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Indus Waters Treaty पर Hague Arbitral Court के आदेश पर भड़का भारत, कहा- 'अवैध कोर्ट को नहीं मानते' | MEA
हेग स्थित तथाकथित कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन के फैसले को भारत ने सिरे से खारिज करते हुए साफ कह दिया है कि संप्रभु फैसलों पर किसी अवैध निकाय का आदेश मान्य नहीं होगा!
1 सितंबर 2026 की इस बड़ी अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट में जानिए कि सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच क्या नया कानूनी और कूटनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। 31 अगस्त 2026 को हेग (The Hague) स्थित तथाकथित कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन ने अपना अवार्ड जारी करते हुए कहा कि 1960 की सिंधु जल संधि अभी भी लागू है और भारत इसे एकतरफा तरीके से निलंबित (Hold in Abeyance) नहीं कर सकता। इसके अलावा, कोर्ट ने रतले जलविद्युत परियोजना (Ratle Hydroelectric Project) के निर्माण कार्य पर जुलाई 2027 में न्यूट्रल एक्सपर्ट के अंतिम फैसले तक कुछ अंतरिम पाबंदियां लगाने का भी आदेश दिया है।
हालांकि, भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने कोर्ट के इस फैसले को पूरी तरह खारिज कर दिया है। भारत सरकार का कहना है कि यह कोर्ट वर्ल्ड बैंक द्वारा संधि के नियमों का उल्लंघन करके 'अवैध रूप से गठित' की गई है। जब भारत इस निकाय के अधिकार क्षेत्र (Jurisdiction) को स्वीकार ही नहीं करता, तो इसके द्वारा जारी किसी भी आदेश या भविष्य के फैसलों का भारत की राष्ट्रीय परियोजनाओं और संप्रभु निर्णयों पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
भारत ने 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद सुरक्षा कारणों से इस संधि को स्थगित (Abeyance) रखने का कठोर निर्णय लिया था, जो आज भी कायम है। जानिए इस पूरे विवाद का मुख्य कारण और आगे क्या रुख अपना सकता है भारत।


In a major geopolitical development, India has categorically rejected the order issued by the Hague-based Court of Arbitration regarding the Indus Waters Treaty. The Ministry of External Affairs (MEA) stated that the court is "illegally constituted" and holds no jurisdiction over India's sovereign decisions or infrastructure projects like the Ratle Hydroelectric Project. India maintains that its decision to keep the 1960 water-sharing agreement in abeyance remains fully in force.
#IndusWatersTreaty #IndiaPakistan #HagueCourt

~HT.178~ED.106~PR.514~GR.122~VG.HM~

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Transcript
00:09सिंधू के पानी पर एक बार फिर भारत और पाकिस्तान आमने सामने हैं और इस बार टकराव सिर्फ पानी का
00:14नहीं बलकि संप्रभुता और अंतराष्ट्य कानून की व्याख्या का भी है
00:18हेग स्थित तथा कथित Court of Arbitration ने सिंधू जल संधी को लेकर बड़ा फैसला सुनाया लेकिन भारत ने इस
00:24फैसले को मानने से साफ इनकार कर दिया
00:26भारत ने कहा है कि जिस निकाय ने ये फैसला सुनाया है उसकी वैधता को ही नहीं दिल्ली स्विकार नहीं
00:31करती
00:32यानि कोट का फैसला अपनी जगा लेकिन भारत का रुख भी बिल्कुल साफ है इस फैसले का भारत के संप्रभू
00:38निर्नयों और अपनी जल विद्यूत परियोजनाओं पर कोई असर नहीं पड़ेगा
00:42आखिर पूरा मामला क्या है और पाकिस्तान इस फैसले को अपने लिए बड़े काम्याबी क्यों मान रहा है
00:48दरसल 31 अगस्त 2026 को कोट अफ आबिट्रेशन ने सिंधु जल संधी की मौजूदा स्थिती पर अपना अवोर्ड जारी किया
00:55कोट ने कहा कि 1960 की सिंधु जल संधी अभी भी लागू है और भारत अपने स्तर पर इसे निलंबित
01:01या समाप्त नहीं कर सकता
01:03कोट ने ये भी कहा कि पश्चिमी नदियों पर भारत की जल विद्यूत परियोजनाओं से जुडी संधी की जिम्मेदारियां जारी
01:09रहेंगी
01:09लेकिन भारत का कहना है कि इस फैसले को स्वीकार करने का सवाल ही नहीं उठता
01:14विदेश मंत्राले ने कौट अफ आबिट्रेशन को अवैध रूप से गठित निकाय बताया है
01:18भारत का तर्क है कि विश्व बैंक की ओर से इस निकाय का गठन सिंधु जल संधी में तैप्रक्रिया के
01:23विपरीत किया गया
01:24भारत पहले से ही इस कोट के अधिकार क्षेतर को नहीं मानता और इसकी कारिवाही में शामिल भी नहीं हुआ
01:30है
01:30इसलिए नई दिल्ली का कहना है कि जिस निकाय के अधिकार क्षेतर को भारत मानता ही नहीं उसके फैसले भारत
01:36के लिए बाध्यकारी नहीं हो सकते
01:37अब सवाल उठता है कि कोट ने ऐसा क्या कहा है जिससे पाकिस्तान को उम्मीद बंधी है।
02:07और पावर इंटेक स्ट्रक्चर पर एक निर्धारित स्तर से उपर कॉंक्रीट का काम फिलहाल सीमित रहेगा। ये प्रतिबंध न्यूट्रल एक्सपर्ट
02:14के अंतिम फैसले के 90 दिन बाद तक लागू रहेगा। न्यूट्रल एक्सपर्ट का फैसला जुलाई 2027 में आने की उ
02:34भारत ने ये भी कहा कि इस तथा कथित कोट के मौजूदा या भविश्य के फैसलों का भारत की पर्योजनाओं
02:40से जुड़े उसके निर्नयों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। यानि नई दिल्ली का संदेश बिल्कुल स्पष्ट है। राष्ट्यहित और संप्रभ�
03:01के पानी के इस्तिमाल को लेकर दोनों देशों के अधिकार और जिम्मिदारिया तैकी थी। दशकों तक दोनों देशों के बीच
03:07युद्ध और तनाव के बाविजूद ये समझोता चलता रहा। लेकिन 2025 के पहलगाम आतन की हमले के बाद भारत ने
03:14संधी को अबेयंस में र�
03:36पानी अब सिर्फ नदी का पानी नहीं रहा। ये भारत पाकिस्तान के बीच कूटनीतिक, रणनीतिक और कानूनी टकराव का नया
03:43मोर्चा बन चुका है। आने वाले समय में न्यूट्रिल एक्सपर्ट का फैसला और भारत पाकिस्तान के बीच बातचीत इस विवाद
03:49की दि
04:01आया है।
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