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00:01युधिष्थिर के शरीर सहित स्वर्ग पहुचने का सबसे बड़ा रहस्य महाभारत युद्ध के बाद पांडवों ने हिमालय की और महाप्रयान
00:09की कठिन यात्रा शुरू की थी एक एक करके सभी भाई और द्रौपदी रास्ते में अपनी कमजोरियों के कारण गिरते
00:16चले �
00:16केवल धर्मराज युधिष्थिर ही बिना रुके अकेले आगे बढ़ते रहे क्योंकि वे निश्कलंग थे
00:22अचानक आकाश में स्वयन देवराज इंद्र अपना स्वर्ण रत लेकर युधिष्थिर को लेने प्रकट हुए
00:29इंद्र ने कहा हे युधिष्थिर तुम सश्रीर स्वर्ण चलोगे रत पर विराज मान हो जाओ
00:35लेकिन युधिष्थिर ने अपने वफादार कुट्टे को साथ ले जाने की शर्त रख दी
00:40इंद्र बोले स्वर्ण में कुट्टों का कोई स्थान नहीं है इसे यहीं छोड़ दो
00:45युधिष्थिर ने कहा जो शरण में आया हो उसका त्याग करना सबसे बड़ा पाप है
00:50अब वह कुट्टा कोई और नहीं स्वया धर्मराज यम का ही रूप प्रकट हो गया
00:55सत्य और धर्म की ऐसी निश्था देखने के लिए सनातन धर्म के रहसियों को अभी लाइक और फॉलो करें
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