00:29जै जिमूत वाहन
00:31जीतिया में बांस की टोकरी या पीतल तामे की ठाली डलिया में संतान के नाम से फल, अनाज और श्रिंगार
00:38की वस्तुए सजाकर भगवान जी मूत वाहन, चील और सियार को अरपत करें, ये डलिया मा की ओर से संतान
00:45की लंबी उम्र और उन्नती के लिए दिया गया एक पावन �
00:48अरपन यानि की भेट है, अब डलिया में डालना क्या क्या है, इसके लिए सबसे पहले कुछ जरूरी सामगरी ले
00:55हैं, भीका या अंकुरत चना, मकई केराव जीतिया का छोटा खीरा, केला, नारियल्स, सेव शरीफा, अमरूद, मौसमीफल, सिंदूर, रोली, अक्षत,
01:05जी
01:18उस पर हल्दी और सिंदूर से पांच या साथ टीका लगाएं, डलिया के नीचे पान के पत्ते, केले के पत्ते,
01:25अनोने का साग बिच्छाएं, सबसे नीचे भीका या अंकुरत चना, मकई और केराव रखें, उसके उपर मौसमीफल, और जीतिया खीरा
01:33सजाएं, उपर ठेक
01:34हुआ मखाना और नारियल रखें, डलिया के उपर सिंदूर लगाई हुई, सरसो की खली, तेल और जीतिया का धागा रखें,
01:42पूजा के समय डलिया में से थोड़ा थोड़ा अंश निकाल कर चील और सियार के नाम से अलग मिट्टी के
01:47ढेले या पत्ते पर रख दें, इसे त
02:03पूजा कर रहे हैं, तो पूजा से पहले डलिया को भर लें, पूजा संपन्न होने के बाद डलिया में रखा
02:10प्रसाद अगले दिन 4 ओक्टोबर को सुर्वदे के बाद पारण के समय बच्चों और परिवार वालों को बाटते हैं, वह
02:18बच्चे हुई सामगरी को आप किसी �
02:21ज़रुत मंद को दान भी कर सकते हैं, फिलहाल अस वीडियो में इतना ही, वीडियो को लाइक और शेयर करें,
02:27साथी चैनल को सब्सक्राइब करना ना भूलें