगे
32:19जिसकी नफस गर्म से है गर्मी अहरार
32:23वो हिंद में सर्माया ए मिल्लत का निगहमा
32:26अल्ला ने बरवक्त किया इसको खमदार
32:29दीन इलाही दीन मुहमदी के खात्मे का इलाग था
32:34अब बड़े-बड़े मौलवियों ने ये अक्मर को सबख पुढ़ाया था
32:38बड़े मौलवी दर्मारी मौलवी
32:39उनाले साबक बढ़ाया था
32:44ऐक दिन एक झजादार बरस का होता है
32:45और लाक हर मौमला एक हजार साल तक होता है
32:49अब एक हजार साल हो गैं मौमद की रसालत को उनकी रसालत का दौर खत्म
32:53सल्ल्लह आलł a.s.
32:54अब दूसरा हजार साल इसलिए अल्फ थानी कहते हैं अल्फ हजार को कहते हैं अल्फ थानी
33:01ये दूसरा हजारवा साल जो शुरू हो गया है इसमें एक नए दीन की जरूरत है वो दीन अक्बरी है
33:07दीन इलाही है और दीन इलाही क्या था
33:11ये एक बहुत बड़ी सियासी तद्वीर थी असल में बहुत बड़ी सियासी तद्वीर
33:18और उसका जहूर बाद में भी हुआ हिंदुस्तान की सरजमीन में
33:26वो ये के हिंदुस्तान की तरक्ती में जो चीज सबसे बड़ी रुकावट है वो मखभी इक्तिलाफात है
33:34लेहादा ऐसा करो सारे मजाहिब जो है उसे हावन दस्ते में डालो
33:39कूट कूट के कूट कूट के चुरा चुरा करके बनाओ सफूफ
33:42और ये मजभ सबका हो जाए तो मजभी अफ्तिलाफात खतम हो जाए
33:47दूसरी बात उनकी समझ में ये आ गई
33:51के असल में इक्तिलाफ रिसादत और शरीयत की मुनियाद पर होते लियादा दीनِ
33:57इलाही बस खुदा को मानो बस रिसादत वगरा को छोड़ो खुड़ो खुदा तो सबका रब है उसे आप पर मात्मा कह ले महादेओ कह ले जो चाहे कह ले अल्ला कह ले नाम कह ले
34:13गुरान कहता है तुम अल्ला कहकर पकार लो या रहमान कहकर पकार लो जिसको भी तुम पकार रहे हैं जान लो
34:25कि तमाम अच्छे नाम उसी के
34:27ये फलस्फा था बहुत कहरा वो जाहिल था अनपड़ था
34:32लेकि बहुत बड़ा सियासदान था अकपर इसमें कोई शक्ड़ लेकिन ये कि अगर एक हकूमत जो सबसे बड़ा मुगल आजम जिसको कह दे
34:43उसके जमाने में मुस्लमान आने हिंद जो है सियासी एतिबार से अपने अरूज पर थे
34:49लेकिन दीनी एतिबार से बाताल का मामना आ गया थी दीने मुम्मदी खत्व एक हदार साल का एक दिन है और वो खत्व हो चुआ है
35:01अल्ला ने उठाया मुझदिद अल्फिसानी रह्मत अल्हाले
35:08और उनकी दर्वेशाना मसाई के जरीए से
35:13अब देखिए उस जमाने में तस्वफ के जरीए से सबसे बड़ा शिर्क आ रहा था
35:19वह्तव वजूद की ऐसी ताविरात हो रही थी जो हमाउस्त बन गई थी
35:29हमाउस्त और वाहदतु वजूद के द्रमेद तो सबीर आस्मान का फरक है
35:32हमाउस्त में काईनात हकीकी है, खुदा इसमें हल हो चुका है, इसकी अंदर जाहिर हो गया
35:38और वादत अल्वजूद में वजूद हकी कि सिर्फ अल्ला का इस काइदात का वजूद कोई है यह नहीं हकी कि नहीं हकी कि लेकिन यह खत्म हो रात
35:49इस पहलू से मुझदिद अल्फ थानी के मुझदिद आख्याजम को अल्ला ने खड़ा किया
35:58शेख एमद हज़रत अल्ला से थे फारूकी थे शाव लिल्ला भी फारूकी थे रगे फारूकी यम कहते हैं शेख एमस्थ ने मेरी फारूकी रग भड़कती है इसको इसके नतीजे में वो दीन इलाही का खात्मा हुआ
