00:28पौरानिक कता के अनुसार
00:30वचन कहने लगी। राधारानी का ये रूप देखकर क्रिष्ण के परम मित्र श्रीदामा को बड़ा दुख हुआ। उन्होंने सोचा कि
00:37राधारानी ने प्रभुक श्रीक्रिष्ण से अनुचित व्यवहार किया। इसी कारण क्रोधवश्ण श्रीदामा ने राधाजी को शा
00:57श्रीदामा तुम भी राक्षस कुल में जन्म लोगे और वहां अपने कर्मों के कारण अंततम व्रत्यू को प्राप्त होगे। राधाजी
01:05के शाब के फलस्वरूप श्रीदामा का जन्म शंक चून राक्षस के रूप में हुआ। यही शंक चून भगवान विश्ण का
01:11अनन
01:11भक्त था जैसे बाद में भगवान श्रीव ने युद्ध में पराजत किया। उधर जब राधाजी क्रोधा वस्ता में पहुंची तब
01:19उनकी सखी विर्जा यिद्रश देखकर अत्यंत व्यत्त हुई और वहां से चली गई। वो जाकर नदी स्वरूप में परिवर्तित हो
01:36वहां आप व्रश भानूजी और उनकी पतनी कीर्थी देवी की पुत्री के रूप में प्रकट होना। सांसारी कृष्टी से आपका
01:44विवा रायान नामक वैश्य से होगा जो मेरा ही अन्शावतार होगा। इस प्रकार प्रित्वी पर भी आप मेरी प्रियास्व रूप
01:52में
01:53परन्तु हमें वहां वियोग और मिलन दोनों की लिल्ला का अनुभव करना होगा। भगवान कृष्ण के वचनों के पश्रात योग
02:00माया ने कीर्थी देवी के गर्ब में प्रवेश किया। जब कीर्थी देवी प्रसव पिड़ा से गुजर रही थी तब योग
02:06माया ने वा
02:23हुआ हुआ हुआ है
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