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  • 2 weeks ago
जुलाई के महीने में भारत के पांच स्कूली छात्रों ने कोलंबिया में कुछ ऐसा कर दिया, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया. 56वें इंटरनेशनल फिजिक्स ऑलंपियाड में 85 देशों के 381 प्रतिभाशाली छात्रों को पछाड़कर भारतीय टीम ने 5 गोल्ड मेडल जीत लिए और चीन, रूस, साउथ कोरिया, कजाकिस्तान और ताइवान के साथ दुनिया में टॉप किया.  ये बात महज गोल्ड मेडल की नहीं है, बल्कि भारत की सबसे बड़ी राष्ट्रीय संपत्ति यानी भारतीय युवाओं की प्रतिभा की है, जिसकी पूरी दुनिया बांहें फैलाए इंतजार करती रहती है. इन छात्रों को इतना बड़ा सम्मान मिलना कोई संयोग नहीं है, बल्कि टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च (TIFR) के 'होमी भाभा सेंटर फॉर साइंस एजुकेशन' (HBCSE) की तीन दशकों की मेहनत का नतीजा है. पिछले 10 सालों में ओलंपियाड में गया हर भारतीय बच्चा मेडल लेकर लौटा है यानी हर बार अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है.यहां सवाल उठता है कि जब भारत के युवा इतने प्रतिभाशाली हैं, भारत में टैलेंट की कोई कमी नहीं है तो दुनिया की 50 सबसे टॉप कंपनियों में एक भी भारतीय क्यों नहीं है?

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00:04जुलाई के महिने में भारत के पांच स्कूली चात्रों ने कोलंबिया में कुछ ऐसा कर दिखाया जिसने पूरी दुनिया का
00:10ध्यान अपनी और खींच लिया
00:1156 इंटरनाशनल फिजिक्स ओलंपियार्ड में 85 देशों के 381 प्रतिभाशाली चात्रों को पच्छाड कर भारतिय टीम ने 5 गोल्ड मेडल
00:22जीत लिये और चीन, रूस, साउथ कोरिया, कजाकिस्तान और ताइवान के साथ दुनिया में टॉप किया
00:29ये बात महस गोल्ड मेडल की नहीं है, बलकि भारत की सबसे बड़ी राश्ट्रिय संपत्ती यानि भारतिय युवाओं की प्रतिभाकी
00:36है, जिसके लिए पूरी दुनिया अपनी बाहें फैलाए हुए इंतजार करती रहती है
00:40इन छात्रों को इतना बड़ा समान मिलना कोई संयोग नहीं है, बलकि टाटा इंसिट्यूट और फंटामेंटल रिसर्च के होमी भाभा
00:48सेंटर फॉर साइंस एजुकेशन की तीन दशकों की महनत का नतीजा है
00:52पिछले 10 सालों में उल्मपियाड में गया हर भारतिय बच्चा मेडल लेकर लौटा है, यानि हर बार अपनी प्रतिभा का
00:59लोहा मनवाया है
01:00यहाँ सवाल उठता है कि जब भारत के युवा इतने प्रतिभा शाली हैं, भारत में टालेंट की कोई कमी नहीं
01:06है
01:06और भारतिया मेंट और अपने यहां की प्रतिभा को तराश कर हीरे की तरह निखार सकते हैं, तो दुनिया की
01:1350 सबसे टॉप कमपनियों में एक भी भारतिया क्यों नहीं है?
