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Sawan Akhiri Somwar Vrat Katha: सावन सोमवार व्रत कथा का पाठ करने से शिव भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. मान्यता है कि इसे करने से संतान सुख, मनचाहा जीवनसाथी, धन-धान्य की प्राप्ति होती है. साथ ही अकाल मृत्यु का भय दूर होता है. यह कथा वैवाहिक जीवन में सुख-शांति और स्वास्थ्य लाभ भी प्रदान करती है.Sawan Akhiri Somwar Vrat Katha: Upvas Rakhne Se Kya Fal Milta Hai ?

Reciting the Sawan Somvar Vrat Katha fulfills all the wishes of Shiva devotees. It is believed that this practice bestows the happiness of children, a desired life partner, and wealth. It also alleviates the fear of premature death. This story also provides happiness, peace, and health benefits in married life.

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~HT.318~PR.111~ED.464~VG.HM~
Transcript
00:00किसी नगर में एक साहुकार रहता था। उसके घर में धन की कमी नहीं थी लेकिन उसे संतान सुक प्राप्त
00:05नहीं हुआ था। जसकारन वो बहुत परिशान रहता। पुत्र प्राप्ती के इच्छा से वो हर सोमवार वरत भी रखता और
00:12पूरी श्वद्धा के सा श्रुमंदर
00:13जाकर भगवान श्रव और माता पारवती की आरातना करता था। उसकी भक्ति भाव से माता पारवती प्रसन हो गई और
00:20भगवान श्रव से उस साहुकार की मनुरत पूर्ण करने का आग्रह करने लगी। पारवती जी की इच्छा सुनकर भगवान श्रव
00:26ने कहा हे पारवती
00:27इस संसार में हर प्राणी को उसके कर्मो कफल मिलता है
00:30और उसके भागी में जो है उसे भोगना ही पड़ता है
00:33लेकिन पार्वती जी ने सहुकार की भक्ती का मान रखने के लिए
00:36उसकी मनोकामना पूर्ण करने के लिए कहा
00:38माता पारवती के आग्रह पर शिव जी ने सहुकार को पुत्र प्राप्ती का अवर्दान दिया
00:42लेकिन साथ ही ये भी कहा कि इस बालक की उम्र केवल 12 साल की होगी
00:46माता पारवती और भगवान अश्रव की बादचीत को सहुकार सुन रहा था
00:50जिसे सुनकर ना तो उसे कोई खुशी हुई और ना ही दुख
00:53वो पहले की तरही शिव की पूजा करता रहा
00:55कुछ समय बाद साहुकार को पुत्र की प्राप्ती हुई
00:58जब वो बालक 11 साल का हुआ तो उसे पढ़ने कले काशी भेजा गया
01:02साहुकार ने पुत्र के मामा को बुलाया और उसे बहुत सारा धन दिया
01:05और कहा कि तुम इस बालक को काशी विद्या प्राप्त करने कले ले जाओ
01:09और मार्ग में यग्य कराते जाना
01:11जहां भी यग्य कराओ वहां ब्रामनों को भूजन करा कर दक्षणा भी देना
01:14दोनों मामा भांजे इसी तरह यग्य कराते और ब्राम्भनों को दान धक्षना देते हुए काशी की तरफ चल पड़े
01:20रास्ते में एक नगर पड़ा जहन नगर के राजा की कन्या का विवाह था
01:23लेकिन जिस राजकुमार से उसका विवाह होना था वो एक आख से काना था
01:27इसकी जानकारी लड़के और उसके घरवालों को नहीं थी
01:29राजकुमार के पिता ने अपने पुत्र के काना होने की बात को छुपाने के लिए चाल सोची
01:34साहुकार के पुत्र को देख कर उसने सोचा कि क्यों ने इस लड़के को ही दूलहा बना कर राजकुमारी से
01:39विवा करा दिया जाए
01:40विवा के बाद इसको धन दे कर विदा कर दूँगा और राजकुमारी को अपने नगर ले आऊंगा
01:44उसने लड़के को दूले के वस्त्र पहना कर राजकुमारी से उसका विवाह करा दिया
01:48लेकिन साहुकार का पुत्र इमानदार था
01:51उसे मौका पाकर राजकुमारी की चुन्नी पर लिख दिया कि तुम्हारा विवाह तो मेरे साथ हुआ है
01:55लेकिन जस राजकुमार के साथ तुम्हें भीजा जाएगा वो एक आँख सिकाना है
01:59मैं तो काशी में पढ़ने जा रहा हूँ
02:01राजकुमारी ने चुन्नी पर लिखी बात अपने माथा पिता को बताई
02:05राजा ने अपनी पुत्री को विदा नहीं किया
02:07दूसरी और साहुकार का लड़कार उसका मामा काशी पहुचे और वहाँ जाकर उन्होंने यग्य किया
02:11जजदन लड़की की आयू 12 साल की हुई उसी दिन यग्य रखा गया
02:15लड़के ने पने मामा से कहा कि मेरी तव्यत कुछ ठीक नहीं है
02:18मामा ने कहा तुम अंदर जाकर सो जाओ
02:20शिवजी के वर्दान उनसार कुछी देर में उस बालक के प्राण निकल गया
02:24मृत्त भांजे को देख उसके मामा ने विलाप शुरू किया
02:26सयोग वश उसी समय शिवजी और माता पारवती उधर से जा रहे थी
02:30पारवती ने भगवान से कहा
02:32स्वामी, मुझे इसके रोने के स्वर सहन नहीं हो रहे
02:35आप इस व्यक्ति के कष्ट को अवश्य दूर करें
02:37जब शिवजी मृत बालक के समीब गय तो बोले कि ये उसी साहुकार का पुत्र है
02:41जिसे मैंने 12 साल की आयू का वरदान दिया था
02:44अब इसकी आयू पूरी हो चुकी है
02:45लेकिन मातरी भाव से विभोर माता पारवती ने कहा
02:48हे महादेव, आप इस बालक को और आयू देने की कृपा करें
03:05दोना चलते वे उसी नगर में पहुचे जहां उसका विवा हुआ था
03:08उस नगर में भी उन्होंने यग्य कायोजन किया
03:10उस लड़के के ससुर ने उसे पहचान लिया और महल में ले जाकर उसकी खातिरदारी की और अपनी पुत्री को
03:15विदा कर दिया
03:15इधर साहुकार और उसकी पतनी भूके प्यासे रहकर बेटे के आने की प्रतिक्षा कर रहे थे
03:20दोनने प्रण लिया था कि यदि उन्हें अपने बेटे की मृत्यू का समाचार मिला तो अपने शरीर को त्याग देंगे
03:25परन्तो अपने बेटे को जीवित होने की बात सुनकर वो बहत प्रसन्न हुए
03:30उसी रात भगवान शिवने व्यापारी के सपने में आकर कहा
03:33मैं तेरे सोमवार के वरत करने और वरत कता सुनने से प्रसन्न हूँ
03:37तेरे पुत्र को लंबी आयू प्रदान करता हूँ
03:39किसी प्रकार जो कोई सोमवार वरत करता है या कथा सुनता है, उसके सभी दुख दूर होंगे।

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