00:00तमिल नाडू की धर्ती पर हिंदी नहीं पढ़ाई जा सकती, ऐसा नहीं हो सकता है।
00:04सुप्रम कोट ने 17 सितंबर को नवोदय विध्यालयों से जुड़े मामले की सुनवाई के दौराण तमिल नाडू सरकार से कहा
00:11कि उसे हिंदी को लेकर अपना नजरिया बदलना होगा।
00:15लेकिन इस टिपणी के पीछे सिर्फ हिंदी बनाम तमिल का बहस नहीं है।
00:19असल सवाल है कि शिक्षा नीती, भाशा, केंद्र और राज्य के अधिकार और सहकारी संखवाद के बीच संतुलन कैसे बनेगा।
00:27क्योंकि ये जो मामला है तमिल नाडू महिंदी पढ़ाने का ये दिन पर दिन ओलश्ता जा रहा है।
00:33और मामला भी इतना अगे बढ़ चुका है कि तमिल नाडू के मुख्यमंत्री जोसफ विजय अब केंद्र सरकार से सीधी
00:39टकड़ ले रहे हैं कि तमिल नाडू महिंदी नहीं पढ़ाये जाएगी।
00:42लेकिन अब जब सुप्रेम कोट ने अलग बयान दे दिया है तो इसके क्या माइन है आके क्या कुछ होगा
00:46आएए सब कुछ बिताते हैं आज के इस ख़बर में।
00:49नमस्कार मेरा नाम है रिचा पराश्वर और आप देख रहे हैं वन इंडिया हिंदी।
00:52कोट ने राज्य को तीन महीने का और समय दिया है लेकिन पूरा विवाद है चलिए पहले आपको वो समझाते
00:58हैं।
00:59जवाहर नवोदय विद्यालय केंद्र की ओर से वित्व पोशित आवासिय स्कूल है जिन्हें नवोदय विद्यालय समीती चलाती है जो शुक्षा
01:07मंत्रालय के अधिन काम करती है।
01:09लेकिन तमिलाडू में इन स्कूलों को लेकर लंबे समय से आपत्ती रही है, वजह सिर्फ स्कूल खोलने की नहीं है
01:15बलकि वहां लागू भाशा वेवस्था भी है, नवोदे विद्यालयों में तीन भाशा के फॉर्मूले के तहत हिंदी समेत भाशाओं की
01:22पढ़ाई होती है,
01:23जिबकि तमिलाडू 1968 से दो भाशा नीती पर चलता आया है, जिसमें तमिल और अंग्रेजी पर जोर है, यही अंतर
01:32अब सुप्रिम कोट तक पहुँचा, बद्रास हाई कोट ने पहले ही तमिलाडू में हर जिले में नवोदे विद्यालय स्थापित करने
01:38का निर्देश दिय
01:39था, हाई कोट ने माना था कि इन स्कूलों के स्थापना तमिल नाडू के तमिल लर्निंग कानून का उलंगहन नहीं
01:46करती, बाद में यह वाद सुप्रिम कोट पहुचा, 15 दिसम्बर 2025 को सुप्रिम कोट ने भी तमिल नाडू को हर
01:53जिले में नवोदे विद्याले के लिए उ
02:09अगस्टीन जॉर्ज मसी की बेंचु ने इस मांग को मानने से इनकार कर दिया, हलाकि कोट ने राज्यों को आदेश
02:15का पालन करने के लिए 3 महीने का आतरिक्त समय दिया है, लेकिन जमीन की पहचान करने की प्रक्रिया से
02:21राज्य सरकार पीछे नहीं हिच सकती, सुनवाई के
02:24दोरान भाषा का मुद्ध सबसे ज्यादा चर्चा में रहा, तमिलाडू सरकार की ओर से वरिष्ट वकील जैदीप गुपता ने दलील
02:31दी, कि राज्यों की दो भाषा नीती के खिलाफ जाकर किसी केंद्रिया मौडल को लागू करना सर्फ प्रिशास्रिक फैसला नहीं
02:38है, �
