00:03नमस्कार मैं हूँ शम्स ताहर खान तो चलिए आज वारदात मैं आपको फिल्म दिखाता हूँ डिरेक्टेड और प्रोड्यूस बाई यूपी
00:11पुलिस इस फिल्म की कहानी अलग-अलग राइटर पुलिस वालों ने लिखी है लेकिन इससे फिल्म की मूल कहानी पर
00:18कोई असर
00:19नहीं पड़ता हाला कि फिल्म का सब्जेक्ट इनकाउंटर है लेकिन इसके बावजूद आप सभी को ये फिल्म इसलिए देखनी चाहिए
00:27क्योंकि एक महान पारिवारिक और सामाजिक चलचितर है वैसे परसनली इस फिल्म में मुझे दो सबसे अठी चीज लगी एक
00:35इसके �
00:35डायलोग और दूसरा एक्शन तो पेश यूपी पुलिस प्रेजेंट्स एनकाउंटर
00:45कैमरा रोलिंग आक्शन
00:54कसम उडान जल्ले की लगता ही नहीं है कि यूपी के इन पुलिस वालों ने शायद कभी किसी पुलिस ट्रेनिंग
01:01अकेडमी से ट्रेनिंग भी ली हूँ
01:04इन्हें देखकर बस यहीं गुमान होता है जैसे ये सब के सब वो कलाकार है जो एनस्डी से पास आउट
01:11है
01:14एनस्डी बोले तो नैशनल स्कूल अव ड्रामा मजाक नहीं कर रहा हूँ
01:19अब आगे आपको जो फिल्म दिखाने जा रहा हूँ
01:22उसे देखने के बाद आप भी इनके लाइट कैमरा एक्शन और डायलोग के फैन हो जाएगे
01:27तो चलिए चलते हैं यूपी पुलिस की सबसे ताजा तरीन फिल्म की शूटिंग लोकेशन
01:34है लोकेशन है इटावा का एक सुनसाम इलाबा लाइट क्यामरा रोलेंग एक्शन
01:55सीन दो खेतों के बीच एक कच्ची पक्की सड़क का है एक शक्स इसी कच्ची पक्की सड़क पर पूरी तरह
02:02लेटा हुआ है
02:03एक पुलिस वाला उसके दाहिने पैर पर सफेद पट्टी बांद रहा है सामने एक दूसरा पुलिस वाला है जिसके हाथ
02:11में मोबाईल है
02:12कैमरी के दूसरी तरफ कोई दूसरा पुलिस वाला है जो इस सीन को शूट कर रहा है
02:18दूसरा पुलिस वाला अपना मोबाईल शायद उसी को सौप कर वापस फिर से फ्रेम में आ जाता है
02:26अब पट्टी बन चुकी है, पट्टी बांदता पुलिस वाला अब खड़ा हो चुका है
02:31पहले कैमरे की तरफ देखता है, फिर जमीन पर पड़े कट्टे की तरफ
02:35कट्टे के आगे दूसरा सिपाही शायद घलती से खड़ा हो गया
02:39उसका सीनियर उसे कट्टे के पाथ से हटाता है, ताकि कैमरे मेर कट्टे को अच्छे से शूट कर सके
02:47अब वही पुलिस वाला जमीन पर पड़े शक्स का दाइना हाथ पकड़ कर उसे उठा कर बिठा देता है
02:53सीन ही यही था, कि उसे तब तक लेटे रहना है, जब तक पुलिस वाला खुद हाथ पकड़ कर उसे
02:59उठाए नहीं
03:01लेटा बंदा बैट चुका है, अब बारी डायलोग की है, और ली जी, डायलोग शुरूँ
03:22टायलोग थोड़ा लंबा है, पर सुनिये, मज़ा है लगा
03:27डायलोग के बीच बीच में, डायलेक्टर ने कुछ अच्छे सीन भी डाले है, ताकि आपकी नजरें बस स्क्रीन पर ही
03:33गड़ी रहे
03:41क्या ना हुए, मुकेस जयादत, जी सार, हिता जी का, हराम नई सियाद � doing this, क्यों पूलेश भाग रहे
03:51थे, क्या की ते ते रहे हैं, जाल रहे चलेटि mana
04:00किसका किसका वो लड़की दो लेडीज था उसमें सब्सक्राइब इसलिए इसलिए इसलिए पुलिस चिकें देर के भाग रहे थे हैं
