00:04बहले ही ब्रिक्स से समेलन खत्म हो चुका हो यहां संपन हो गया हो भारत में इसका 28 संसकरण लेकिन
00:09भारत की जो चिंताएं हैं और भारत की जो कंसर्ण्स हैं और उनके जो एक डिपलमाटिक आउटरीच है उस पर
00:15अगर हम ध्यान दें तो जो एक डी डॉलराजेशन या ब्रि
00:29शिवेंदर जी लगबग अभी कोशिश की है कि वो अमेरिका के साथ उसकी नजदीकी बढ़ है और जब कि ब्रिक्स
00:35की जब बात होती है तो वहां पर और्ड मैन आउट की स्थियूत पन हो जाते हैं कैसे भारत ने
00:39इसको बैलेंस किया होगा भारत ने अपना बिल्कुल साफ
00:43रखा अपनी जो भी पॉलिसी थी किलियर रखी कि हम अमेरिका को हमें संदेश देना था कि हम आपके दोस्ते
00:49हैं इसका मतलब ये बिल्कुल नहीं है कि हम दूसरों से दोस्ती नहीं कर सकते हैं जो बार बार टैरिफ
00:53होता है तमाम चीज़े उसके बावजूद भारत ने अप
01:13का एक हमारी जो है डिश्टल जो सीडी बीसी की बात होती है सेंट्रल बैंक डिश्टल करेंसी उसको हम लाएं
01:22हाला कि बहुता कथिन काम है लेकिन उसने बिल्कुल ये नीका कि हम किसी तरीके से डॉलर का कोई दूसरा
01:27रूप इसके प्रतदंगता कर रहे हैं और ये हमारे ल
01:43तो कहीं ना कोई धीर दीरे धीरे धीरे हम उसको अपना सकते हैं उसका फाइदा मिल सकता है, लेकिन उन
01:50सबडों से बचना था उन टीके बानों से बचना था और संत, उतना आकरामक हमें किसी की हमारी
01:56पॉलिसी भी नहीं आक्रामक होने की तो यह ही हमने अपनाया जो अमेरिका का जिकराता है उन्होंने जो टैरिफ्स लगाए
02:03चाइना और भारत दोनों पर तो कहीं नहीं आपको लगता है कि जो कहा जाए कि दोनों एक ही आग
02:09से जले हुए थे तो क्या वो चीज कहीं क्लोजनेस
02:12भारत और चीन के बीश में चीन की जो पॉलिसी है वो बहुत ब्रॉड है वो बहुत उसको आप अलग
02:19अलग समय पे भारत के पास अलग लग चीजे देख तो यह बात है अभी थोड़े समय पहले भी होई
02:23जब चीन में प्रदान मंत्री गया लेकिन उसके बाद हमने देखा ह
02:26हमारे यहां की एक यात्री जाती है वो कहता आउना चल प्रदेश को तुम्हारा पासपोर्ट के माला आप कही ना
02:31कहीं वो एक कैसा संदेश देखा देता रहता है कि जो बार्डर पे उसका डिस्पूटे वो खड़ार है उसमें समझावता
02:37होगा नहीं होगा आज यह कहते है
02:39सी जिंग पिंग लेकिन उसके बावजूद वो कहीं ना कहीं हमारे एक दर्द नक्से में परवर्तन कर देना नाम बदल
02:46देना लेकिन उसके बावजूद यह बात सही है कि जो विभार अमेरिका का यह कॉस्टरम का कहूंगा अमेरिका और चीन
02:55और भारत के साथ रहा है उसके
02:56तरफ पे इनको आना एक मजबूरी थी, कही ना कहीं दिखाना कि हम भी साथ मिला सकते हैं, यह नहीं
03:03कि जो टूल बना रहा था भारत को, अमेरिका की कौार्ड में और इस तरीके से, उस से भारत ने
03:09बताया कि हम किसी का मोरा नहीं है, बिल्कुर, बिल्कुर, देखना होगा हमे
03:13कि किस सरह से ट्रम्प इस पर रियाक करते हैं, अभी तक कोई बयान नहीं आया है भारत पर, और
03:16यहां से जो डेली डेकलिवरेशन भी पास हुआ है, उस पर भी डॉनल्ल्ल ट्रम्प ने, अभी तक कोई प्रतिक्रिया अभ्यक्ति
03:21नहीं किनी होगा है, एतिहास एक ब्रेक्स
03:44सबसे बड़ी बात थी, कि जब सी जिंग्पिन ने बात कही, तो उन्होंने कहा कि हमें बार्डर डिस्पूट को डायलोग
03:50से उसमें आगे बढ़ाना, उसके साथ-साथ हम कंप्टीटर हमें एक दूसरे की तरक्की में, एक दूसरे की उसमें अपना
03:57भला देखना है, ना कि ह
04:00कि एक चीज पर भाँ और सहमती बन गई, जो मैं इसमें देखना हो, यहां पर जब हमारा जो बात
04:12होती है, तो उसमें कहीं जो सहमती दिखाई दी, लेकिन यह सहमती अब चीन के बारे में हमें सहा कहा
04:18जाता है, पंकाजी, कि कहीं ना कहीं यह बात जमीन पर आएगी नही आ�
