00:02नमस्कार, मैं श्वेता तिवारी आप सभी का अभिनन्दन करती हूँ, आईए आज आपको सुनाती हूँ राजस्थान पत्रिका की प्रधान संपादक,
00:11विद्या वाचस्पती गुलाब कुठारी जी का परिवार में प्रकाशित आलेक, जिसका शीशक है माता-पिता का साहच
00:20मात्री देवो भव, पित्री देवो भव, रूप में माता-पिता को देव तुल्य कहा है, माता-पिता की सेवा और
00:28उनके प्रतिसमर्पन का भाव ही सबसे बड़ा धर्म है, पौरानिक कथा के अनुसार एक बार शिव और पार्वती अपने पुत्रों
00:35की बुद्धी मत्ता �
00:37और विवेक को लेकर चर्चा कर रहे थे, शिव पार्वती ने दोनों पुत्रों की परिक्षा करने हित्तु कहा कि जो
00:43इस ब्रम्भांड की तीन बार परिक्रमा करके पहले लोटेगा, वही श्रेष्ट कहलाएगा, कार्तिकेय अपने वाहन मयूर पर सवार होकर ब्रम्भां�
01:07की प्रतिक्षा करने लगे, कार्तिकेय लोटे तो अच्रच से उन्होंने गणेश जी से पूछा कि तुमित्ति जल्दी तीवर गती से
01:14कैसे यह परिक्रमा पूर्ण कर सके, तब गणेश जी बोले कि मैंने तो सुना है कि माता पिता ही संपूर्ण
01:21ब्रम्भांड है, इसलिए
01:22ब्रम्भांड स्वरूप माता पिता की परिक्रमा ही मेरे लिए करनिय थी, गणेश जी के वचन को सुनकर माता पिता ने
01:30सहर्ष उन्हें प्रथम पूज्य की पदवी से विपूशित किया, माता पिता शिशु के प्रति विशिष्ट दाइत्मों का निर्वहन करते हैं,
01:38गर्
01:51बीज प्रदाता हैं, जो शरीर की रचना का प्रारंबिक कारण है, माता ख्षेत्र में बीज को स्थापित कर उसके पोशन
01:59का कार्य करती हैं, अपने पूर्व जन्मों के अनुसार ही जीव किसी परिवार विशेश में जन्म लेता हैं, गर्व काल
02:07में माता मुख्य भूमिका
02:18नियम और अनुशासन में माता की अपेक्षा पिता की भूमिका एहम हो जाती है, यह करो और यह मत करो
02:26का पहला पार्ट पिता ही पढ़ाता है, व्यवहारिक बुद्धी और आत्म विश्वास का भाव भी पिता से ही आता है,
02:33माता भावनातनिक दृष्टि से शिशू से जु
02:43ुपिता की भूमी का माता की प्रतिसपर्धी नहीं बलकी पूरक है।
02:48मा का प्यार, सुरक्षा और आत्मियता बच्चे को जड़ों से जोडती है।
02:53पिता साहस्वतंत्रता और विजय के लिए पंख देता है।
02:58इसलिए एक स्वस्थ संतान के निर्माण में माता-पिता दोनों का साहचर्य अपेक्षित है।
03:04इनके साहचर्य भाव में जिस बच्चे का पालन होता है, वे उत्कृष्ट मानविये गुनों से युक्त रहते हैं।
03:12परिवार का उचित्वातावरन उनके स्वभाव में परिलक्षित होता है, वे सहच भाव में सबके साथ जुड़ जाते हैं।
03:20Pariwaar maye sabhi gitakao maye sabhiagitaha nibhaltate hai, unka sabhabhav mi yangpahaspoon hota hai.
03:27Atmiyabhou se ve sabhi ke prati sambarpiti rahate hai, utsav priyata bhi unmeen rahati hai.
03:33Materapita ka sahaj baho hii sabhati sabhiakta sabhi sabhi mamani ke rupamantarit kar saka hai.
03:39Vanch parampara abhaman sammhan ka daidv chukhi sabhati sabhi sabhi sabhi sabharata par nibhara kata hai.
03:45Atah, uske paalan potion mee visheish jagrope rahna avoshyak hai.
03:49वर्तमान जीवन शैली में माता पिता दोनों के मध्य प्रेम व समर्पन का भाव खोता जा रहा है
03:56ऐसे में जब वे एक दूसरे को पूरक न मानकर प्रतिसपर्धी मानते हैं या संतान के सामने एक दूसरे का
04:03अपमान करते हैं
04:05तो बालक के बाल मन पर गहरा और दिर्ग कालिक प्रभाव पड़ता हैं उसमें असुरक्षा, अपराधभूद, चिंता, अवसाद, क्रोध, विद्रोह,
04:16रिष्टू के प्रति अविश्वास जैसे अनेक दुर्भाव पनपने लगते हैं
04:20उनका यह वहवार बच्चे के मस्तिश्क और हिदय आत्मा तीनों पर प्रहार करता हैं इसलिए माता पिता का पारस परिक
04:29साहचर्य ही संतान के प्रति सभी दायत्मों का निर्वहन करना चाहिए
04:35उनको संतान के समख्ष कभी या पक्ष नहीं रखना चाहिए कि आपस में उनका रिष्टा प्रेम भाव में बद्ध नहीं
04:42हैं
04:42कभी भी संतान के सामने जगड़ना नहीं चाहिए, एक दूसरे की अच्छाईयां रखनी चाहिए और यह विश्वास दिलाना चाहिए कि
04:51किसी भी परिस्थिती में कभी भी घबराने की आविश्यक्ता नहीं है, क्योंकि आपके माता-पिता सदैव आपके साथ हैं।
04:59यही विश्वास संतान जीवन परियंत सफलता के सौपानों पर चढ़ने में सहायक सिद्ध होता है।