04:09जी सर दर गए जी सर अच्छा
04:34अच्छा इसमें क्या है राओन नहीं सर और कुछ है नहीं सर
05:20तो देखा बीच में कितनी मासूमियत से पुलिस वाले ने गिरे बैठे शक्स की जेब से कट्टे की तो देखा
05:26बीच में कितनी मासूमियत
05:26गोली भी ठोन ली जमीन पर दाहीने पैर में गोली खाकर घायल बैठा ये भी कम कलाकार नहीं है चेहरे
05:34और आखों से ही घजब की आक्टिंग कर रहा है
05:39अब इसी सीन का सबसे खोबसूरत सीन सामने आता है हमेशा की तरह दो पुलिस वालों के सहारे गोली खाय
05:46शक्स का यू लंगणाते हुए चलना
05:50सीन में एक प्रॉप्स भी है एक स्कूटी जो पलटी पड़ी है अब पूछेगा मत भाई इंकॉंटर तभी तो होता
05:58है जब आप रादी भाग रहा होता है और अपने यूपी में कोई भी इंकॉंटर उठा लीजे अप रादी हमेशा
06:05या तो मोटर साइकी पर होगा या स्क
06:17कूटी के सीट के नीचे से बाकाइदा हरी पन्ने के अंदर से पाँच पाँच सो के हरे हरे नोट भी
06:23बाहराते है गाड़ी में कुछ है
06:42इसे बिंखिए की कहा है चैके ने कि अशेतने बिंखिभे थीमाच सी और दातुर आज भी फ़कर देती है
07:22कितना रुपया है ये जाज होगा होगा किदना होगा नहीं होगा जोगा देस पन्न होगा भाकी होंगा है
07:30अब इगनुआ लेका हुआ है है इसको रख के बीगिनते हैं यह कितना है यह यह बड़ी है दो तीन
07:44चार
07:49को इस चेज़ चाहर रहा है जार कितना होगा कितना होगा इस पर नागा
08:03इसके बाद थोड़ी हल्की फुल्की कप्षप होती है
08:13वो भी एकदम सहाथ पूर्ण महौल में फिर सीन खत्म हो जाता है
08:21अब इस फिल्मी सीन से बाहर की हकीकत यह है
08:24कि 17 अगस्त कोई टावा के भरतना थाना इलाके में एक माँ बेटी का मडर हो जाता है
08:30बाद में चेकिंग के दौरान पुलिस एक आरोपी को पहचान कर उसका पीचा शुरू कर देती है
08:35और वो बेवकूफ आरोपी भी सड़क हाईवे बाजार छोड़ इस उनसान खेत की तरफ भागने लगता है
08:43सन्नाटे में गोली चलाने की माहिर यूपी पुलिस हमेशा की तरह ओलंपिक वाला निशान रह लेती है
08:49और सीधे दाहिने पैर में ठीक उसी जगह गोली जाकर लगती है
08:54ठीक जहाँ पर इस वक्त हजार से ज़्यादा अपराधियों के पैरों में गोली लग चुकी है
09:12सल्ली से मौके पर ही पूछताच हो रही है सब रिकॉर्ड हो रहा है तयारी इतनी है कि पुलिस वालों
09:18को पहले से ही पता होता है कि आज इनकॉंटर करना है
09:21इसलिए पटी भी अपने साथ लेकर चलते हैं पर सवाल ये है कि हमेशा इनकॉंटर के बाद का वीडियो बनाने
09:28वाली यूपी पुलिस कभे इनकॉंटर के पहले का वीडियो क्यों नहीं बनाती है
09:33सच कह रहा हूँ, अगर इनकाउंटर के पहले की फिल्म तयार हो जाए तो गैरंटी है, फिल्म सुपर डूपर हिट
09:40होगी
09:41खैर, जब तक इनकाउंटर से पहले की फिल्म रिलीज हो, इनकाउंटर के फौरण बात की कुछ और फिल्में देखते हैं
09:48यह अलग-अलग वक्त की हैं, इटावा के बाद अगला लोकेशन अपना पुराना बनारस यानि नए वारणसी का है