02:39उन्होंने कहा कि राज्यों हिंदी का विरोध भाषा के तौर पर नहीं कर रहा, बलकि ऐसी विवस्था का विरोध कर
02:44रहा है, जिसमें हिंदी को प्रमुखता मलती है, तमिलाडू की ओर से ये भी कहा गया कि नवोदय की नीती
02:50व्यकल्पिक है, और अदालत किसी सरकार को किस
02:53नीतिगत विकल्प को अपनाने के लिए बाध्य नहीं कर सकते, राज्य ने वित्य चुन्ता भी जताई, दलील दी कि स्कूलों
03:01में शिक्षकों और दूसरी व्यवस्थाओं का खर्च आखिरकार राज्य पर आ सकता है, और केंद्र के साथ पहले से मौजूद
03:08शिक्षा यो�
03:11कर भी विवाद है, दूसरी तरफ केंद्र सरकार ने कहा कि राज्य की मुख्य जिम्मदारी जमीन उपलब्ध कराना है, जबकि
03:18स्कूलों के निर्मान और बाके जरूरी विवस्थाओं का खर्च केंद्र उठाएगा, केंद्र की ओर से अडिशनल सॉलिसिटर जनरल के एम
03:38न
03:40पनी का आश्य ये था कि राज्य में पहले से चल रही अच्छी शिक्षा विवस्था के साथ अगर एक अतरिक्त
03:46विकल्प जुडता है, तो उससे राज्य का शैक्षिनिक स्तर कम नहीं होगा, इसी दोरान कूट ने तमिलाडू सरकार से कहा
03:53कि वो इस मामले को कठोरता से दे
04:07इग्रहेंड करने के लिए नहीं कह रहा है, बलकि सिर्फ उप्युक्त जमीन की पहचान करके पुराने आदेश का पालन करने
04:13को कह रहा है, सुप्रेम कोट ने सहकारी संगवाद की बाद भी उठाई, अधालत ने कहा कि केंद्र और राज्य
04:20के बीच मतभेद बाचीत से सुल
04:35इस आदेश को समझते समय दोनों बक्षों की दलीले देखना जरूरी है, अब इस पूरे मामले का सबसे एहम पहलू
04:43यही है, कि सुप्रेम कोट ने तमिल नाडु की दो भाशा नीती को खत्म करने का कोई आदेश नहीं दिया,
04:49अलालत का ततकाल निर्देश नवोदे विद्
05:01जुड़ा हुआ है, इसलिए इसे सीधे तोर पर तमिल नाडु की भाशा नीती खत्म करने या फिर खत्म होने के
05:08रूप में देखना बिल्कुल भी सही नहीं होगा, अब अगली सुनवाई 14 दिसंबर को रखी गई है, यानि कि अगली
05:14सुनवाई 14 दिसंबर को होगी, तब त
05:30सुप्रिम कोट का संदेश यही है, कि शिक्षा और बच्चों के आउसरों से जुड़े सवालों पर केंद्र और राज्य को
05:36आमने सामने खड़े होने के बजाए बाच्वीत का रास्ता अपनाना होगा, साथ मिलकर काम करना होगा, इसी वज़े से 17
05:43सितंबर की सुनवाई सर्
05:48भाशा और शिक्षा के अधिकारों के बीच संतुलन की बड़ी बहस बन गई है, इस खबर में तना ही लेकिन
05:56आप क्या सोचते हैं, क्या तमिलनाडू जो अपनी दो भाशानीती के तहत ठिका हुआ है, तमिलनाडू के लिए सरकार को
06:03और कोट को as it is वही रहने देना चाहिए
06:06या नवोदर विद्यालर समीतियों की स्थापना तमिलनाडू की बहतरी के लिए है, और तमिलनाडू में भी हिंदी पढ़ाई जाने चाहिए,
06:13जो कोट कह रहा है, आपको जो भी लगता है कॉमेंट में ज़रूर बताइए, साथी ऐसी और अपडेट्स के लिए,
06:19ताजा ख�
06:36झाल झाल झाल झाल