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ईद मिलाद-उन-नबी की शुरुआत इतिहास में सबसे पहले कब और किसने की थी? क्या पैगंबर मोहम्मद (स.) या सहाबा के दौर में मिलाद मनाया जाता था? इस वीडियो में जानिए मिलाद का प्रामाणिक इतिहास और साथ ही देखिए कि मिलाद-उन-नबी पर सड़कों पर जुलूस (जुलूस-ए-मोहम्मदी) निकालने को लेकर बड़े-बड़े उलेमा, कुरान और हदीस की रोशनी में क्या राय रखते हैं। पूरी रिसर्च के लिए वीडियो को अंत तक देखें।

When and who started celebrating Eid Milad-Un-Nabi in Islamic history? Was it celebrated during the time of Prophet Muhammad (PBUH) or his companions? In this video, we explore the authentic historical origins of Mawlid and analyze the viewpoints of prominent Islamic scholars regarding taking out processions (Juloos-e-Mohammadi) in the light of Quran and Hadith. Watch till the end.



#MiladUnNabiHistory #JuloosEMohammadi #IslamicHistory #EidMilad2026 #MawlidNabawi

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Transcript
00:00प्रीज रभी अलवल का मुबारक महीना चल रहा है और दुनिया भर में पेगंबर महिम्मद की पैदाइश यानि एद मिलाद
00:10नबी की तैयारियां जोर उपर हैं
00:11और ये दिन 26 अगस्त को मनाया जाने वाला है लेकिन हर साल इस मौक़े पर दो बड़े सवाल उटते
00:16हैं
00:17पहला ये कि मिलाद मनाने की शुरुआत इतिहास में सबसे पहले कब और किस ने की।
00:21और दूसरा ये कि इस दिन सड़कों पर जलूस यानी जलूस मुहम्मदी निकालना इसलाम की रोशनी में सही है या
00:26गलत।
00:26आज के इस वीडियो में हम कुरान हदीस और बड़े उलिमा एक्राम की रोशनी में से जानने की कोशिश करते
00:32हैं।
00:32आईए पहले इतिहास को समझते हैं।
00:34पर्मानिक इसलामी इतिहास कारों जैसे इमाम मक्रीजी के मताबिक पेगंबर सहाब और उनके ठीक बात के दोर यानी सहाबा ताबेईन
00:41के वक्त आज के दोर की तरहां मिलाद मनाने का चलन नहीं था।
00:45इतिहास में सबसे पहले चौथी सदी हिजरी में मिस्तर के फातिमी सामराजे यानी फैटेमेट डाइनस्टी ने इसे सरकारी तोर पर
00:52मनाना शुरू किया।
00:53इसके बात सुनी जगत में साथमी सदी हिजरी के शुरूवाती दौर में एकरा के एरबील के गवर्नर सुल्तान मुझफर अल
01:00दीन गुक बोरी ने बहुत बड़े पैमाने पर उल्माओं को इखटा कर मिलाद मनाना शुरू किया।
01:06इस दोर में मिलाद का मतलब था गरीबों को खाना खिलाना, कुरान की तिलावत करना और नबी की शान में
01:11नाद पढ़ना।
01:36तो सही मुस्लिम की उस हदीस का भी हवाला देते हैं जिसमें पेगंबर साहब से जब पीर के रोज़े के
01:40बारे में पूछा गया तो उन्होंने फरमाया, इसी दिन मेरी पैदाईश हुई थी, कुछ उल्मा कहते हैं कि नबी ने
01:45खुद रोज़ा रखकर अपनी पैदाईश क
01:47शुकर अदा किया, इसलिए हम भी महफिले सजाकर उनका शुकरिया अदा करते हैं।
02:17उनका गयना है कि जलूस में तेज डीजे बजाना, हुरदंग करना, सड़को को बलॉक करना, जिससे मरीजों या रहगीरों को
02:23तकलीफ हो और नमास कजा यानी छूट जाए, शरीयत में इसकी सخت मना ही है, अगर जलूस निकाला भी जाए
02:28तो वो बेहत खामोशी और सादगी �
02:30और नभी की सुन्नत के दाइरे में होना चाहिए, साफ लफजों में कहें तो नभी से महबत करना, हर मुसल्मान
02:36के इमान का हिस्सा है, लेकिन सबसे बहतरीन तरीका ये है कि इस दिन गरीबों की मदद की जाए, भूको
02:40को खाना खिलाया जाए, और मुहमत सहाब की दी हुई �
02:43अमन और भाईचारे किसी को अपने जिन्दगी में उतारा जाए, इस पर आपकी क्या राय है कॉमेंट सेक्शन में हमें
02:48लिख कर जरूर बताएं, वीडियो को लाइक करें, शेयर करें और चैनल को सब्सक्राइब करना पिलकुल नभूलें
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