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पूरा वीडियो: जन्माष्टमी: पुजारी की पीड़ा, "लोगों ने मूर्तिपूजा का मज़ाक बना दिया" || आचार्य प्रशांत (2026)

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वीडियो जानकारी: 30.08.2026, संत सरिता सत्र, गोवा

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Transcript
00:00मेरा आज का प्रश्ण अभी जो जन्माष्ट में आ रही है उसके संदर्ब में
00:04आचार जी मैं खुद मंदिर का पुजारी हूँ और मैंने मुर्ती स्थापना की है
00:08तो आज हम जब सोशल मीडिया पर यहां देखते हैं
00:12जिसे अभी जन्माष्ट में आ रही है उसकी छोटे-चोटे से लड़ू, गोपाल और राधा कृष्ण बनाए हुए है
00:16उनका स्कूल में एड्मिशन कराते हैं उनको बच्चों की तरह पालते हैं
00:21बिस्तरों में सुलाते हैं, इत्र लगाते हैं, खिलाते हैं
00:25हाड़बिट भी चेक करवा रहे हैं
00:27अजज़ जी क्या प्रतिकों की ऐसी सेवा कहीं भी सहायक हो सकती है
00:33अपने से बाहर कई बार कुछ चाहिए होता है हमें हमारी हकीकत दिखाने के लिए
00:39सेल्फ डिसेप्शन का एक्सपर्ट
00:42ये कौन है? मैं
00:44अगर हम ऐसे ना होते
00:46तो अभी जो बाचीच चल रही है इसकी कोई जरूरत भी नहीं होती
00:49हम अपने अपने घरों में होते
00:51अपने अपने जीवन में होते
00:52और हमें खुदी दिख गया होता कि कहा चल है, कहा दोखा है
00:55कहा मोह है, कहां आ सकते है, कहा नुराग है
00:57सब दिख गया होता, ना, खुद ही दिख गया होता, हमें किसी करंथ की जरूरत नहीं होती, हमें गीता की
01:01भी जरूरत नहीं होती, गीता में क्या नहीं पता चले, गीता भी तो हमें हमारे बारे में ही बताने के
01:05लिए है, यदि मुझे पता हो कि भाई, मेरी वृत्ति ऐसी है, क
01:09कि मैं खुद को धोखा दे लेता हूँ
01:11तो इसलिए मुझे एक
01:13external object, assessor
01:15या benchmark चाहिए
01:17क्यों? क्योंकि अगर मैं बाहर किसी को
01:19पैमायना नहीं बनाऊंगा
01:20तो मैं अपने आपको सौ में सौ नमबर दे दूँगा
01:23अगर मैं बाहर किसी को
01:25दरपण की तरह नहीं खड़ा करूँगा
01:27तो मैं खोशित कर दूँगा कि मैं ही सबसे साफ और मैं ही सबसे सुन्दर हूँ
01:30तो इसलिए फिर
01:32शिक्षक की जरूरत होती है
01:34इसलिए फिर
01:35गरंथ की भी जरूरत होती है
01:37गुरू और गरंथ दोनों इसी लिए चाहिए होते हैं
01:40क्योंकि हम अपने प्रते इमांदार ज़रा कम होते हैं
01:45लेकन गुरू और गरंथ भी सार्थक तबीयों पाते हैं
01:48जब हमारी सबसे पहले सीखने की माने मिठने की नियत हो
01:52तुम्हारी नियत है अगर अपने आपको बरबाद करने की तो तुम गुरूई ऐसा चुनलोगी जो तुम्हारी बरबादी में सायक हो
01:57जाए
01:58गंत अच्छा होता है कि बुरा होता है
02:00टिपेंड्स
02:01तुम्हारी नियत की बात है
02:03ठीक यही बात मूर्थे पर भी लागू होती है
02:06मूर्थे ना अच्छी है ना बुरी है निर्भर इस पर करता है कि तुम कौन हो
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