00:00एक नगर के बाहर एक जील थी, हर पूर्णिमा की रात वहां एक यूफती बैठती, 28 वर्षिय कविता, वो ध्यान
00:08करती, घंटो, उसके दोस्तों ने पूछा, पाटी छोड़ कर जील किनारे क्यो बैठती हो, यहां शान्ती मिलती है, पर क्या
00:17पाती हो, सब कुछ जो बाकी ज�
00:23कविता ने कहा, बस पांच मिनट आखे बंद करो, वो बैठे, पांच मिनट बाद कोई नहीं हिला, चांदनी थी, जील
00:34में प्रतिविम था, सन्नाटा था, आधे घंटे बाद एक दोस्त बोला, पहली बार ऐसा महसूस हुआ, क्या, जैसे सब ठीक
00:44है, शिक्षा, सनातन धर्म
00:47में ध्यान, मेडिटेशन, आतमा की स्वाभाविक स्थिति है, जब मन शान्त हो, तब परमातमा की अनुभूति होती है, चंद्रमा का
00:56प्रकाश, जल का सौंदर्य, ये सब इश्वर के रूप है, प्रकृति में ध्यान करना सनातन की परमपरा है, ओम शान्ति