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  • 2 days ago
मान्यता-खिचड़ी के दो बंटे हिस्से बदले हैं गौरी केदार और विष्णु-लक्ष्मी, केदार का दो बार नाम लेने से ही मोक्ष प्राप्ति

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Transcript
00:00Kashi Vishweshwar की नगरी है और बाबा विश्वनात की नगरी में मोक्ष के लिए लोग आते हैं
00:05मोक्ष दाइनी Kashi तीन भागों में विवाजित है जिसमें Vishweshwar, Omkaraishwar और केदारishwar ये तीन खंड माने जाते हैं
00:12उनमें सबसे महत्वकूर हो जाता है केदारखंड
00:15हम इस वक्त जिस स्थान पर खड़े हैं वो केदारखंड का ही गुरु स्थान है जिसे गौरी केदारश्वर के नाम
00:22से जाना जाता है
00:23गौरी केदारश्वर काशी में वह अधभुत शिव मंदिर है जो साक्षात हिमाले के ही उस रूप में विज्जमान है जहां
00:32बावा केदारश्वर नार विराजते हैं
00:34The fact is that at the point of hope that the ship and the ship are not only the ship,
00:39but the ship and ship by the ship are being given.
01:26. . . .
01:29जाना जाता है जहां दूर दूर से लोग आते हैं और मोक्ष की कामना के लिए शिवलिंग का पूजन करते
01:35हैं
01:36जी गौरी के दारश्वर की कता यह है कि सत्यू की कता है उस समय हिमाले परवत पर स्वरोभाव महराजा
01:42मानदाता जिनकी कृषिगता पुराणों में महायोगी महादानी और अपने पिता के कुछ बेदन से जन्न प्राप्ति की रूप में उन्होंने
01:50जन्म लिया है
01:51मानदाता जी जो थे वो अपने मा के गर्व से ने पिता के गर्व से उन्होंने जन्म लिया आता हिमाले
01:56परवत पर सो युगो तक वहा तब करते रहे कि हे प्रभू हमें शिव की लिंग की दर्शन हो तब
02:01ही आकासवानी से प्रेणा होती है आप कासी जाके तब पुजन करो ल
02:17चुछी को देखेंगे तो वह दो भागों में भी भगत है मकर स्क्रान्ती का विश्व प्रहणों मनाते हैं कि ली
02:22मकर शक्रांती की दीन उश्याकाल मद्ध में
02:24जब उन्होंने खिचली को दो भागों में किया तो यही खिचली पाशाण हो गई पत्थर की राजार्च चचकीत रगए बोले
02:29हे प्रभु अमारी खिचली जो है वहाँ पाशाण रुपी भग तो गई है अर्थात अतिती भी मेरे द्वार पर आ
02:34चुका है मुने क्या खिलाओ
02:36शिवा पारवती अतिती रुप्त्याग करके प्रसंद होकर उन्हें दर्शन देते हैं बोलते हे भग यहाँ पाशाण वद खिचली ही शिवलिंग
02:42हो गई है अर्थात इसे दो भाग में हो जाने से यहाँ हरी हरात्मक और शिवशत्यात्मक भी कहलाएंगे अर्थात अन्य
02:48
03:01पूजन कर रहे हैं तो शिवकों ने पूसते हैं शिव और विश्णो दोनों एक बराबारे दोनों की तुलना की नहीं
03:05जा सकती इसलिए शिव पारवती ने इस लिंग में विश्णो लच्मी का भी आवाहन किया है और च्यार युगों में
03:10इनके चार रूप हैं सत्युग मे
03:11नवरत में, त्रेता युग में स्रण में, द्वापर में रजत में, कल युग में शिला में होकर यह शुमनों कामनाओं
03:17को कूंड करेगी यहां शिवलिंग धर्म अर्थ काम में मोख्ष चारों चीज़े परदान करने वाली है हिमालय के दारना पहाण
03:23साथ वार चलकर के दर
03:41ौम्कारेश्वर, विशेश्वर, विशेश्वर, के दारेश्वर, वमकारेश्वर जो तिर लेंगे, आपके काशी के द्वारपाल के रूप में, पूझे जाते हैं
03:50और जोय आपो वारत जोट दूंर बाखे में करने काम होता है
04:40it comes to right side and we see it in front of the
05:10
05:12.
05:19ुपुपुपुआ
05:42foreign
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