00:00मनुश्यों की दुनिया में महान कहलाने के लिए फुरा छटा हुआ फरेवी होना जरूरी है
00:05आम आदमी न तो महान है और ज्यादा बड़ी बात ही है कि वो बिचारा महानता का ढोंग भी नहीं
00:13कर पाएगा
00:14क्योंकि महानता का ढोंग करने के लिए भी कोई छटा हुआ फरेवी चाहिए
00:19नाम आत्मी को भूख लग रही होगी
00:21तो वो जाएगा और खा लेगा कुछ
00:24भूख लग रही है
00:26पर भूख लगते हुए भी ना खाने के लिए
00:29कोई बड़ा छटा हुआ चाहिए
00:31अब जैसे यहाँ बैठे है
00:33कोई ऐसा हो सकता है उसको नीद आ रही हो
00:35तो पहली बात तो महानता यहीं उड़ गई गायब कि
00:38स्वत्र चल रहा है नीद आ रही है
00:40और दूसरी बात इतने मकार आप हो नहीं कि नीद आ रही है
00:45तो भी ये दरशादों की सो नहीं रहे हो
00:49पर कुछ छटे हुए ऐसे होते हैं
00:50वो आँख खोल के सो लेते हैं
00:52वो महान कहला जाएंगे
00:56मनुश्यों के समाज में महान कहलाना
00:59कोई छोटी मुटी बात नहीं है
01:00बड़ा गहरा आभी नहीं करना पड़ता है
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