01:16इसकी वज़े की परताल करें तो वो सच्चाई सामने आएगी जो दशकों से हिंदुस्तान की सबसे बड़ी समस्या है और
01:23उसका नाम है ब्रेन रेन यानि प्रतिभा का पलायन।
01:46लेकिन उसे अपने देश में रोक का रखने में पिछड़ रहा है। इस विरुधाभास से एक और सवाल पैदा होता
01:52है, वो ये कि क्या भारत अपने इस अपार बौधिक संपदा को विश्वस्तरिय कमपनियों में तबदील कर सकता है? किसी
01:59भी राश्टर की सही सफलता की प
02:29अपनी प्रतिभा के दम पर भारत आज अमेरिका और चीन के बाद दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्ट अप इकोसिस्टम
02:36बन चुका है, हमारे पास सो से ज्यादा यूनिकॉर्ण है, यानि ऐसी कमपनिया जिनकी मार्केट वैल्यू एक अरभ डौलर से
02:44ज्यादा है,
02:44जिरोधा, नायका, लेंसकार्ट, सर्वम एआई, पाइन लाब्स और इनोवैकर जैसी कमपनियों ने साबित कर दिखाया है कि भारत ये उत्यमी
02:53देश में रहकर भी वैश्विक स्थर के बिजनेस खड़े कर सकते हैं, यूपी आई, डिजिटल इंडिया और स्टार्ट अप
03:14और क्लीन एनरजी से लेकर स्पेस टेकनोलजी के एक शेत्र में भारतिय स्टार्ट अप हाई क्वालिटी एंप्लॉइमेंट जिनरेट कर रहे
03:21हैं, भारतिय उध्यमियों की सफलता की कहानी तब और रोमांचक हो जाती है जब बात विदेशों में रह रहे भारतियों
03:28की होती
03:41अकेले अमेरिका में 96 यूनिकॉर्ण भारतिय मूल के लोगों ने बनाए हैं जो इसरायल, चीन या ब्रिटेन के उध्यमियों द्वारा
03:49यहां बनाएगा यूनिकॉर्ण से भी ज्यादा है
03:52IIT मदरास के अरविंद श्री निवास की परप्लेक्सिटी AI दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली आर्टिफिशियल इंटेलिजन्स कंपनियों में
04:00शामिल है तो डेटाब्रिक्स की मार्केट वैल्यू 100 बिलियन डॉलर से ज्यादा की हो चुकी है
04:05भारत आज प्रवासियों द्वारा बनाएगा यूनिकॉर्ण का दुनिया में सबसे बड़ा स्रोत बन चुका है
04:11भारतियों ने विदेश में जाकर भारत से ज्यादा यूनिकॉर्ण क्यों बनाए है? आखिर भारत की प्रतिभा बाहर क्यों जाती है?
04:17इसका जवाब है जोखिम पून जी यानि वेंचर कैपिटल रिसर्च का माहौल और नियम कानून.
04:23भारत में वेंचर कैपिटल की भारी कमी है, अमेरिका में हर साल 240 बिलियन डॉलर से ज्यादा वेंचर कैपिटल निवेश
04:31होता है, जबकि भारत में ये केवल 7 से 8 बिलियन डॉलर है. अमेरिका जैसे देशों में रिसर्च का बहतर
04:38माहौल है, यहांकि स्टैनफोर्ड और MIT जैस
04:53पारण देखें तो यूनिकॉन बनाने में चीन दूसरे नंबर पर है, लेकिन उसके ज्यादा ता यूनिकॉन चीन के भीतर ही
04:59बने हैं, उसने अपनी प्रतिभा को देश में रोके रखा. भारत के पास प्रतिभा का कभी ना खत्म होने वाला
05:05खजाना है, हम दुनिया के सबस
05:07परीन दिमाग पैदा कर रहे हैं, अब अगला कदम ये सुनेशित करना है कि हमारे शोधार्तियों को शोध और विकास
05:14में ज्यादा निवेश मिले, यूनिवर्सिटीज में बिजनस इंक्यूबेटर्स हों और नियम आसान हों, स्टार्ट अप इंडिया, अटल इनोवेशन म
05:33शित्र में निजे निवेश को बढ़ावा देने की जरूरत है, इसके साथ ही ज्यादा से ज्यादा उच्च शिक्षा संस्थानों की
05:40भी स्थापना की जरूरत है, जो इनोवेशन और उद्यमिता का सेंटर बन सकें, यहां शोध करने वाले छात्रों को टेकनोलोजी
05:47ट्रांस
05:47और स्टार्ट अप ग्रांट के जरिये कमर्शिलाइज रिसर्च को प्रोचसाहित करने की भी आवश्यक्ता है, एक देश के रूप में
05:54नियमों को सरल बनाकर हम उद्यमियों की मदद कर सकते हैं, विदेशों में भारत का जंडा बुलंद करने वाले उद्यमियों
06:00को मेंटर,
06:01इंवेस्टर और सहयोगी बनाकर हम भारतिया कमपनियों को और भी कॉंपिटिटिव बना सकते हैं, फिजिक्स ओलंपियाड में पांच गोल्डन मेडल
06:09जीत नाएक बड़ी उपलब थी है, लेकिन असली जीत तब होगी जब भारत का ये हुनर भारत में रहकर ही
06:15दुनिया की
06:16सबसे बड़ी और प्रभावशाली कमपनिया बनाएगा.
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