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CJI Surya Kant on NLSIU Controversy: NLSIU Convocation में CJI Surya Kant ने बाहरी ताकतों को लेकर बड़ा खुलासा कर दिया है। आखिर कौन हैं वो अनचाही ताकतें जिनकी वजह से देश की सबसे प्रतिष्ठित लॉ यूनिवर्सिटी का कार्यक्रम टालना पड़ा था?

Chief Justice of India (CJI) Surya Kant addressed the rescheduled 34th annual convocation of the National Law School of India University (NLSIU) in Bengaluru. During his address, CJI Surya Kant made a key observation regarding "external forces" that created uncertainty around the event, which was originally postponed from September 12 following student protests. He emphasized intellectual independence, ethics in the legal profession, and maintaining dignity while expressing dissent.

#CJISuryaKant #NLSIU #SupremeCourt #OneindiaHindi

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Transcript
00:00कुछ बाहरी ताकतों की वजह से कुछ अंचाही और दुर्भाग्य पूम पर इस दीत्यां पैदा हुई एक समय ऐसा लगा
00:06कि ये मौका शायद वैसा नहीं होगा जैसा हमने उम्मीद की थी
00:11ये शब्द हैं देश के मुख्यन आयदीश यानि की CGI सुर्यकांत के और इन शब्दों के सामने आने के साथ
00:17ही सवाल उठने ये लगे कि आखिर CGI बात किसकी कर रहे हैं
00:21कौन सी थी वो बाहरी ताकती जिनके वज़ह से देश की एक प्रतिष्ट्रित लौ यूनिवर्सिटी का दीख्षान समारों तक अर
00:28निश्चित्ता में घिर गया
00:30क्या ये सिर्फ एक कारेक्रम को लेकर विबात था या इसके पीछे न्याय पालिका चात्रों के विरूद और अभिव्यक्ति की
00:35आजादी से जुड़ी कोई बहस थी
00:37कहानी शुरू होती है बेंगलूरू की नेशनल लौ स्कूल आफ इंडिया यूनिवर्सिटी यानि की NLSIU से देश्ट की प्रतिष्टित कानूनी
00:46यूनिवर्सिटी में ये गिनी जाती है कानून की पढ़ाई वाली यूनिवर्सिटी में इनका बड़ा नाम है
00:51इस संस्था में 12 सितंबर को दीक्षान समारो होना था चात्रों को डिग्रियां मिलनी थी उनके परिबार इस खास दिन
00:57का इंतिजार कर रहे थे और कारेक्रम में मुख्या दी थी के तौर पर CGI सुरेकान को शामिल होना था
01:03लेकिन समारों से पहले ही विवात खड़ा हो गया
01:06यूनिवर्सिटी के कुछ चात्रों और पूर्व चात्रों ने CGI सुरेकान तथा बार काउंसल आफ इंडिया के अध्यक्षमानन कुमार मिश्रा को
01:13समारों में बुलाने पर आपत्ती रख दी
01:16विरोध दना चर्चा में आया कि 12 सितंबर को होने वाला समारों इस थागित करना पड़ा यूनिवर्सिटी की तरफ से
01:22आपरिहार्या परिस्तीतियों का हवाला दिया गया
01:25इसके बाद सवाल उठने लगे कि आखिर एक दीक्षान समारों को लेकर ऐसी क्या स्थिती बनी ऐसी स्थिती आखिर बनी
01:31ही क्यों कि इस टेट को आगे बढ़ाना पड़ा कारेकरम को सगित करना पड़ा लेकिन कहान यहाँ पर भी खत
01:38नहीं होती
01:39समारों की नई तारीक 17 अक्टूबर टैकी गई इस दन सीजी आई सुरेकांट यूनिवर्सिटी पहुँचे
01:44सब की नजरें इस बात पर थी कि क्या वो इस विवात पर कुछ कहेंगे क्या चात्रों के विरूत का
01:50जिक्र होगा और क्या उस अनिश्चित्ता पर कोई बात होगी जिसकी वज़ह से समारों की तारीक वदलने पड़ी