36:18बाद में हमारे हाँ ये आया है हिंदोस्तान में बरहमु समाज बरहमा बरहमु समाज और गांधी जी भी इसी फलस्फे के काईल थे वाहदत एधियान के
36:29और ये सियासी एक्वार से बहुत उची जहनी स्था की घमाजी करने वाली बात है
36:37कि हिंदोस्तान के अंदर के ये मजबी इखिलाफात को अगर हम किसी तरह खरल करके खड़ब कर दें
36:43हावन दस्तामे डालके कर दें तो फिर ये कि यहां तरकी ही तरकी
36:48बारहाल सजड़ा गर्दन नजुकी जिसकी जहां गीर के आगे जिसके नफस गर्म से है गर्मी आहराद
37:00वो हिंद में सर्माया मिल्लत का निगहबां अल्लाह ने बरवक्त किया जिसको खबत्दार
37:06तो हम ने शिर्क फिल अबादत में पहले बाद की शिर्क फिल इताए इंफिदादी स्थे पर नफस माबूद
37:19इज्टमाई स्थे पर अवाम की हाकमियत बद्तरीन शिर्क इस तो लगए अधीम तरीन शिर्क
37:27इतने बड़े पेमाने का शिर्क कभी नी हुआ दुन्या पे
37:32उसके बाद शिर्किल्महबत
37:37मालकी महबब
37:39तरे सावदुन दीनार वाब्दुन दिर्खा
37:42वतन की महबबब या किसी और शे की महबबब
37:44अगर वो अल्ला की महबबब के बराबर भी आ जाए
37:48बढ़ जाये तो तो और भी बड़ी बात कहनी पड़ेगी
37:50लेकिन हमारे पास शिर्क से उपर की इस्तिला कोई नहीं
37:53फिर शिर्क द्दौा
37:56अल्ला के सिवा किसी और से हाजत रवाई के लिए
38:00मुश्किल कुशाई के लिए पुकारता किसी
38:02फिर शिर्क फिर्मरासिब अल्बूदिया
38:07खुरूत है रुकु है सुझूद है
38:12ये जुल्ले वल्खुदू की किसी के सामने जुप जाने की एक अलामत है सिंबल
38:18अब आखरी है इसमें इخलास और इخलास की जिद क्या है रियाकारी
38:26कोई अबादत अगर दिखावे के लिए की जाए वो शिर्क
38:33ये शिर्क खफी के लागवा है
38:38माल की मुहमत का शिर्क भी शिर्क खफी है
38:42नफस की इताद का शिर्क भी शिर्क खफी है
38:47और ये समसे खफी शिर्क है
38:50हुदूर ने फर्माया, चुछ ने दिखाने के लिए नमास पढ़ी, उसने शिर्क कर लिया
39:11जिसने दिखावे के लिए रोदा रखा, उसने शिर्क कर लिया
39:14जिसने दिखावे के लिए खेरात की सदकात दिये, वो शिर्क कर चुका
39:20गद अश्रका, गद अश्रका, ये अरभी के मिज़ाश से वाक्त वियत हो, फैले मादी पर ख़द जो है
39:27तो वो परफेक्ट टेंस बन जाता है, कर चुका, वो शिर्क में मुल्विस हो चुका
39:35और तज्जिया करके यह तक बताया, कि अगर कोई शिर्क नमास पढ़ रहा हूँ
39:53और जब वो ये देखे कि कोई उसे देख रहा है तो अपने सज्दे को तवील कर दे, कोई शिर्क है
39:58फर्स कीजे पांच सेकंड का सज्दा वो कर रहा था, अब उसने साथ सेकंड का किया है
40:05यह दो सेकंड किस के लिए है
40:08इस एक सज्दे के दो मस्जूद हो गए है
40:13तो पांच सेकंड का सज्दा तो अल्ला के लिए दो उसके लिए शिर्क हो गए
40:18एक और बात फरमाएं ﷺ
40:21शिर्क खफुई को पहचानना और देखना उतना ही मुश्किल है
40:29जितना के किसी सिया शब में तारीक रात में