10:14सीन कुछ यू है के एक शक्स जमीन पर पड़ा है
10:17पड़ात्या आराम से लेटा हुआ है, इसके बाएं पैर में घुटनों के नीचे नीले रंग का एक कपड़ा बंधा है
10:23बाईं तरफ इस सर के बराबर में एक बैग रखा हुआ है, आसपास कुछ पुलिस वाले हैं, चुकि ये एक्शन
10:30सीन है, लहाजा ये पुलिस वाले भाई साहब हाथ में पिस्टल पकड़े हुए हैं, अब चलिए, डैलोग के साथ इस
10:41पूरे सीन को समझते हैं, सीन के चक्क
10:53है, स्ँ और के को भी ध्यान से सुन ये ऊके, अके, नम है, उदीगा इस, हाँ HEY NEADE, relatively
11:07Быक, वे इसकीन को, बैग निकलो, जाहिब को ये शिछा करो, पहने क्या रहानाने है, ईक कि ध्वान опас शेख
11:22करें हैं
11:23खुल लो इसको खुल एकुल एकुलर निकाल इसको फजी लिए विद्धिक लेगी देखी इसमें क्या है तहां का समान है
11:37किसके मंदिर का मंद जी कौर महांत जी करें का नाम क्या है
11:48कि शूटिंग शुरू होने से पहले गोली खाए इस बदमाश को शायद उसका डायलोग अच्छी तरह याद कराया गया था
11:55इसलिए क्या मजाल जो वो दूसरा टेक देता
12:03बाएं पैर पर गोली खाय अपराधी के बैक से कितनी आसानी से चोरी का माल बाहर निकलाता है कैसे वो
12:10अपना जुर्म कबूल करता है यह तो आपने देख सुन लिया अब बारी अगले सीन की है तो चलिए सीन
12:17शुरू करते हैं
12:37और इस तरह पहला सीन पूरा हुआ इस फिल्म में सपराधी का रोल बस इतना ही था पर अगली लोकेशन
12:44की तरह बढ़े उससे पहले कुछ देर के लिए यह जरूर याद रखिये
12:48कि जामा तलाशी के दौरान इसकी बाइंग जेब से एक चेन के साथ साथ एक रॉंग यानि एक कार्टूस मिला
12:55है कार्टूस वाली बात भूलिएगा मत आगे की फिल्म देखने के दौरान ये काम आएगा तो चलिए अब दूसरी लोकेशन
13:03पर चलते हैं
13:19दूसरी लोकेशन पहली लोकेशन के बस बराबर में है थोड़ा सा कैमरा एंगिल चेंज हुआ और कैरेक्टर कैमरे में कैट।
13:29जमीन पर लेटा ये क्रिमनल कलाकार पहले वाले के मुकाबले कहीं ज्यादा बहतर अक्टर नजर आ रहा है
13:35चारों तरफ पुलिस हैं पुलिस के पास हत्यार लेकिन इसके इत्मिनान का आलम देखिए चारों तरफ से पुलिस से घिरा
13:42होने
13:42और दाएं पैर में गोली खाने के बावजूद बड़े आराम से सिर्क नीचे हाथ रख कर बेफिक्र लेटा हुआ है
13:58अब चलिए डायलोग के साथ इस सीन को समझते हैं तो यह दूसरा सीन भी लगबक पहले वाले सीन जैसा
14:16ही था पहले वाले के बाएं पैर में गोली लगी ती इसके दाएं पैर
14:20उसके पास भी एक बैग था जिसके पास भी एक बैग है उस बैग में भी चोरी का माल इस
14:26बैग में भी चोरी का माल बस फरक इतना था कि इस सीन में इस अपराधी के खड़ी एक कट्टा
14:31पड़ा हुआ था जिसे सर्कल में दिखाया गया है
14:34अब पहले सीन के तरही बैक की तलाशी के बाद इसकी भी जामा तलाशी ली जानी है
14:39जामा तलाशी का ये सीन अब शुरू होता है
14:56इसे भी दो पुलिस वाले सहारा देकर खड़ा करते हैं