01:56फिर उनके भाषण में बाहरी ताकतों का जिक्राया, स्रीजी आई ने कहा कि कुछ अन्चाही और दुर्भाग्यापूर परिस्तीत्यों ने अनिश्चित्ता
02:03पैदा कर दी थी
02:04और एक समय ऐसा लगा कि अफसर उमीद के मुताबिक नहीं है, यह अफसर उमीद के मुताबिक हो नहीं पाएगा
02:10यही वो हिस्सा है जिसने पूरे घटना करम को एक बार फिर चर्चा मिला दिया
02:14लेकिन यहां एक बार समझना बेहद आवश्चक है, सीजियाई ने अपने भाषण में यह साफ नहीं किया कि वे किन
02:20बाहरी ताकतों की बात कर रही हैं
02:23उन्होंने किसी चात्र संगठन, राजनातिक दल या व्यक्ति का नाम लेकर आरूप नहीं लगाया
02:28इसलिए दावा करना कि उनका निशाना कोई खास संगठन था, उपलब्ध जानकारी से थाबित नहीं होता
02:33सवाल जरूर उठता है, लेकिन सवाल और आरूपों के बीच फर्क समझना होगा
02:38अब जरा सीजियाई के भाषण के दूसरे हिस्से पर गौर कीजिए
02:41उन्होंfish कानून की पठाई पूरी करने वाले चाथरों से कहा कि वकालत कमजोर दिलवालों का प्रेशा नहीं है
02:47यानि कानून की डिग्री हासल कर लेना ही काफी नहीं है
03:05उन्होंने अलसहमती को लेकर भी एहम संदीश दिया, किसी की बात को सहमत ना होना, किसी की बात को लेकर
03:11सहमती ना दर्स करना एक बात है, लिकिन उसकी गरिमा और उसकी प्रतिष्ठा का सम्मान करना दूसरी बात.
03:17किसी व्यक्ति के विचारों से अलसहमती का मतलब ये नहीं है कि उसकी बात सुने बिना उसके बारे में फैसला
03:23सुना दिया जाए और यही बात इस पुरे विवात को दल्चास पर बनाती है
03:27एक तरफ चातरों को अपनी अलसहमती जाहिर करने का अधिकार है तो दूसी तरफ सीजिया जैसे समधानिक पत पर बैठे
03:33व्यक्ति के बयान का महत्वभ्यूत नहीं महत्वपूर्ण है
03:36सवाल ये भी है कि विरूद और समभात के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए
03:40क्या किसी संस्थान में अलसहमती का मतलब कारे करम रूप देना होना चाहिए या बाच्छीत के जरिये रास्ता निकालना चाहिए
03:47फिलाल सीजिया ये बयान में बाहरी ताकतों के पहचान स्पष्ट नहीं है नेकिन NLSIU का ये घटना करम एक बड़ी
03:55बहत छिड़ गया
03:55अखर लग तंत्रा और कानून की दुन्या में असहमती की सीमा क्या है और जब विरूत किसी बड़े संस्थान की
04:02कारे करम तक कहुँच जाए तो समाधान का रास्ता क्या होना चाहिए यही विस सवाल है जिन पर अब चर्चा
04:07होनी बांकी है लेकिन इसके साथ साथ चर्चा �
04:09देश में चालूब देश में चोतरफा फैले SIR और ग्यानेश कुमार के विवाद पुले कर भी है वा साथ में
04:18सवाल ये भी बन रहा है कि क्या ग्यानेश कुमार के खिलाफ सीजेपी का प्रोटेस्ट भी कहीं न कहीं उस
04:24और भी एक मैसेज देने की कोशिश भी है
04:33क्या देश में प्रोटेस्ट का जो महाल है देश में जो विरूध करने की बात है जिस रेसिस्टेंस प्रति रूध
04:39की बात हो रही है
04:40CGI सूरे कांद उस पर टिपने करना चाहते थे
04:43अब ये मामला आपको लोग क्या सोचने हैं इस मामले को लेकर
04:46इस पर टिपने कीजिए और ये मामला आगे और दिल्चस्प होने वाला है
04:50जहिर तोर पर देश में अलग-अलग तारीकें टाय की गई है
04:53तमाव विरूद प्रदर्शनों के लिए अपनी राय कॉमंट ब्लॉक्स में जरूर दीजेगा
04:57मेरा नाम है मुकंदा बने रहे वन इंडिया के साथ शुक्रिया
05:03सब्सक्राइब तो वन इंडिया और नेवर मिस न अपडेट
05:07तारीकें लिए झालोग दो वन इंडिया अब्सक्राइब ब्लॉक्स

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