40:34किसी सिया पत्थर पर चलने वाली सिया च्यूटी को देखना मुश्किल है
40:40तश्वीय का बलागत और फसाद के इंतहा है जैसे मैंने अर्ज किया तक
40:46कि एक जोड़े की दो जूतियों के माबेन जो मुशाबहत है
40:51उम्मत मुस्लिमा और साविका उम्मत बनी इसराईल की उनके उपर जो हालात वारिद हुए उनमें वही मुशाबहत
40:58तारीक शब है सिया पथर है उस पर सियाच च्यूटी रिंग रही है इतना उसको देखना मुश्किल है उतना ही श्रिके खफी को पहचानना है
41:12किदर किदर से आप पर हमलावर हो जाएगा
41:17किदर किदर से आकर
41:18आपकी अबादत में आपकी तोहीद में नकब लगाएगा
41:22इसका आपको अद्दादा हो नहीं सकती
41:24बढ़ा पुश्किल है
41:25बहुत स्यादा चौकस रहने की जबना से
41:29और इसका इलाज बताया गया है
41:32खास तोर पर अबादात के जिमन में
41:34कि कुछ न कुछ अबादत नफल भी की जाए
41:39और नफल अबादत इस तोर से की जाए
41:41कि किसी को पता न चले
41:42अब हमारा आल यह हो गया है कि सारी
41:45अगर कोई इशागी सत्रा रकते पढ़ता है
41:48समकी सम्स्टिद में पढ़ता है
41:49हाना के सहाबा के दौर में
41:52मस्टिद थी फराइश की एदाएगी
41:54बाकी जाकर नमाद घर में पढ़ोगे
41:58वो अफसल है
41:58और नमाद फिल तो खास तोर पर
42:02अगर किसी को तहजद की तौफीक हो गई है
42:05तो किसी दे किसी तरह ढड़ोरा पीटेगा
42:07उसे जी क्या करें मैं रात को जागना होता है
42:09तब यह जो है बड़ी भारी रहती है
42:11हो गया अपना ढड़ोरा पीट दी
42:13तो इससे तो मर्ज और दो आथशा हो जाएगा
42:18रियाकारी और बढ़ जाएगा
42:21इसी तरीके से सदकात नाफ़ा फरमाया
42:25ऐसे दो कि दाहना हाथ जो कुछ दे बाएँ हाथ को पता न चले
42:28किसी को पता न चले
42:31इससे वो रियाकारी की जड़ें कटती है
42:35रियाकारी की जड़ें जो है दिल के अंदर से कटते है
42:37ये इलाज है रियाकारी का लेकिन रियाकारी शिर्क है
42:43अब मैं आखरी बात पर आ रहा हूँ
42:48आपने सोचा होगा
42:51कि इस तज्जिये के तहट तो हर गुना जो है अदना से अदना गुना भी शिर्क है
42:58फजर की नमाज के वक्त अगर उठके नहीं गए
43:00और चादर या कंबल को सीधा करके लेट गए तो ये शिर्क है
43:06फिर कौन से गुना है जो अल्ला मौफ करेगा
43:08ये जो मैंने आयत आपको दो दफ़ा जो आई है सुरह निसा में सुनाई
43:14इसको तो हरकिस नहीं बखशेगा कि उसके सा शिर्क किया जाए
43:23अल्बता उससे कम तर जिस जिसको चाहेगा बखशने
43:26तो जान लीजिए ये जो बारीक तजसिया मैंने करके बताया है
43:31कि ये अपनी जगा सनफीसा दुरूस्त है
43:33लेकिन इन में जो ये चीज़ें हैं
43:38कोई कोताही हो गई, कोई गुना हो गया
43:40कोई शरीयत की मुखाल्फत हो गई
43:43नफस के किसी उस वखके दबाव में आकर ये गुना शुमार होंगे
43:48अगर ये आपकी तबियत सानिया ना बन जाए
43:51अगर ये आपकी सेकिन नेचर बन गए
43:55तो एक गुनाह भी सारी तबाही लाने के लिए काफी है
43:59अगर आपने डेरे डाल दिये
44:03गलती हो गई
44:06तो आप ही मागो तुबा करो इस ते फार करो अला साब कर देख