14:59अब जामा तलाशी शुरू होती है इसकी जेब से भी मुबाईल परस पैसे सब मिलते हैं
15:05पर तलाशी ले रहा पुलिस वाला शायद अपना सीन ठीक से नहीं समझ पाया था
15:09सारी जेब में टेटोलने के बाद भी वो एक चीज अभी तक निकाल नहीं पाया था
15:14जो डारेक्टर कैमरे पर दिखाना चाहता था तब डारेक्टर को खुद बोलना पड़ता है
15:21ये वाला जेब निकालो ना खोलो इसमें क्या है
15:33और डारेक्टर के बस इतना बोलते ही अचानक उसी जेब से एक जिन्दा कार्तूस बाहर आ जाता है
15:44इटावा से अमिद कुमार तिवारी के साथ आज तक बेरो
15:51अब क्रिटिक्स का तो काम ही है फिल्म में गल्तियां ढूनना
15:55लेकिन इस फिल्म के रिव्यू के दौरान आपको इस बात का ख्याल रखना होगा
15:59के फिल्म न बाहू बली फेम राज मौली ने बनाई है और नहीं थ्री इडियेट वाले राज कुबार हीरानी में
16:06इसलिए रेटिंग देते वक्त इस बात का ख्याल ज़रूर रखेगा
16:10तो चलिए अब इंटरवल के बात की फिल्म देखते हैं
16:29राज का अंधेरा है पर कैमरे में एक एक कर कुल आठ लोग नज़र आ रहे है
16:34फ्रेम में शायद आगे आगे एक ऐसा पुलिस वाला चल रहा है जिसके हाथों में टॉर्च है
16:39लहादा सामने से आठों पर रोशनी भी पढ़ रही है
16:42आगे आगे इंस्पेक्टर साहब नज़र आ रहे है
16:45उनके हाथ में मोबाईल है और मोबाईल का फ्लेश ओन
16:49इन पुलिस वालों के बीच एक लड़का है जिसे दो पुलिस वाले सहरा देकर आगे ले जा रहे है
16:55तभी इंस्पेक्टर साहब आगे देखते देखते अचानक पीछे की तरफ देखते और पहला डायलोग बोलते हैं
17:05इस्क्रिप्ट राइटर डायलोग सिर्फ तीन शब्द का लिखा था सब ठीक है
17:14लाइस कैमरा रोलिंग आक्शन
17:28पहले ही टेक में पहला सीन ओके हो जाता है अब इसके बाद दूसरा सीन शुरू होने वाला है
17:34फ्रेम अब भी वही है लाइटिंग भी वही लेकिन इससे पहले की एक्शन शुरू हो
17:39अचानक इंस्पेक्टर साहब जो शायद खुद इस वक्त डायरेक्टर की भूमिका में भी थे
17:44कैमरा में की तरफ इशारा करके कहते हैं रुख जाओ
17:51इंस्पेक्टर से अचानक डायरेक्टर बन गए इनके आदेश पर ताइदे से कैमरेमेन को रुख जाना चाहिए تھا
17:59लेकिन कैमरेमेन को भी शायद अंदाज़ा नहीं था
18:02कि इंस्पेक्टर साहब अब वो डायलोग बोल जाएंगे
18:05जो इस क्रिप्ट में कहीं है ही नहीं
18:07अब जो की सीन सेरियस था
18:09तो भला कیरेक्टर हसेगा की
18:11लेकिन शायद इंसपेक्टर साहब को
18:13इस आक्टर पर भरोसा ही नहीं था
18:15इसलिए वो इस क्रिप्ट से बाहर निकलकर
18:17पैर में गोली खाए
18:19पुलिस वालों के ही कंधे पर हाथ रख कर लंगणा कर चल रहे इस अदाकार से कहते हैं हसना मत
18:31लीजिए ये दूसरा टेक आप भी सुना
18:42पता नहीं इस फिल्म की पटकथा किस ने लिखी और ये फिल्म बनाने का आइडिया किस का था
18:47आडियन्स अब इतनी भोली नहीं रहे सीन देखकर कहानी समझ जाती है
18:51अब आप ही बताएं एक्टर को दाए पैर में गोली लगी है ठीक से चल भी नहीं पा रहा है
