00:00इतनी मौते हैं इतनी बड़ी इतरासदी ग्लेशियर के तपकर तूटने से हुई है तो क्या ये वाजब नहीं है कि
00:06हम पूछें कि ग्लेशियर को सबसे पहले तपाया किसने किती और में नहीं हमने
00:21अगर इतनी मौते हैं इतनी बड़ी इतरासदी ग्लेशियर के तपकर तूटने से हुई है तो क्या ये वाजब नहीं है
00:27कि हम पूछें कि ग्लेशियर को सबसे पहले तपाया किसने किती और नहीं हमने
00:32पूरी मानवता ने सिर्फ नेपाल के लोगोंने नहीं पूरी दुनिया के लोगोंने हमारी जीवन दृष्टि ने जीवन जीने के हमारे
00:42गलत सिध्धानतों ने
00:47देखे जलवाय आउ संकट कोई तकनीकी समस्या नहीं है वो कोई बहुत चुपी हुई या कोई गुप्त बात नहीं है
00:56वो आम इंसान की चेतना का संकट है हम जैसे सोचते हैं हम जिन्दकी को जैसे देखते हैं हमें जो
01:02बाते बता दी गई है कि तुम पैदा हुए हो ताकि �
01:05तुम खुब भोगो और भोग भोग के तुमको खुशी मिल जाएगी,
01:08खपत, खपत, खरीदारी, खरीदो और खाओ,
01:12आगे बढ़ो, तरक्षी का मतलब ही है कि तुम्हारे पास और ज्यादा चीज़ें होनी चाहिए,
01:16प्रोडिक्शन एंड कंजंप्शन, इफी फे तो तै होता है कि कौन सा परिवार कितना आगे है,
01:20कौन सा देश कितना आगे है, ये जो दीवन दृष्टी है, ये जिन्दगी को देखने का जो तरीका है,
01:25इसने तपाया है हिमाले को, और ये बात हम स्विकार करना नहीं चाह रहे हैं,
01:29बले हमारे सामने लाशों का धेर लग गया है, पर हम मानना नहीं चाह रहे हैं.
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