00:00उसकी कहानी याँ थे दो-चार बड सुना चुका हूँ, वो जो बहा जा रहा था, कौन?
00:05अरे?
00:08तो कैम कराने ले गया था इनको, गंगा के नारे उपर की तरफ पहले होता था, गंगा के नारे ही
00:15वहाँ पर, एकदम अकेले में, वहाँ पर कैम लगे हुए थे,
00:20तो कैम वाले ने एक मोटी रसी, जो है, वो एक खूटे से बांद दी, एकदम मोटी रसी, क्योंकि जितने
00:30सब हुमारे कैम के प्रतिभागी थे, वो बोले नहाने जाएंगे,
00:34वोला, आप लोगों को चले जाना अंदर, अंदर लेकिन धार है, तो इतना भी अंदर जाना ये रसी पकड़े रहना,
00:41तो सब अपना रसी पकड़े हुए हैं, कुछ देर में एक दिखाई देता है, हमारी किसी कॉलेज का था, स्टूडेंट,
00:50क्यों बहाँ चला जा रहा है,
00:54मौज में बिलकुल, कोई समस्या नहीं, तो चलाया कोई कि, पागल ये पकड़ना था ना, रसी, अब उधार है धार,
01:05पहाड़ी जो धार होती है गंगा की तेज, वो बहाँ जा रहा है, उसके चहरे पर कोई शेकन नहीं, तो
01:15बोल रहा है कि, पकड़ तो रखी रसी, पकड�
01:21क्या पकड़ रखा, वो अपने ही नाडा पकड़ के बहाँ आ रहा है, ये हंकार है, उसे अपना ही आधार
01:31है, उसे अपना ही आधार है, वो खुद ही खुद का सहारा है, वो खुद ही दावेदार है और खुद
01:45ही दावे की पुष्टी भी कर देता है, वो खुद ही वकील है
01:50और खुद ही जज है
01:52वो खुद ही तरक करता और खुद ही
01:54अपने तरक मान भी लेता है
01:58बात आ रही है समझ में
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