18:57दो पुलिस वालों के कंदे पर हात रख्या हुआ है जाहिर है दर्द में होगा आखिर पैर में पुलिस की
19:03गोली जो लगी है
19:04अब ऐसे शक्स को जो खुद तकलीफ में हो इंस्पेक्टर साहब को ये क्यों कहना पड़ रहा है कि हसना
19:10मत
19:10अमोवन ऐसे डायलोग मुंबईया फिल्मों में बोले जाते हैं वो भी शूट शुरू होने से पहले क्योंकि वहाँ गोलिया नकली
19:18होती है और इंकाउंटर भी फरजी हो
19:23तो क्या यहाँ इस फिल्म में भी ये सब कुछ क्रियेट किया गया था
19:28सरकारी गोली खाने के बाद भी कोई कैसे हस सकता है खैर हटाईए यूपी पुलिस की अपनी फिल्म है चाहे
19:35जैसे शूट करें और जो भी डायलोग बोलें अपना क्या बैसे इस फिल्मी कहानी की असली कहानी इतनी ही है
19:42कि इस फिल्म में ये जो एक्टर है इस पर एक किड्
19:56पुली चलानी पड़ते है हाला कि पूरी फिल्म रिलीज होने से पहले ही जैसे ये विडियो सोशल मीडिया पर वाइरल
20:09हुआ तो इंस्पेक्टर साहब के बॉस सीयो साहब घजब की सफाई कहा असल में इंस्पेक्टर साहब गोली खाय शक्स को
20:17नहीं बलके पुलिस वालों
20:18को यह कह रहे थे कि हसना मत है अब इस फ्रेम को देखकर आप ही बताई कि जब इंस्पेक्टर
20:27साहब हसने के लिए मना कर रहे हैं तो उनकी उंगली किसकी तरफ उठी हुए कमाल है सियो सब्सक्राइब
20:48अब इस लोकेशन से निकल कर एक दूसरी लोकेशन पर चलते हैं इस बार का लोकेशन बरेली शूटिंग दिन की
20:56रौशनी में हो रही है
20:57पहला सीम शुरू होता है फ्रेम में कुल छे लोग नज़र आ रहे हैं इन में से जाहिरे पांच पुलिस
21:03वाले हैं दो के हाथ में तो सरकारी पिस्टल भी नज़र आ रही है बीच में एक लड़का है इसके
21:08भी दाएं पैर में पट्टी बली हुए दाएं पैर में ही गोली म
21:25गजब ये कि गोली खाने के बाद ये लड़का नसर्फ दर्द से करा रहा बलकि बड़ी मुश्किल से जमीन पर
21:32पहर रखकर चल रहा पर क्या घजब का एक्टर है या फिर ये भी कह सकते हैं कि यूपी पुलिस
21:38के डायरेक्टर इसे क्या घजब का एक्टर बना दिया है दर्�
22:07अब चाहे शूट जैसा भी हुआ लिकिन यहां इस डायलोग की दात तो दे नहीं पड़ेगी यूपी पुलिस के जिस
22:14कलाकार ने भी ये डायलोग लिखा है सलाम है उसको दिल जीत लिया क्या डायलोग लिखा है दोबारा कभी यूपी
22:21में नहीं आएंगे सर कभी
22:23कभी नहीं आएंगे सर बाबा जी के पुलिस के आगे कभी नहीं आएंगे सर अबस दृबारा सुनता है तो लीजित
22:33आप भी मजे दीजिये
22:47वैसे हमें पता है कि आप सब को भी हम इने � zabapo यूपी में नहीं आएंगे सर यह बताने
22:52की जरूयरत नहीं
22:53बस आप मज़े दीजे
22:57इटावस है अमिद कुमार दिवारी के साथ आज तक बेरो
23:04उमीद है आपको ये फिल्म जरूर पसंद आई होगी
23:07यूपे पुलिस का होसला बढ़ाने के लिए इस फिल्म को अथी रेटिंग जरूर दीजेगा
23:11तो फिलाल वारदात में इतना ही
23:13मगर देश और दुनिया के बाकी खबरों के लिए आप देखते रही आज तक
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