00:00साथ आप क्यों इतनी मेहनत कर रहे हैं आप इतने बुढ़ा गए दुकान पर बैठ जाते हैं अगर हाग को
00:05लूटते हैं आप इतनी मेहनत क्यों कर रहे हैं वो मैं बड़े गरीब घर में पैदा हुआ था तो गाओं
00:13का जो सहुकार था उसकी हवेली थी और वो मेरे बाप की त
00:21सपना बनाया था एक दिन ये सहुकार से ज्यादा बड़ी हवेली बनागे दिखाऊंगा बस अब एकाद करोड और इक अठा
00:27करना उसके बाद बन जाएगी मेरी हवेली बड़ी हवेली लगे गिस रहे हैं लक्ष है जीवन में क्या लक्ष है
00:36हवेली बन वानी है अब बन ग�
00:42प्रवेश के दिन इनका ग्रह निकास हो गया चलो रह भी लिए उसमें दो चार छे महीने या एकाद दो
00:49साल जैसे शाजहां ताज महल को निहारा करता था कहां से कैद से देख रहे हैं मुम ताज महल जान
01:03थी हमारी जान आरी बात समझे वो घर खड़ा है और तुम लेट गए ह
01:11जो जब तुम जलोगे तो घर नहीं जलेगा अध्यात्म सुरूर होता है अध्यात्म नशा होता है जुनून होता है और
01:23कुछ पाने का नहीं खुद को गवाने का
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