04:32साथ साल पहले शी जिंग्पिंग भारत आये थे उसके बाद दो बार और मुलाकात कुई पिछले साल त्यांजिंग में और
04:37उससे पहले कजान में प्रिदानमंत्री मोदी की आपको लगता है कि 2020 से गलवान की जो खटास थी कहीं ने
04:44कहीं भारत अभी भी सजग है और चीन को व
04:58कर रहे गए हैं उनकी अर्थ विवस्ता डाउन की उनकी कई पोल खुल रही बंदमुटी खुल रही है चीन भी
05:04इस समय मुझे लगता है किसी तरह के यूद्विन अलच के वो अपनी आर्थिक तरक्की की तरफ ध्यान दे रहा
05:10है और ऐसे में इंडिया से किसी तरह का कॉंफ
05:28चाहिए अब चीन की चाला की हमेशा एक चर्चा का भी सह रहती है कि वो ये बाते कब तक
05:33करेगा कब वो हिंदी चीनी बाई-बाई-बाई के बाद में चुरा घोपता है क्या एक ये छोटे समय की
05:40बात होगी या जैसा जी सी जिंपिंग कह रहे है कि हमें लॉंग टम रिलेस
05:58है उनके जो एक डिप्लमाटिक आउटरीच है उस पर अगर हम ध्यान दें तो जो एक डी डॉलराइजेशन या ब्रिक्स
06:04बैंक के एक सेपरेट करेंसी की बात होती है उसमें भारत ही ऐसा ब्लैंक नजार आता है जो कि इससे
06:12अलग हट कर देखता है क्योंकि भारत ने 25 वर्�
06:27को साफ रखा अपनी जो भी पॉलिसी थी किलियर रखी कि हम अमेरिका को हमें संदेश देना था कि हम
06:33आपके दोस्ते हैं इसका मतलब ये बिल्कुल नहीं है कि हम दूसरों से दोस्ती नहीं कर सकते जो बार बार
06:38टैरिफ होता है तमाम चीज़े उसके बावजूद भारत ने �
06:41पीठ् LT ने आपको सऑयोमित रखा यहां पर हम देख पा रहे थी कि जब बात हो रहा है लक
06:45करिंसी की बात हो रही थी चाइना और रूस जिस तरीकी से सीधे बात करना चाहते थे भारत ने उसको
06:51इस तरीके से ना लेकर इस में जो अपना प्रॉच्डर करंश रखा उसमें �
06:54इसने रखा कि जो local currency है उसमें settlement हो उसने कहा एक हमारी जो है digital जो CDBC की
07:02बात होती है Central Bank Digital Currency उसको हम लाए हला कि बहुत वह तोगा कथिन काम है लेकिन उसने
07:09बिल्कुल ये नी कहा कि हम किसी तरीके से dollar का कोई
07:12दूसरा रूप इसकी प्रतुदंगता कर रहे हैं और यह हमारे लिए जरूरी भी था कि किसी भी तरह की वास्तेयुक्ता
07:19यही है कि अभी डॉलर और इस सब चीजों को साथ लेकर चलना भी है साथ साथ हमें अपनी करंसी
07:25में ब्यापार जो हमें इरान के साथ या रूस के साथ �
07:29तो कहीं ना कहीं दीरे दीरे दीरे हम उसको अपना सकति बना उसका फाइदा मिल सकता है लेकिन उन सबदों
07:36से बचना था उन तीखे बाणों से बचना था और अतना अकरामक हमें किसी हमारी
07:41पालिसी भी निये रही आकराँश होने जो अमेरिका का जिक्राता है, उन्होंने जो टैरिफ्स लगाए। चाइना और भार्त दोनों पर
07:50तो कहीश कहा जाया कि दोनों एक ही आग से जले हुए थे तो क्या वो चीज कहीं पॉलिसनेस लाती
07:58है भारत और चीन के बीश Нап
07:59चीन की जो पॉलिसी है वो बहुत ब्रॉड है वो बहुत उसको आप अलग-अलग समय पे भारत के पास
08:05अलग-अलग चीज़े देखते हो यह बात है अभी थोड़े समय पहले भी होई जब चीन के प्रधान-मंत्री गए
08:10लेकिन उसके बाद हमने देखा हमारे यहां की एक यात
08:29नक्से में परवर्तन कर देना नाम बदल देना लेकिन उसके बावजूत यह बात सही है कि जो विभार अमेरिका का
08:37यह कॉस्टरम का कहूंगा अमेरिका और चीन और भारत के साथ रहा है उसके तरफ पे इनको आना एक मजबूरी
08:43थी कही ना कहीं दिखाना कि हम भी साथ मिला
08:47सकते हैं यह नहीं कि जो जो टूल वना रहा था भारत को अमेरिका नहीं है कि फोई प्रतिक्री है
09:06व्याकति Yes
09:09कि अप्सराइब के लिक लिजा कि और दो और प्सक्तार鐵ी कि गलत है
09:14कि हो दो कि अप्सक्राइब नग्डीर दाघ्टार प्सक्राइब अ
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