44:11नहीं करोगे
44:14तो फिर एक गुनाह पर भी दवाम अगर हो गया
44:19और उस गुनाह ने एक ने भी तुमारा इहाता कर लिया
44:22तो वो जहन्नम में खुलूत की वईद करान में आई है
44:27बला मन कसम स्यएतन
44:30वाहातत बही खतियतहू फ़ालाइका साब नारेहूं फियां काल दून
44:35चो नहीं जिसने कोई एक भी बड़ा गुनाह चोटा नहीं
44:40ये चोटे चोटे चोटे गुनाह जो होते रहते हैं
44:43गुनाह कबीरा लमम जिनको कहा गया है
44:45तो उसकी अल्ला ताला के हाँ पकड़ नहीं है
44:48बलके वजू करते हैं तो हाथों के इस तरह के गुनाह वो धुल जाते हैं
44:53आँखों के गुनाह धुल जाते हैं
44:55गुलाह कमीर अगर एक भी
44:57खरिया और मस्तقिल किया
45:00और उस पर ड्यब्रे डाल दीए
45:01और वो आपका इहाता कर
45:05आज के दौर में सौुढilar का निजाम सौुढilar कारोबा
45:08वो तो आपका इहाता कर गया
45:10आपके पुरे वजूद का इहाता कर गया
45:13मला मन कसबा और कसबा कहते है जान भूज कर करना
45:17एक है खता से हो गया गलती से हो गया
45:22वक्ती तोर पर कोई तहरी कैसी हो गई
45:25गलत माहौल में बैठे हुए थे
45:27उसके जिरे असर कोई आप से भी गलत हर कर सरज़त हो गई
45:30कभी नफस का जोश कुछ ऐसा हुआ के
45:33आप मगलूब हो गए ठीक है
45:36इसलिए वो शिर्क है
45:38लेकिन ये शिर्क गुना के दर्जे में शुवार होगा
45:42अगर आप तौबा कर लेते हैं रुजू करते हैं इस्तिफ़ार करते हैं
45:45अल्ला मुशने वाला है
45:46लेकिन अगर एक गुनाह कबीरा भी
45:49जान बूज कर इस्तियार कर लिया
45:52और उसे मुस्तकिल अपनी जिन्दगी के अंदर शामिल कर लिया
45:55बला मन कसब सैयातन
45:58वाहाकत मही खतीयतो हू
46:01फ़ उलाएक असहाब उन्दारहूं फीहा खाल दून
46:04तो वो पिर जहन्मी हैं आग वाले हैं उसमें हमेशा हमेश के लिए रह दे आ आ
46:09शिर्क फिस्वात के जिमन में मैंने अर्स किया था
46:14कि सूरा इखलास जामे तरीन उसकी नफी पर है
46:17और शिर्क फिस्वात की कामिल नफी पर आयत अल्कुर्सी है
46:23आयत अल्कुर्सी एक लंबी आयत
46:28जैसे आयत अल्बिर एक लंबी आयत थी
46:31और इसको हुदूर ने फर्माया है
46:34सेदत आयात उकुरान
46:36पूरे पुरान मजीद की आयात की सर्दार है लिया
46:39और ये शिर्क फिस्सिफाद के जिमन में ये
46:44शम्शीर इकाते है शम्शीर बुर्हान है
46:47अल्लाह ला इलाह इलाहू
46:50अल्हयुलकयू
46:53ये वही है
46:54लेकिन उसकी जिन्दगी को अपनी जिन्दीके पर क्यास ना करता हून
47:06तुम्हे खुराक की अथियाग थे उसे कोई जमूत नहीं
47:10मा उरीदो मिन हम मिर्रिस्किन वमा उरीदों यूत्यगून
47:15मुझे कोई हत्याज दे कि मुझे को रिस्क पहुचाएं
47:19रिस्क दें, मुझे खिलाएं, मुझे कोई जूरूबट दें
47:23फिर तुम्हारी हयात, नीन, उंग, तकान
47:30इन तमाम कमजोरियों के साथ है
47:33वो अलहई है, अपनी जात में खुद जिन्दा है
47:37हयात उसकी जाती है, किसी और ने अता नहीं की है
47:41हमारी तो मुझे है, उम्रे दराज मांग के लाए थे
47:45चार दिन, दो आर्जू में कट गए दो इंतजार में
