00:00दिल्ली के मेजर ध्यानचंदर नैशनल स्टेडियम में शब्दोच्सो दो हजाल चब्वीस का समापन हो गया. इस तीन दिवसिये भव्य साहतिक उत्सों में कला, साहतिय और सुरों का भव्य संगम देखने को मिला। अध्वुदै भारत थीम पराधारित इस साहतिक महुस्�
00:30और अंतिन दिन साहतिय, सिनेमा और राजनीती समेत कई महतपूर्ण मुद्दों पर वक्ताओं ने अपने विचार रखे। वहीं दिल्ली वासियों ने सोमनाच से पधारे शिवलिंग के अलौकिक दर्शन भी किये। वहीं सांस्कृतिक संध्या में साधो बैंड और फेमस
01:00के विस्तार को वर्तमान समय की जरूरत बताया।
01:30कारिकरम के आयोजक सुरुची प्रकाशन के चेर्मैन राजीव तुली ने शब्दोस्सों के इन तीन दिनों में जैंजी की भागिदारी को अध्भुत, अकल्पनिये और अविश्वस्निये बताया। साथ ही हर वर्ष सब्दोस्सों के आयोजन का संकल्प दोहराया।
01:50अध्भुत, अकल्पनिये और अविश्वस्निये।
01:55हमें कभी नहीं सोचा था कि कला साहित्ते और संगीत में लोगों की इतनी रुचिये और वो भी जैंजी की जिस जैंजी को लोग माने पता नहीं क्या-क्या कहते रहें, क्या-क्या कहते हैं।
02:08उस जैंजी की भक्ती, उस जैंजी की शक्ती इस तीन दिन के कारिकरम में दिखी है और मुझे लगता है कि एक अध्भुत कारिकरम ये हुआ है तीन दिन का और इसकी जो याद है वो अगले वर्ष तक जीवित रहेगी और जब अगले वर्ष फिर होगा तो उससे अगले व
02:38अद्भुत और आविश्मर्नी ये अनुभव दे गया