00:00तमसा से बच सकते हो, क्योंकि कभी ना कभी तो नशा उतरेगा, कभी ना कभी तो रात बीतेगी, कभी ना
00:10कभी तो कीचड गंधाएगा,
00:14तमसा तूटेगी तूटेगी, जैसे सारी नीदे तूटती है, और रजस से भी बचने की संभावना है, क्योंकि तमसा में नीद
00:28तूटती है, और रजस में टांग तूटती है, इतना दौड रहे हो, कभी ना कभी तो, ठकोगे,
00:39दौडत, दौडत, आगे क्या बोलते हैं, दौड दौड मन ठकी गया, कभी ने कभी तो ठकोगे, कितनी बेईमानी बरदाश्ट कर
00:51लोगे अपनी है, कभी ने कभी तो दिखाई देगा, कि दौड दौड के सिर्फ जखम पा रहा हूँ,
00:58तो राजसिक्ता के भी तूटने की स्वयमेव कुछ संभावना रहती है, इमानदारी पर निर्भर करता है, बाकी तो, लेकिन ये
01:10सात्विक्ता जो है, ये बड़ी बुरी बला है, ये नहीं तूटती, इसके साथ तो अटूट कहानिया जुड़ी हुई है,
01:21राजसिक्ता तूटती है, तो एक आशा रहती है कि अभी उपर कुछ है न, क्या है, सात्विक्ता, और जब उपर
01:30कुछ है तो नीचे वाला छोड़ना थोड़ा आसान भी हो जाता है, पर अहंकार अगर सतोगुण को छोड़े, तो पकड़े
01:38क्या, इसलिए उसको नहीं छो�
01:42जो एक बार सात्विक हो गया, उसको बचाना बड़ा मुश्किल है, बहुत मुश्किल है, क्योंकि अब अगर सत्वी छोड़ा, तो
01:52पकड़ोगे क्या, सीड़ी का आखरी सुपान है, उपर अब बस आकाश है, और नीचे खाई है, दोनों ही दिशाओं में
02:01हमकी मृत्यों है
02:03तो वहीं जम के बैठ जाता है, ग्यानी बाबा हो गया अब वो, अब वो सात्विक आचरन करेगा, शुद्ध विचार
02:12रखेगा, नाडा जम के बांदेगा, और ब्लेसिंग्स देता फिरेगा, ऐसो के पास जाओ बड़ी समस्या रहती है, उसीधे हाथ बढ़ाते
02:28हैं सर के �
02:29पर रखेगा
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