00:00यह वर है वस्त्रों से तो यह भिच्चुक लगता है इसके वस्त्र किते मलीन है इनमे और दिशन्तारया में तो धरा और गघन सांतर है
00:11अईसे शुब समारंभ में उत्तम वस्त्र धारन कर सकते थे। समस्त अतितिगणों के समक्ष तुमने हमें उपहास का पात्र बना दिया है।
00:21पिताश्री सही कह रहे है। तुम वर के समान दिखते ही नहीं। विवा के अफसर पर कम से कम अच्छे वस्त्र तो धारन कर लेते। ना जाने मेरी भेन ने तुम्हें वर के रूप में क्यूं चयानित किया।
00:34हमने वीर्दत्ता का चयान उनकी बस्त्रों को देखकर नहीं किया है। पर हमें आशा है कि वीर्दत्ता के संग हमारा जीवन सुख में होगा।
00:44आती उत्तम, आती उत्तम, परिवार के सम्मान का क्या ध्यान रख़ा है तुमने वसुंधरा, वाह।
00:51क्रोध त्याग दीजिए। विवाह के पश्चात हम वसुंद्रा से समस्त संबंद समाप्त कर देंगे।
01:00ये ये तो बदाई हो भविंद्र जी आपके दोनु जमाता उत्तम है।
01:15धन्यवाद मंत्री जी, कृपा करके यहां पधार ये। वर्माला की प्रक्रिया आरंब की जाए।
01:34तुम आज भी पैदल ही चलकर आए हो। क्या अपनी पतनी को भी पैदल ही रेकर जाओगे।
01:40सही बात है, सबको मेरे पती जैसा।
01:47वसुंधरा, अब हम दोनों को चलना चाहिए।
01:51क्षमा करना।
02:08मेरे कारण तुम्हें यहां रहना पड़ रहा है।
02:11यदि ये घर हमें वर्शा और धोप से बचा सकता है, तो ये बहुत है।
02:17हम दोनों मिलके इस कुटिया को ही अपना महल बना देंगे।
02:20मेरे पास तुम्हें उपहार देने को कुछ नहीं।
02:22परंतो ये रत्नम मेरे पिदाश्री की अंतिम उपहार था मेरे लिए।
02:26मृत्य उसे पूर्व उन्होंने हमें ये दिया था।
02:30इसकी रक्षा करना।
02:32ये वस्तु हमारे लिए अमूल है।
02:34हम इसे सदैव अपने हिर्दय से लगाके रखेंगे।
02:38हमने आपके भूजन के विवस्ता कर दी है।
02:52हमारे कुल की पुरानी परंपरा के अनुसार,
02:55विवाग के बाद लड़की वापस अपनी घर जाती है।
02:59इसलिए हमें वर्धन निवास जाना होगा।
03:02हमने काका काकी के लिए उपहार भी जयार कर लिये हैं।
03:07मैं तुम्हारे साथ शलूँगा।
03:10महराज।