Skip to playerSkip to main content
  • 3 days ago
उत्तर प्रदेश के वाराणसी यानी धर्म नगरी काशी से आस्था और भावनाओं की एक अद्भुत तस्वीर सामने आई है. हजारों किलोमीटर दूर रूस के मॉस्को में बैठी एक बेटी नीना ने वीडियो कॉल के जरिए काशी में अपने दिवंगत पिता आंद्रेई और भाई का श्राद्ध कर्म संपन्न किया. नीना खुद काशी नहीं पहुंच सकीं, लेकिन तकनीक के सहारे उन्होंने 5 घंटे तक चले इस अनुष्ठान में वर्चुअली हिस्सा लिया.पुरोहित संजय उपाध्याय के निर्देशन में काशी में एक आचार्य ने नीना की तरफ से संकल्प लिया और नीना मॉस्को से स्क्रीन के जरिए एक-एक मंत्र दोहराती रहीं. हिंदू मान्यताओं के अनुसार, असमय मृत्यु के बाद दिवंगत आत्मा की शांति और मुक्ति के लिए त्रिपिंडी श्राद्ध और नारायण बलि का विधान है.

Category

🗞
News
Transcript
00:28।
00:30पाच घंटे तक मंत्र गूंजते रहे और दूर बैठी बेटी अपने पिता और भाई की आत्मा की शांती के लिए
00:38फ्राथना करती रही।
01:00के निर्देश पर एक-एक मंत्र दोहराती रही।
01:25नैना को सलहा मिली थी कि पिशाज मोचन में त्रिपेंडी श्रधा और नारायन बाली कराया जाए।
01:33हिंदू मानेताओं के मुताबिक ऐसे अनुष्ठान असमय या अप्रत्याशित मृतियों के बाद दिवंगत आत्मा की शांती और मुक्ती की कामना
01:42के लिए किये जाते हैं।
01:44सबसे पड़े नारायन बली हुई है।
01:47नारायन बली में जो है।
01:49यहां पर सक्टेश विष्टू के साथ प्रमा विष्टू महिशादी देखाओं के साथ जो है।
02:16हाला कि आत्मा की मुक्ती और शांती से जुड़ी बाते आस्था का विष्टू के लिए ऐसी रस में मन को
02:26धांधस और दिल को सुकून दे सकती है।
02:29जब काशी में अंतिम प्राथना पूरी हुई तब भी नैना हजारो किलो मीटर दूर थी।
02:35लेकिन उन पाच घंटों में दूरी सिर्फ नक्षे पर थी।
02:39भावनाए काशी में थी, यादे काशी में थी और एक बेटी की प्राथना भी काशी की पवित्र अगनी के साथ
02:48थी।
02:48Bureau Report, ETV Bharat
Comments

Recommended