47:48और अल्कयूम, बकिया पूरी काइनात के लिए वोई है, उसको ठामे हुए है
47:53लाता खुदू हुसे नदू वला नौम, अलहाई, हयाते कामिल
47:58के उसको ननीद आती है, नहूंग आती है
48:03लहू माफिस समावाते माफिलाद, आस्मानों और जमीन में जो कुछ है, उसी की मिलकियत है
48:08तुम कस्टोडियन्स हो, तुम अमीन हो
48:12यह अमानत चंद रोजा निस्दिमास, तरहकीकत मालिक शेहर शेह खुदास
48:19यहां तक कि यह मेरा जिसम भी मेरे पास अमानत है
48:22मैं कौन हूँ, मेरी खुदी, मेरी अना, मेरी रूफ, जो पोजेश करती है इस बदन को
48:28लेकिन यह पोजेशन मिलकियत का नहीं है, अमानत का है
48:33यह अमानत, यहाथ भी अमानत है, मेरी जबान भी अमानत है
48:37मेरी आँखे भी अमानत है
48:38यहां पर अन्दास बड़ा पुर्जलालत कौन है वो जो शफात कर सके उसके दर्मार बें मगर उसके एजन से
48:50किसी का जाती किसी का जोर किसी का इस्तियार नहीं है कि जिसकी बिना पर उसकात करें
48:58हाँ अल्ला के अजन से
48:59और दूसरी जगा पर आता है
49:01जिसके लिए वो चाहेगा
49:02और जिसको इजाज़त देगा
49:04जैसे के आता है
49:08अम्मा यतसालून में
49:11यौमा यकुद्म रूह वालाइकद।
49:14सफल
49:15और उन में से कोई भी
49:18बात नहीं कर सकेगा
49:21गलाम नहीं कर सकेगा
49:24ला यतकल्मून
49:25इल्ला मन अजन लहुर्रह्मान
49:28सिवाए उसके जिसे रह्मान इजाज़त दे
49:30वाकाला सवाबा
49:31और सही बात करेगा कोई गलत बात नहीं करेगा
49:34या लम मा बैना आदीहिं
49:37वामा खल्फहुं वला युहितून
49:39बिशाइन मिन इल्म इल्ला बिमाशा
49:41वो तो जानता है जो कुछ भी
49:43उनके सामने हैं उनके पीछे है
49:45और ये कोई इहादा नहीं कर सकता
49:48मखलुकात में से
49:49उसके इल्म में से किसी का भी
49:51सिवाज के जो वो खुद चाहे
49:53यहां बड़े ही लतीफ अंदाज मे
49:55शवात बातला के तस्वर की नफी हो गए
49:58देखिया आप कहीं जाकर
50:00किसी मेजिस्ट्रेट से सवारिश करते हैं
50:02तो क्या कहते है अजी ये फाइल के उपर
50:05जो कुछ है आप इस पर ना जाएए
50:07ये गवाहियां वगारा जूटी हो गई है
50:09मैं आपको बताता है वह असल बात क्या है
50:11अल्ला के सामने को ये कह सकेगा
50:14एल्ला तेरे इल्में नहीं ये बेरे इल्में है
50:17या लग मा बैन आदीहिं वा मा खल्में
50:20वो तो जानता है जो कुछ उनके सामने और जो कुछ उनके पीछे है
50:23और इल्मे से कोई बी
50:30जैसे कि मैं अभी बता चुका हूँ
50:32बेरेल भी बग्चा में फिक्र भी
50:33कह रहा है कि ALLAH का दिया हुआ علم है
50:36महम्मद u रसुल ला का जितना है
50:37ला महदूद नहीं है महदूद है
50:39अधीम नहीं है अदिस है
50:42तो जितना ALLAH चाहता है जिसके लिए जितना चाहता है
50:44लेकिन उसके इल्म में से इहाता नहीं कर सकता कोई
50:48मगर जो वो चाहे
50:49वसे अकुर्सियुह समावाते वल्लड
50:54उसका इक्तिदार चाया हुआ हुआ है
50:57मस्तौली है आस्मानों पर भी और जमीन पर भी
51:00वला यओदुहु हिफ्सुहुमा
51:03और उसे आजिस नहीं कर सकती उन दोनों के हिफाज़त
51:08कयूम वो ही है समद वो ही है
51:11लेकिन उसे कोई तकान तारी नहीं होती आजिस नहीं होती
51:15यह असल में नफी है
51:17जो तौरात हाफ़से से दुरत्ब की गई थी
51:23587 में नबू कर नजर का जो हमला हुआ था
51:27उसमें असल तौरात गुम हो गए उस वक्त से आज तक वो असल तौरात इनके पास नहीं है
51:32पिरियड ऑफ कैप्टिविटी से वापस आए है
51:36मेतल मुकद्स में साइरस के लुट्फो करम की वज़े से
51:41जुल करनें के लुट्फो करम की वज़े से
51:43फिर याद दाश्टों से लोगों ने वो तौरात मुनत्ब की है
51:47तो उसमें इनसानी फिक्र शामिल हो गया है
51:50लहादा वहां ये लिखा है
51:54अल्ला ने छे दिनों में आसमान और जमीन पैदा किये
51:57और साथ में दिन आराम किया
52:00यानि कोई तकान लाइक हो गए
52:03गुरान ने कहा
52:05अल्ला ताला ने फरमाया सूरह काफ में
52:07यकिनन हमने आश्बान और जमीन और जमीन और जमीन और जो कुछ उन दोनों के माबेन है
52:17उन्हें छे ही दिनों में पैदा किया
52:19वह माठ ठीक है
52:20लेकिन हमें कोई तकान लाइख नहीं हुई कि हमें किसी आराम की जरूरत है
52:24ला यवदहू हिब्सुमा वहू अल्यू लाजीम अल्यू वही है
52:30सबसे बलंद उ बाला
52:32ले तकूल कलिमत उल्लाही ही अल्यू ताकि अल्ला का कल्मा सबसे थर बलंद बो जाए
52:39और वही आजीम है अस्मत वाना
52:41अपने साबिका जिन्दगी के गुनाहों पर तौबा करने की
52:50और अपने दीनी फराइज की अंजाम जही के लिए कमर बस्ता हो जाने के
53:01अज्म मुसम्म कर लेने की तौफिक अपना फर्माएए
53:04अब हम सवालात का सेशन शुरू करते हैं
53:14पहला सवाल है
53:15अगर किसी मुसल्मान को ये नहीं मालूम हो
53:21कि वो जो कर रहा है वो अमल शिर्ख है या नहीं
53:26तो क्या उसका ये शिर्ख माफी के चाबिल होगा
53:29तेखिए अगरचे कानून तो ये है दुनिया का
53:35इग्नूरंस ओफ लौ इस नो एक्सक्यूस
53:39कानून से अदम वाख़ियत कोई उजर नहीं है
53:44कानून तो फिर पढ़ता है
53:46लगता है लागू होता है आईद होता है
53:49अगर अल्ला के हाँ ऐसा नहीं है
53:52वो हर शक्स से उसके अपने हालात के इत्वार से हिसाब लेगा
53:58किन हालात में पैदा किया गया
54:03क्या जीन्स उसको दिये गए थे
54:05किन हालात में वो पला बढ़ा है
54:08उसके अन्वराइन्मेंटल फैक्टर्स क्या थे
54:10फिरिये के जिन लोगों की जिम्मेदारी थी
54:14के उसे दीन का पैगाम पहुँचाए
54:17उन्होंने कोताही की
54:18और अगर उसकी वज़े से ये ला इल्म रहा
54:23और उसने बात को नहीं समझा
54:25तो मैं समझता हूँ
54:26अल्ला ताला नर्मी फर्माएंगे
54:28बागी ये के बख्षिश
54:30या सदा देना
54:32ये अल्ला का इस्तियार मुतलग है
54:34हम कुछ नहीं कह सकते
54:37अल्ला ताला अबू जहल को बख्ष दे
54:40हम इतराज नहीं कर सकते
54:41उसकी मखलूक है जो चाहे करे
54:43अल्ला ताला किसी नेक से नेक आदमी को
54:46अड़ों में डाल दे वो कर सकता है

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